औपचारिक पुस्तक मेला : निजी स्कूलों का सिलेबस, ड्रेस-शूज नदारद, कॉपियों पर मिली छूट
निजी प्रकाशकों ने बनाई मेले से दूरी, सहायक आयुक्त ने 33 कॉपी खरीदी, पुस्तक के सवाल पर पल्ला झाड़ा

बड़वानी :-निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए एक स्थान पर पुस्तक, कॉपी, यूनिफार्म, शूज व स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण पहली बार जिला मुख्यालय पर पुस्तक मेले का आयोजन हुआ। तीन दिवसीय मेले के पहले दिन औपचारिकता देखने को मिली। अधिकारियों ने एकमात्र कॉपी स्टेशनरी के स्टॉल के साथ मेले की शुरुआत कर दी, लेकिन पालकों को पुस्तक, यूनिफार्म, शूज उपलब्ध नहीं करा पाए। इसका कारण निजी प्रकाशकों ने मेले में कोई रुचि नहीं दिखाई। इस कारण मेले में बच्चों के शैक्षणिक सिलेबस की सूची लेकर आए पालकों को मात्र कॉपियां खरीदकर लौटना पड़ा। हालांकि कॉपियों की खरीदी पर अभिभावकों की बाजार के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत छूट मिली, लेकिन जिम्मेदार पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से वापस लौटना पड़ा। दशहरा मैदान स्थित शासकीय एकीकृत मावि स्कूल परिसर में पुस्तक मेले के दौरान निरीक्षण के लिए पहुंचे सहायक आयुक्त डामोर ने एकमात्र कॉपियों के स्टॉल का निरीक्षण कर अपनी जेब से एक हजार रुपए नकद देकर 33 कॉपियों की खरीदी की। डामोर ने कहा कि मेले में कॉपियों पर बाजार के मुकाबले 40 से 50 प्रतिशत छूट मिल रही हैं, अभिभावकों ने इसका फायदा लेना चाहिए, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि यहां पुस्तकें, यूनिफार्म आदि सामग्री उपलब्ध क्यों नहीं करा पाए, तो वे पल्ला झाड़कर मेले से रवाना हो गए। इस दौरान डीपीसी अशरफ खान, डीईओ शीला चौहान, बीईओ मुकेश पंवार मौजूद रहे।

 *दर्ज पांच फर्म, नजर आई मात्र दो, शाम 5 बजे तक आए 42 पालक* 

मेले में सुबह 11 से शाम 5 बजे तक शहर की 10 से 12 निजी स्कूलों के 40 से अधिक बच्चों के पालक पाठ्‌यक्रम की खरीदी के लिए पहुंचे, लेकिन वे चिना पुस्तकों के मात्र कॉपियों की खरीदी कर लौटते नजर आए। स्कूल परिसर के बाहर टेंट लगाया गया, वहीं अंदर हॉल में टेबलें लगाकर स्टॉल बनाए गए थे। जहां प्रकाशन अपने स्तर से कॉपियां व अन्य सामग्री लेकर पहुंचे। शाम 5 बजे तक बाहर लगे टेंट की कुर्सियां आँधी पड़ी नजर आई। वहीं अंदर परिसर में अधिकारी समय काटते नजर आए। वहीं मेले में लगे स्टॉल पर रजिस्टर में पहले दिन पांच फर्म की एंट्री दशाई गई थी, लेकिन मौके पर मात्र दो फर्म नजर आई। शहर के एमजी रोड स्थित एक फर्म पर कॉपियों के साथ महज रबर, शॉपनर, पेंसिल दिखाई दी, तो दूसरी फर्म जिला मुख्यालय से 65 किमी दूर सेंधवा की थी।

 *निजी स्कूल सिलेबस की सूची-आदेश नहीं मिले* 

मेले में एनसीईआरटी बुक, कॉपी, शासकीय स्कूल की ड्रेस लेकर आए सेंधवा की गुप्ता बुक स्टोर्स के धर्मेंद्र पाटिल ने कहा कि दोपहर में ही सेंधवा से यहां आए है। निजी प्रकाशन की बुक की कोई सूची या आदेश नहीं मिले। 1 से 8वीं तक सिर्फ एनसीईआरटी की बुक है। पालक यह पुस्तक भी कोई एक, तो कोई दो ही खरीद रहा है। यूनिफार्म शासकीय स्कूल की हैं। प्राइवेट के नाम पर सरस्वती स्कूल सेंधवा की हैं। सेंधवा से जिला मुख्यालय पर सामग्री स्वयं के व्यय पर लाए है। रुकने की व्यवस्था नहीं होने पर रात में वापस सेंधवा जाएंगे ओर फिर अगले दिन आना पड़ेगा।
 *फैक्ट्री रेट में दे रहे विभिन्न कक्षाओं की कॉपियां* 
शहर के कॉपी स्टेशनरी व्यवसायी समीर परिहार ने बताया कि पहले दिन कम संख्या में कॉपी, स्टेशनरी लेकर आए है। डिमांड बढ़ने पर सामग्री भी अधिक लेकर आएंगे। कॉपियां नर्सरी से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के उपयोग के हिसाब से मेले में लेकर आए है। आज पहले दिन शाम 5 बजे तक करीब 40 अभिभावकों ने कॉपियों की खरीदी की है। मेले में कॉपियां फैक्ट्री रेट में दी जा रही हैं। जो कॉपी बाजार में 100 रुपए की हैं, वो यहां 70 रुपए में दे रहे हैं।

 *पालकों ने कहा- बिन तैयारी मेले में नजर आई औपचारिकता* 

-पालक हरीश कुमार ने कहा कि स्कूल के सोशल मीडिया ग्रुप पर पुस्तक मेले में सिलेबस खरीदी की सूचना मिली थी, लेकिन यहां पहुंचे तो मात्र कॉपियां ही उपलब्ध मिली। सिलेबस की पुस्तकें नहीं मिली।

- उर्मिला व्यास ने कहा कि उनका बच्चा शहर के निजी स्कूल में पढ़‌ता हैं। सिलेबस को सूची लेकर यहां आई थी। स्कूल प्रबंधन ने कहीं से भी पाठ्यक्रम खरीदी के लिए कहा हैं। पुस्तक मेले में मात्र कॉपियां मिली हैं, अब पुस्तकों के लिए निजी बुक स्टोर्स का रुख करना पड़ेगा।

-वहीं अन्य अभिभावकों ने कहा कि जब प्रशासन ने बिन तैयारी पुस्तक मेला लगा दिया। यहां कॉपियों के अलावा कुछ नहीं हैं। पुस्तकें एनसीईआरटी की हैं, जो निजी स्कूलों में नाम मात्र की रहती हैं। वहीं एकमात्र स्टॉल पर रखी सभी यूनिफार्म सरकारी स्कूलों की उपलब्ध रही।

 *पुस्तकों के सवाल पर डीईओ का गोल मोल जवाब*
जिला शिक्षा अधिकारी शीला चौहान ने बताया कि निजी स्कूलों में जो पुस्तक उपयोग में लाई जाती हैं, उससे संबंधित पुस्तक मेले का तीन दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। जिलेभर के 70 प्रकाशकों को सूचित किया था। पहले दिन कुछ प्रकाशक आए हैं, अन्य से चर्चा की जा रही है। दरअसल 1 अप्रैल से नया सत्र शुरु होना हैं, ऐसे में जिला मुख्यालय पर महज एनसीईआरटी की पुस्तक ही मिलने और निजी स्कूलों की बुक नहीं मिलने के जवाब पर डीईओ चौहान भी गोल मोल जवाब देते नजर आए।

 *निजी प्रकाशकों से विभाग के समन्वय की कमी* 

बता दें कि मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2017 और सहपठित नियम 2020 के प्रावधानों का सम्यक रूप से पालन के लिए उक्त पुस्तक मेले का आयोजन मात्र जिल्ला मुख्यालय पर 28 से 30 मार्च तक किया जा रहा हैं। जिले में करीब 310 निजी स्कूल हैं। ऐसे में मात्र तीन दिन में 300 से अधिक निजी स्कूल और वो भी जिले के 9 ब्लॉक के पालक यहां कैसे पहुंचेंगे, इसको लेकर अधिकारी खामोश नजर आए। वहीं पुस्तक मेले में मात्र दो फर्म द्वारा ही सहभागिता किए जाने से शिक्षा विभाग और निजी प्रकाशकों में समन्वय की कमी नजर आई।