जिला अस्पताल में पार्किंग माफिया का आतंक: मरीजों और महिलाओं से अभद्रता
गुना: जिला अस्पताल, जहां पीड़ितों को उपचार और राहत मिलनी चाहिए, वहां अब पार्किंग माफिया का आतंक छाया हुआ है। पार्किंग स्टैंड के कर्मचारियों द्वारा वसूली के नाम पर खुलेआम गुंडागर्दी की जा रही है, जो मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
बार-बार वसूली का खेल
हाल ही में अस्पताल के मुख्य पार्किंग स्टैंड पर एक घटना घटी, जहां एक बाइक सवार युवक और उसकी महिला साथी को जबरन रोक लिया गया। युवक ने बार-बार पर्ची काटने का विरोध किया, जबकि उसका कहना था कि वह पहले ही शुल्क का भुगतान कर चुका है। सवाल उठता है कि क्या मरीजों को हर बार अस्पताल के अंदर-बाहर होने पर नई पर्ची कटवानी होगी?
महिलाओं से अभद्रता, सुरक्षा पर सवाल
संवेदनहीनता का चरम तब देखा गया जब स्टैंड कर्मचारियों ने बाइक पर पीछे बैठी महिला मरीज के साथ गाली-गलौज और हाथापाई की। मरीज और उनके परिजन पहले से ही मानसिक तनाव में होते हैं, ऐसे में पार्किंग कर्मियों का यह रवैया उनकी परेशानी को और बढ़ा देता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ठेकेदार के कर्मचारी खुद को नियम-कानून से ऊपर समझते हैं और गाली-गलौज करना उनकी आदत बन चुकी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
आश्चर्य की बात यह है कि जिला अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के नाक के नीचे यह पार्किंग माफिया खुलेआम संचालित हो रहा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जिला प्रशासन इन दबंगों पर लगाम लगाएगा या मरीज इसी तरह लूट और बदसलूकी का शिकार होते रहेंगे?
नागरिकों की मांग
नागरिकों ने मांग की है कि पार्किंग के नियमों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए और अभद्रता करने वाले कर्मचारियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर ठेका निरस्त किया जाए। इस संबंध में जब सीएमएचओ डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।

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