जबलपुर: शहपुरा स्थित एथेनॉल फैक्ट्री पर आरोप को फैक्ट्री प्रबंधन ने बताया गलतफहमी, जांच टीम को भी नहीं मिला "धान का एक दाना"
बीते दिनो धान के अवैध भंडारण और चावल के अवैध परिवहन की शिकायत मिलने पर गुरुवार को शहपुरा स्थित एथेनॉल फैक्ट्री श्री बालाजी सॉल्यूशन्स में देर रात जांच कार्रवाई की गई। जहां जांच के दौरान धान तो नहीं मिली लेकिन कई बोरियों में भरा चावल फैक्ट्री परिसर में रखा पाया गया। हालांकि फैक्ट्री में पाया गया चावल भी दस्तावेजों के आधार पर वैध ही पाया गया,
जिला कलेक्टर ने जांच के बाद कहा:
जिसे लेकर जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया था कि फैक्ट्री में जांच के दौरान धान नहीं मिला, चावल जरूर मिला था जिसका उपयोग एथेनॉल बनाने में किया जाता हैं,
फैक्ट्री संचालक ने मीडिया को बताया:
वहीं इस पूरे मामले में फैक्ट्री संचालक मनीष सिंह ने बताया कि फैक्ट्री में धान का कोई उपयोग नहीं हैं, फैक्ट्री में केवल चावल और मक्के का उपयोग होता है, जिससे हम एथेनॉल बनाते है ये चावल एफसीआई और नागरिक आपूर्ति निगम से नीलामी में खरीदा जाता,
बीते दिनो जांच टीम भी फैक्ट्री में आई थी जिन्हें सारे दस्तावेज फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा दिए गए हैं
ये सारा मामला कुछ गलतफहमी के चलते तूल पकड़ गया, जो जांच के बाद दूर कर दी गई,
वहीं फैक्ट्री से चावल बेचने के संबंध में फैक्ट्री संचालक मनीष सिंह ने बताया कि फैक्ट्री खुद चावल की जरूरत होती हैं जो चीज हम स्वयं ही खरीदते हैं उसे बेचने का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता,
उन्होंने मीडिया को बताया कि लगभग 4 सालों से फैक्ट्री का संचालन क्षेत्र में किया जा रहा हैं इस फैक्ट्री से क्षेत्र के ही लगभग 350 घरों को रोजगार मिल रहा हैं, किसानों को भी इसका फायदा हो रहा है और जो चावल या मक्का खाने के उपयोग का नहीं होता उसे भी फैक्ट्री द्वारा उपयोग में लाया जाता हैं जिससे राजस्व को भी इसका फायदा होता हैं,
उन्होंने कहा कि इतने सारे फायदों के बीच फैक्ट्री द्वारा इन 4 सालों में न तो कोई गलत काम किया गया हैं और न ही भविष्य में कभी किया जाएगा, बीते दिनो हुई कार्यवाही केवल एक गलतफहमी के चलते हुई जो दूर कर दी गई हैं!

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