खकनार
प्राचीन श्री राम मंदिर जामुनिया की स्थापना 1912 हुई व 2012 में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का 100 जन्मोसव बड़ी आस्था पूर्वक मनाकर जबसे आज तक श्री राम मंदिर के पुजारी श्री मनीष जोशी के द्वारा श्री राम जन्मोसव मनाया जा रहा है ग्राम जामुनिया में 14 वर्षे से श्री मद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है इस वर्ष भी श्री राम नवमी एवम नव वर्ष के शुभ अवसर पर श्री राम नगरी जामुनिया में श्री संगीतमय श्रीमद भागवत कथा व हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है कथा वाचक प,पु,श्री सुशील चोरे जी महाराज ब्रह्मपुर के अमरवाणी से कथा के सातवे दिन
श्री कृष्णा सुदामा का वर्णन करते हुए चोरे महाराज ने कहा कि जिसके जीवन में राम है उसके जीवन में विश्राम है बिना मंडप बिना घोड़े के शादी हो जाएगी किंतु बिना ब्राह्मण के शादी नहीं हो सकती तो ब्राह्मण की दक्षिणा देने में कंजूसी क्यों बिना बाजे गाजे से विवाह हो जाएगा ब्राह्मण जाते-जाते वर वधु को आशीर्वाद दे जाएगा ब्रह्म मुहूर्त मैं विधि विधान से भगवान कृष्ण रुक्मणी का विवाह हुआ द्वारकाधीश की 16108 पत्नियां थी इन सारी पत्तनियों में से सबसे अच्छी पत्नी उसकी रुक्मणी थी जिसको जीवन मे कभी भी घुस्सा नही आता था शांत वह है जिसको जीवन में कभी कभी क्रोध आ जाए शांत से भी जो ज्यादा शांत है वह है प्रशांत जिसने इंद्रियों को जीता है ब्राह्मण धन क्या है उसकी शिक्षा जिसके हाथ मे कभी कोई धन न छुटे वह दरिद्र है और सुदामा के लिए यह शब्द कहना ठीक नही सुदामा ने कभी किसी के सामने हाथ नही फैलाये जो मिला उसी में वे हरि का भजन करते थे फिर भी द्वारकाधीश से कोई शिकायत नहीं की खाने का मतलब यह है कि भगवान के सामने जो तो वह सब कुछ जान जाते हैं बिना मांगे सब दे देते सुदामा जब श्री कृष्णा से मिलने गया तो श्री कृष्ण ने सुदामा को अपने पास सिंहासन पर बिठाया जहां स्वयं ब्रह्मा जी भी नहीं बैठ पाए वहां पर अपने मित्र सुदामा को बिठाया इसे कहते हैं मित्रता सच्चा मित्र वह है जो मित्र को मित्र समझे जिसके पास अधिक संपत्ति हो अधिक धन हो उसने कभी भी जीवन में अभिमान नहीं करना चाहिए इस कथा के साक्षी परीक्षित व सुखदेव जी है कथा में श्री कृष्ण रुक्मणी की झांकी तैयार की गई वह उन पर फूल बरसाए गए आज कथा को पूर्णाहुति दी गई शुक्रवार को महाप्रसादी भंडारी का आयोजन किया जाएगा जिसमें हजारों लोगों द्वारा मां प्रसादी का आनंद लिया जाएगा

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