मुंगावली: सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

मुंगावली क्षेत्र की सेवा सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ओडेर, मल्हारगढ़, डोंगरा केंद्र सेहराई सहित कई संस्थानों में पंजीयन के नाम पर लूट मची हुई है। असली किसान जब अपनी जमीन का रिकॉर्ड उपार्जन पोर्टल पर देख रहे हैं, तो उन्हें पता चल रहा है कि उनकी जमीन का पंजीयन किसी और ने करवा लिया है। प्रशासन के पास शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलें दौड़ रही हैं।

कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका संदिग्ध

इस पूरे खेल के पीछे केंद्रों पर बैठे कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका सामने आई है। ऑपरेटरों ने न केवल दूसरों की जमीन का फर्जी पंजीयन किया बल्कि कई मामलों में अन्य किसानों की भूमि को पोर्टल पर स्वयं की भूमि बताकर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिया। यह सीधे तौर पर डिजिटल रिकॉर्ड और आईडी के साथ छेड़छाड़ का गंभीर आपराधिक मामला है।

सत्यापन या 'भ्रष्टाचार की मुहर'?

सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की टीम पर है। आखिर कैसे बिना किसी भौतिक सत्यापन के इन फर्जी पंजीयनों को 'सत्यापित' कर दिया गया? जब पंजीयन कराने वाले का नाम और जमीन के असली मालिक का नाम मेल नहीं खा रहा था, तो पटवारी और तहसील स्तर पर इन्हें हरी झंडी कैसे मिली?

स्लॉट बुकिंग का खेल शुरू, माफिया 'उपज' तुलाने को तैयार

प्रशासन की 'जांच' की कछुआ चाल के बीच माफियाओं ने बिजली की फुर्ती दिखाई है। फर्जी पंजीयन धारकों ने न केवल स्लॉट बुक कर लिए हैं बल्कि वे अब खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज तुलाने की पूरी तैयारी में हैं। यदि आज इन स्लॉट्स पर तुलाई हो गई तो सरकारी पैसा सीधे माफियाओं के खातों में चला जाएगा और रिकवरी नामुमकिन होगी।

इन केंद्रों पर मचा है हड़कंप

  • डोंगरा केंद्र सेहराई व मल्हारगढ़: रकबे की हेराफेरी के सबसे ज्यादा मामले।
  • सेवा सहकारी समिति ओडेर केंद्र: दूसरों के खसरे पर पंजीयन की बाढ़।

तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?

  • जब फर्जीवाड़े की शिकायत मिल चुकी थी तो संदिग्ध पंजीयनों की स्लॉट बुकिंग ब्लॉक क्यों नहीं की गई?
  • क्या राजस्व विभाग के उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने आंख मूंदकर गलत नामों का सत्यापन किया?
  • क्या उपज तुलाने के बाद दोषियों को पकड़ा जा सकेगा या यह भी पिछले घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में दब जाएगा?

प्रशासन को अब 'जांच-जांच' का खेल बंद कर जमीनी कार्रवाई करनी होगी। यदि बिना नाम मिलान वाले पंजीयनों पर तुलाई हुई तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासन की मिलीभगत से ही किसानों के हक पर डाका डाला जा रहा है। मुंगावली के किसान कहते हैं कि अब खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों पर FIR और जेल होना चाहिए।

क्या बोले जिम्मेदार

पंजीयन के री सत्यापन के लिए पोर्टल खुलवाने के लिए पत्राचार किया है। खरीदी केंद्र पर सत्यापन उपरांत ही तुलाई कराई जाएगी। राजस्व विभाग इस पूरे मामले की जांच कर रहा है, जांच उपरांत जो भी सामने आएगा, कार्यवाही की जाएगी।

अमित सिंह भदोरिया, उप संचालक कृषि विभाग, अशोक नगर