गुना: जिला मुख्यालय के जनपद शिक्षा केंद्र के बाहर की स्थिति शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। यहां सड़कों में गड्ढे नहीं हैं, बल्कि गड्ढों के बीच कहीं सड़कों का नामोनिशान ही नहीं है।

शिक्षा की ऊंची-ऊंची बातें करने वाले विभाग के अपने ही दफ्तर के बाहर सड़क पूरी तरह गायब हो चुकी है और उसकी जगह ले ली है एक बदबूदार और जानलेवा दलदल ने।

स्थिति की गंभीरता

  • बारिश बीते हुए जमाना हो गया, लेकिन यहाँ का 'सरकारी तालाब' सूखने का नाम नहीं ले रहा।
  • यह पानी नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी का कीचड़ है जिसमें हर दिन जिले की शिक्षा व्यवस्था घुटनों तक डूबकर गुजरती है।
  • अधिकारी अपनी गाड़ियों में बैठकर इस कीचड़ को रौंदते हुए निकल जाते हैं, जबकि आम जनता, बुजुर्गों और मासूम बच्चों के लिए यहाँ पैदल चलना भी मौत को दावत देने जैसा है।

प्रशासन की लापरवाही

क्या गुना का प्रशासन इतना अंधा हो चुका है कि उसे मुख्य मार्ग पर गायब हो चुकी सड़क दिखाई नहीं दे रही? या फिर विभाग ने मान लिया है कि 'शिक्षा के मंदिर' तक जाने का रास्ता ऐसा ही पथरीला और कीचड़ भरा होगा?

जनता की चिंता

यह सीधे तौर पर सिस्टम की बेशर्मी है। अगर विभाग अपने दफ्तर के बाहर एक सड़क नहीं बनवा सकता, तो पूरे जिले के स्कूलों के कायाकल्प का दावा सिर्फ एक सफेद झूठ है। जनता अब पूछ रही है— साहब, सड़क कहाँ है? या फिर बजट भी इसी कीचड़ में बह गया?

यह मामला प्रशासन को जल्द से जल्द हल करना चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर कोई और दाग न लगे।