मार्कण्डेय संन्यास आश्रम की अनूठी पहल: मां नर्मदा तट पर 11 दीनदयालु कन्याओं का निःशुल्क सामूहिक विवाह
समाज सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हुए, ओंकारेश्वर स्थित मार्कण्डेय संन्यास आश्रम ने मां नर्मदा तट पर अभय घाट पर एक भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया। आश्रम से जुड़े संतों, भक्तों और स्थानीय नागरिकों के समर्थन से आयोजित इस कार्यक्रम में 11 जरूरतमंद कन्याओं का विवाह संपन्न कराया गया। सभी नवदंपति धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार परिणय सूत्र में बंधे।
विवाह समारोह पूरी तरह से धार्मिक और पारंपरिक विधानों के साथ संपन्न हुआ। आश्रम की ओर से प्रत्येक दूल्हा-दुल्हन को विवाह के वस्त्र, संपूर्ण विवाह सामग्री और गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक घरेलू उपयोग की वस्तुएं भेंट की गईं। विवाह उपरांत, सभी नवदंपतियों और अतिथियों के लिए प्रसादी भोजन की व्यवस्था की गई तथा विधिवत विदाई संपन्न कराई गई।
महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज का संदेश
कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज ने कहा, “गरीब और दीनदयालु परिवारों की कन्याओं का विवाह कराना सबसे बड़ा पुण्य और समाज सेवा का कार्य है, जिससे समाज के कई लोगों को अच्छी प्रेरणा मिलेगी। मां नर्मदा की कृपा से आश्रम पिछले तीन वर्षों से यह सेवा कार्य चला रहा है। हमारा उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं, बल्कि समाज में सहयोग, सेवा और संवेदना की भावना को जागृत करना है।”
आश्रम के इस प्रयास से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहारा मिलता है और बेटियों के विवाह की चिंता कम होती है।
समाज की सक्रिय सहभागिता
इस कार्यक्रम में आश्रम के संतों, भक्तजनों और क्षेत्र के अनेक नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों से समाज में सहयोग और संवेदना की भावना को बढ़ावा मिलता है, जो समाज के लिए अत्यंत लाभकारी है।

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