विरासत और शुरुआत

भोजन और स्वाद हमारी सांस्कृतिक पहचान और उद्यमशीलता का एक अभिन्न अंग हैं। मध्य प्रदेश का मालवा अंचल, विशेषकर रतलाम शहर, अपनी इसी स्वादिष्ट धरोहर के लिए विख्यात है। 'गेलडा नमकीन भंडार' रतलाम की उन पुरानी दुकानों में से एक है, जिसने पीढ़ियों से इस प्रामाणिक स्वाद को व्यापारिक धर्म के अनुसार संरक्षित रखा है।

इस प्रतिष्ठान की नींव आज से लगभग 75 वर्ष पूर्व रखी गई थी। एक छोटी सी शुरुआत से लेकर आज तक, इस प्रतिष्ठान ने गुणवत्ता के साथ कभी समझौता नहीं किया। दादाजी के हाथों से शुरू हुए इस व्यापार को बाद में पिता और चाचा ने पूरे समर्पण के साथ संभाला, और अब यह विरासत तीसरी पीढ़ी के हाथों में है।

जीआई टैग और आधुनिक बाज़ार की ओर बढ़ते कदम

परंपराओं को सहेजने के साथ-साथ आधुनिक समय के साथ कदम मिलाना भी व्यापार की आवश्यकता है। इसी दिशा में 'गेलडा नमकीन' ने हाल ही में अपनी पैकेजिंग में बदलाव किए हैं और रतलामी सेव के जीआई टैग को प्रमुखता से प्रदर्शित करना शुरू किया है।

प्रतिष्ठान की तीसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि, अंकित गेलडा बताते हैं, "मेरी फर्म 'गेलडा नमकीन भंडार' लगभग 75 वर्षों से इसी व्यवसाय में है। मैं अपने व्यापार की तीसरी पीढ़ी हूँ। हमारे दादाजी ने जो शुरुआत की थी, उसे मेरे पिता और चाचा ने संभाला और अब मैं इसे आगे बढ़ा रहा हूँ।"

अंकित बताते हैं कि कैसे आधुनिक बाज़ार में स्थानीय उत्पादों को स्थापित करने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता है। हाल ही में 22 मार्च को फिक्की और मध्य प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग द्वारा 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस पर चर्चा करते हुए वे कहते हैं, "एक रतलामी सेव निर्माता होने के नाते, हमारे पास स्वाद, गुणवत्ता और पैकेजिंग है। लेकिन हमें बाहर का बाज़ार दिलवाने में यदि सरकार की मदद मिल जाती है, तो हम मल्टीनेशनल कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।"

उनका लक्ष्य स्पष्ट है—वे चाहते हैं कि उनकी प्रामाणिक रतलामी सेव मॉडर्न ट्रेड के माध्यम से देश के हर कोने तक पहुंचे। वे अपनी मांग रखते हुए कहते हैं, "ऑनलाइन बाज़ार में पहुँच बनाने में सरकार हमारी मदद करे। डी-मार्ट, रिलायंस फ्रेश, जियोमार्ट जैसे बड़े मॉल्स और ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफार्म्स से हमारा सीधा संपर्क कराने में विभाग मदद करे तो यह हमारे लिए लाभकारी होगा।"

वे बताते हैं कि एमएसएमई मंत्री श्री चैतन्य काश्यप स्वयं रतलाम से ही हैं। "उनका पूरा सपोर्ट हमारे लिए रहता है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हमें इस विस्तृत बाज़ार में जाने की जो उम्मीद है, वह हमारे इस स्थानीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी," अंकित ने कहा।
सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान: 'वोकल फॉर लोकल' का प्रतीक

जीआई टैग इस बात का प्रमाण है कि रतलामी सेव का स्वाद रतलाम के विशेष पानी, यहाँ की जलवायु और कारीगरों के सदियों पुराने कौशल का परिणाम है। 'गेलडा नमकीन' का अपनी नई पैकेजिंग में इस जीआई टैग को प्रमुखता से प्रदर्शित करना एक बेहतरीन ब्रांडिंग रणनीति है। यह वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत का असली अर्थ है—अपनी स्थानीय विशिष्टताओं को पहचानना और उन्हें ब्रांड के रूप में स्थापित करना।

रतलामी सेव मध्य प्रदेश के पर्यटन और मालवा की पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अंकित गेलडा जैसे युवा उद्यमी यह साबित कर रहे हैं कि यदि पारंपरिक उत्पादों को सही प्लेटफार्म और आधुनिक सप्लाई चेन का समर्थन मिले, तो स्थानीय कारीगर और छोटे उद्योग भी बड़ी कंपनियों को टक्कर दे सकते हैं।

जड़ों से जुड़े रहकर आसमान छूने की कला

'गेलडा नमकीन भंडार' की यह 75 वर्षों की यात्रा बताती है कि यदि कोई व्यवसाय अपनी जड़ों से जुड़ा रहे और समय के साथ अपनी प्रस्तुति में नवीनता लाता रहे, तो उसकी प्रासंगिकता बनी रहती है। तीसरी पीढ़ी के नेतृत्व में, जीआई टैग वाली नई पैकेजिंग और ई-कॉमर्स व मॉडर्न ट्रेड की ओर बढ़ते कदमों के साथ, इस ऐतिहासिक दुकान ने एक नया प्रयास किया है। स्थानीय विरासत को सहेजने और उसे आधुनिक बाज़ार में एक राष्ट्रीय ब्रांड बनाने का यह सफर भारतीय उद्यमियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।