निसरपुर, डही, मनावर और धरमपुरी के क्षेत्रों में सरदार सरोवर बैकवाटर से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के वादे फिर से हवा में उड़ते नजर आ रहे हैं। क्या इस बार भी प्रभावितों को सिर्फ आश्वासनों की बारिश मिलेगी?

पुनर्वास स्थलों पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया में कई तरह की अनियमितताएं सामने आ रही हैं। एनवीडीए (NVDA) के पटवारियों और दलालों के बीच सांठगांठ की खबरें जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यह सब कुछ अंधेरे में चल रहा है, जहां अधिकारियों के साथ मिलकर पटवारी बघेल नकली पट्टे और फर्जी हस्ताक्षर के खेल में लिप्त हैं।

रजिस्ट्री में धांधली:

  • इंग्लिश और नॉन-वेज पार्टीज के माध्यम से अधिकारियों को लुभाने का प्रयास।
  • शासकीय छुट्टियों में भी चल रहा है कार्यालय का काम।
  • पटवारी और छोटे कर्मचारियों की मिलीभगत से नकली दस्तावेज तैयार।

इन सबके बीच दलालों का बोलबाला है, जो पुनर्वास स्थलों पर अदला-बदली का खेल जारी रखे हुए हैं। कई कालोनियों को इधर से उधर कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, और पंचायतों में प्रभावितों को उलझाने का कार्य भी जारी है।

अधिकारियों की उदासीनता: एनवीडीए के किसी भी अधिकारी ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा नहीं किया। इन घोटालों की वजह से पुनर्वास की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

क्या यह खेल फिर से प्रभावितों को लॉलीपॉप देने का है, या इस बार कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे? अब वक्त है कि उच्च अधिकारी जागें और इस घोटाले की तह तक जाएं, ताकि प्रभावितों को न्याय मिल सके।