अखण्ड यादव बल्देवगढ़। समीप कैलपुरा में स्थित देसी एवं अंग्रेजी कंपोजिट शराब दुकान एक बार फिर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। यह दुकान लायसेंस-माँ रतनगद, ट्रेडर्स एल एलपी को मिला है यहां खुलेआम उपभोक्ताओं से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई से दूर नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि शराब दुकान पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और आम जनता को मजबूरी में अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सादा सफेद क्वार्टर पर एमआरपी से करीब 25 रुपए अधिक वसूले जा रहे हैं, जबकि बियर पर 50 रुपए तक अतिरिक्त राशि ली जा रही है। इतना ही नहीं, अन्य ब्रांड की शराब की बोतलों पर भी मनमाने तरीके से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि विरोध करने पर दुकान कर्मचारी अभद्र व्यवहार करते हैं या फिर “ऊपर तक सेटिंग” का हवाला देकर मामले को दबाने की कोशिश करते हैं।

रेट सूची तक नहीं, नियमों का खुला उल्लंघन

सबसे गंभीर बात यह है कि दुकान पर कहीं भी रेट सूची प्रदर्शित नहीं की गई है, जबकि आबकारी नियमों के तहत यह अनिवार्य है। रेट सूची न होने से ग्राहकों को वास्तविक कीमत की जानकारी नहीं मिल पाती, जिसका फायदा उठाकर खुलेआम ओवरचार्जिंग की जा रही है। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का हनन है।

आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल

मामले की जानकारी जिला टीकमगढ़ के आबकारी विभाग के अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की मिलीभगत या लापरवाही के चलते ठेकेदार बेखौफ होकर नियमों का उल्लंघन कर रहा है। सवाल यह उठता है कि जब शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

राजस्व को भी लग सकता है नुकसान

विशेषज्ञों की मानें तो एमआरपी से अधिक वसूली का यह खेल केवल उपभोक्ताओं के शोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान होने की आशंका रहती है। यदि निर्धारित नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो बिक्री और लेखा-जोखा की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही दुकान पर तत्काल रेट सूची प्रदर्शित कराने और ओवरचार्जिंग पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर उपभोक्ताओं का शोषण यूं ही जारी रहेगा।