बैतूल जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और गर्भावस्था के दौरान आने वाली जटिलताओं को समय रहते पहचानने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान' का सफल आयोजन किया गया। प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को आयोजित होने वाले इस अभियान के तहत, जिले भर के स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं का चिकित्सकीय परीक्षण और परामर्श सुनिश्चित किया जाता है। प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, डॉ. जगदीश घोरे ने जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित शिविर में कुल 1173 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें से 484 महिलाओं को 'हाई रिस्क' (उच्च जोखिम) श्रेणी में चिन्हित किया गया है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य

इस अभियान का प्राथमिक लक्ष्य प्रसव पूर्व चरण में ही स्वास्थ्य संस्थाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की आवश्यक जांच, उचित चिकित्सकीय परीक्षण और परामर्श उपलब्ध कराना है। 'हाई रिस्क' श्रेणी में पाई गई महिलाओं का उचित प्रबंधन करके संस्थागत सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। शिविर के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य रूप से खून की जांच और जीडीएम (GDM) की स्क्रीनिंग की गई।

विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच का विवरण

जिले के विभिन्न सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञों द्वारा की गई जांच का विवरण निम्नलिखित है:

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भैंसदेही: डॉ. सुरेन्द्र धाकड़ द्वारा 42 महिलाओं की जांच, जिसमें 40 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आठनेर: डॉ. रूपल श्रीवास्तव द्वारा 111 महिलाओं की जांच, जिसमें 47 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमपुर: डॉ. तरूणा काकोडिया एवं डॉ. रीकेश काकोडिया द्वारा 138 महिलाओं की जांच, जिसमें 56 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर: डॉ. महिमा सिंह द्वारा 110 महिलाओं की जांच, जिसमें 53 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेहरा: डॉ. विवेक बारस्कर द्वारा 325 महिलाओं की जांच, जिसमें 80 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभात पट्टन: डॉ. सोनाली मरकाम द्वारा 56 महिलाओं की जांच, जिसमें 34 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मासोद: डॉ. अंकिता बास्कले द्वारा 105 महिलाओं की जांच, जिसमें 31 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिचोली: डॉ. मनीषा वर्मा द्वारा 111 महिलाओं की जांच, जिसमें 67 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोड़ाडोंगरी: डॉ. कविता कोरी द्वारा 83 महिलाओं की जांच, जिसमें 61 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुलताई: डॉ. सरिता कालभोर द्वारा 92 महिलाओं की जांच, जिसमें 48 हाई रिस्क महिलाएं मिलीं।

इस प्रकार, बैतूल जिले के विभिन्न केंद्रों पर स्वास्थ्य विभाग ने पूरी संवेदनशीलता के साथ हाई रिस्क महिलाओं की पहचान की है, ताकि समय पर उपचार और सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था की जा सके।

image source: https://betul.mpinfo.org