रीवा में जलीं मशालें, गरमाए सियासी गलियारे! न्याय सत्याग्रह में उमड़ा कांग्रेस का कुनबा

STATE NEWS AI JOURNALIST SURAJ KUMAR 

रीवा। जनहित, न्याय और स्वास्थ्य व्यवस्था के सवालों पर रीवा में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन न्याय सत्याग्रह अब सियासी तपिश बढ़ा रहा है। तीसरे दिन शाम 6 बजे निकले मशाल जुलूस ने आंदोलन को नया तेवर दे दिया। हाथों में मशाल और जुबान पर न्याय की मांग के साथ प्रदर्शनकारियों ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

यह आंदोलन अब महज धरने तक सीमित नजर नहीं आ रहा। स्वास्थ्य व्यवस्था और पीड़ितों को न्याय जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस नेताओं के एकजुट होने से रीवा से लेकर भोपाल तक सियासी चर्चाएं तेज होने के संकेत हैं।

आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे पूर्व मंत्री एवं CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल, पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने शक्ति प्रदर्शन का संदेश दिया।

मंच से उठी आवाज साफ थी—जनहित के सवालों पर अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक पीड़ितों को न्याय और स्वास्थ्य व्यवस्था में आवश्यक सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, संघर्ष जारी रहेगा।

मशाल जुलूस ने रीवा की सियासत में एक सवाल जरूर छोड़ दिया है—क्या सरकार इस बढ़ते आंदोलन को बातचीत से शांत करेगी या आने वाले दिनों में यह संघर्ष और बड़ा राजनीतिक मोर्चा बनेगा?