अनूपपुर, मध्य प्रदेश। लोकतंत्र की वास्तविक सफलता इस बात में निहित है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ सत्ता के गलियारों तक कितनी सुगमता से पहुँचती है। इसी सुशासन की संकल्पना को साकार करते हुए मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल देखने को मिली। कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में न केवल समस्याओं का अंबार लगा, बल्कि उन समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में प्रशासन ने कड़े कदम भी उठाए।
जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अर्चना कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन अब बंद कमरों से निकलकर जनता के बीच पहुँच चुका है।
1. जनसुनवाई का मुख्य घटनाक्रम: प्रशासनिक सक्रियता का संगम
जनसुनवाई का यह सत्र केवल कागजी खानापूर्ति नहीं था, बल्कि यह आम नागरिकों और उच्चाधिकारियों के बीच संवाद का एक जीवंत सेतु बना।
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भारी जन-भागीदारी: कलेक्ट्रेट के नर्मदा सभागार में सुबह से ही आवेदकों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जिले के दूरस्थ अंचलों से आए लोगों में अपनी समस्याओं के समाधान की एक उम्मीद देखी गई।
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प्रशासनिक पैनल: सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी के साथ अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री कमलेश पुरी और डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्राशी अग्रवाल ने पूरी तन्मयता से जनता की समस्याओं का विश्लेषण किया।
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निराकरण का संकल्प: प्राप्त हुए 62 आवेदनों में से प्रत्येक को कंप्यूटर प्रणाली में दर्ज कर संबंधित विभागों को एक निश्चित समय-सीमा (Time-limit) के भीतर समाधान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
2. सामाजिक सुरक्षा और मानवीय संवेदनाएं: विधवा पेंशन और सम्मान निधि
जनसुनवाई के दौरान सबसे संवेदनशील मामले सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े रहे।
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श्रीमती कमलाबाई का संघर्ष: ग्राम छिल्पा से आईं श्रीमती कमलाबाई का मामला प्रशासनिक शिथिलता का उदाहरण बना। उन्होंने बताया कि उनकी विधवा पेंशन और पीएम किसान सम्मान निधि की राशि लंबे समय से लंबित है।
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त्वरित कार्रवाई: सीईओ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बैंक और राजस्व अधिकारियों को तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए ताकि एक विधवा महिला को उसका अधिकार मिल सके।
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संबल कार्ड और ईकेवाईसी: ग्राम बनगवॉ के श्री जाकिर हुसैन ने संबल योजना के लाभ में आ रही तकनीकी दिक्कतों को साझा किया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाना उनकी प्राथमिकता है।
3. बुनियादी सुविधाएं: बिजली, पानी और आवास की गूँज
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की मांग प्रमुखता से उठी:
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विद्युत कनेक्शन: ग्राम मौहरी के श्री शंकर रावत ने बिजली कनेक्शन न होने की समस्या उठाई, जिस पर विद्युत विभाग को तुरंत एस्टीमेट तैयार कर कनेक्शन प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
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प्रधानमंत्री आवास योजना: नगरपालिका अनूपपुर के श्री बृजेश जाधो जैसे कई आवेदकों ने सिर पर पक्की छत की मांग की। पीएम आवास योजना की किस्तों के भुगतान और नए सर्वेक्षण में नाम जोड़ने के आवेदनों पर सीईओ ने सख्त रुख अपनाते हुए नगरपालिका अधिकारियों को पारदर्शिता बरतने को कहा।
4. भूमि सुधार और जनजातीय अधिकार: अस्तित्व की लड़ाई
अनूपपुर जैसे जनजातीय बाहुल्य जिले में भूमि से जुड़े मामले सबसे अधिक जटिल और संवेदनशील होते हैं।
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नामांतरण और बंटवारा: ग्राम मलगा के श्री प्यारेलाल ने पैतृक भूमि के बंटवारे और नामांतरण में हो रही देरी की शिकायत की।
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पट्टा अधिकार: ग्राम छिल्पा की श्रीमती बेला बाई बैगा ने भूमि के पट्टे की मांग की। जनजातीय समुदायों के लिए भूमि केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनके अस्तित्व का आधार है, इस बात को समझते हुए राजस्व विभाग को विशेष शिविर लगाकर इन मामलों को सुलझाने के निर्देश दिए गए।
5. मानवीय-वन्यजीव संघर्ष: हाथी प्रभावित क्षेत्रों की चुनौती
वन बाहुल्य अनूपपुर में जंगली हाथियों का उत्पात एक बड़ी मानवीय त्रासदी बनता जा रहा है।
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श्रीमती बैसखिया का प्रकरण: ग्राम खांड़ा की श्रीमती बैसखिया ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हाथियों ने उनका घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है, लेकिन मुआवजा राशि अब तक अप्राप्त है।
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प्रशासनिक संवेदनशीलता: श्रीमती अर्चना कुमारी ने इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए वन विभाग और राजस्व विभाग को 24 घंटे के भीतर समन्वय स्थापित कर राहत राशि जारी करने का आदेश दिया।
6. सुशासन और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण: 'लाइव ऑडिटिंग'
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह जनसुनवाई मध्य प्रदेश में 'सुशासन' के मॉडल को पुष्ट करती है।
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जवाबदेही का स्तर: जब जिला स्तर के बड़े अधिकारी सीधे आम आदमी से मुखातिब होते हैं, तो निचले स्तर के कर्मचारियों (पटवारी, सचिव) पर कार्य के प्रति दबाव बढ़ता है।
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भ्रष्टाचार पर प्रहार: डिजिटल ट्रैकिंग और समय-सीमा तय होने से दलालों और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो रही है।
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क्षेत्रीय सुधार: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर ही इन समस्याओं का 80% समाधान हो जाए, तो जिला मुख्यालय पर दबाव कम होगा और प्रशासन अधिक नीतिगत कार्यों पर ध्यान दे सकेगा।
7. स्थानीय प्रभाव और भविष्य की राह
इस जनसुनवाई के बाद अनूपपुर प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास में वृद्धि हुई है।
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संतुष्टि का भाव: कई आवेदकों ने मौके पर ही अपनी शिकायतों के समाधान की संभावना देखकर संतोष व्यक्त किया।
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पारदर्शिता: सुश्री प्राशी अग्रवाल और श्री कमलेश पुरी जैसे अधिकारियों की सक्रियता ने फाइलों के बोझ को कम करने का काम किया है।
निष्कर्ष: सुशासन का पथ
अनूपपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह जनसुनवाई केवल एक साप्ताहिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि न्याय की एक चौपाल है। श्रीमती अर्चना कुमारी के नेतृत्व में हुई यह कार्यवाही यह संदेश देती है कि सरकार की योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति की झोपड़ी तक पहुँचना चाहिए। इन 62 आवेदनों का समाधान ही अनूपपुर के सुशासन की असली कसौटी होगा।
image source : https://anuppur.mpinfo.org

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