मध्य प्रदेश के दमोह जिले में सुशासन, जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला प्रशासन द्वारा एक वृहद जनसुनवाई का आयोजन किया गया। आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनने, उनकी बारीकियों को समझने और उनका सरकारी स्तर पर त्वरित समाधान निकालने के मुख्य उद्देश्य से दमोह जिले के कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को यह विशेष जनसुनवाई आयोजित की गई। प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण जनसंपर्क कार्यक्रम का विस्तृत विवरण और सभी मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1.कलेक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 10 (व्यारमा) में भव्य आयोजन: दमोह जिले के आम नागरिकों को न्याय और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आयोजित इस जनसुनवाई की कमान स्वयं दमोह जिले के कलेक्टर श्री प्रताप नारायण यादव ने पूरे नेतृत्व के साथ संभाली। आम जनता की भारी भीड़ की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से सुचारू बनाए रखने के लिए यह जनसुनवाई कलेक्टर कार्यालय के एक बड़े और विशेष कक्ष, कक्ष क्रमांक 10 में आयोजित की गई थी। इस कक्ष को जिले के प्रशासनिक ढांचे में 'व्यारमा' (Vyarma) के नाम से भी विशेष रूप से जाना जाता है। इस कक्ष में आयोजित की गई इस मैराथन जनसुनवाई का मुख्य और प्राथमिक लक्ष्य दमोह जिले के अत्यंत दूरदराज, पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी विभिन्न प्रकार की परेशानियां लेकर आने वाले हितग्राहियों तथा आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक बिना किसी बिचौलिए के पहुंचाना था।
2. 283 आवेदनों पर जनसुनवाई और समय-सीमा में निराकरण के सख्त निर्देश: प्रशासन और दमोह की जनता के बीच सीधे और पारदर्शी संवाद के इस महत्वपूर्ण मंच पर अपनी पीड़ा और शिकायतें साझा करने के लिए जिले भर से बड़ी संख्या में लोग भारी उम्मीदों के साथ पहुंचे थे। प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी और आंकड़ों के अनुसार, इस सामान्य जनसुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 283 आवेदन प्राप्त हुए। इन 283 आवेदनों में जिले के अलग-अलग अंचलों से आए लोगों की विविध प्रकार की शिकायतें, रुकी हुई सरकारी योजनाओं से जुड़ी मांगें, जमीन के विवाद और अन्य जमीनी स्तर की कई जटिल समस्याएं शामिल थीं। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक कुशल प्रशासक की भांति अत्यंत संवेदनशीलता और धैर्य के साथ एक-एक करके सभी 283 आवेदनों की फाइलों पर विस्तार से सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के ठीक पश्चात, उन्होंने मौके पर ही मौजूद विभिन्न सरकारी विभागों के संबंधित आला अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया। कलेक्टर ने अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि जनता द्वारा प्राप्त हुए इन सभी आवेदनों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए, बल्कि इनका निराकरण एक निर्धारित 'समय-सीमा' (Time-limit) के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए।
3. बालाकोट के किसान हुकुम सिंह की खराब बीज की समस्या और मुआवजे की मांग: कृषि प्रधान जिले में आयोजित इस जनसुनवाई के मंच पर किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी गंभीर समस्याओं को अत्यंत प्राथमिकता के साथ सुना गया। इसी क्रम में, दमोह जिले के ही अंतर्गत आने वाले बालाकोट क्षेत्र के एक स्थानीय निवासी और किसान हुकुम सिंह ने कलेक्टर के समक्ष अपना एक अत्यंत गंभीर और नुकसान से जुड़ा मामला प्रस्तुत किया। किसान हुकुम सिंह ने अपने लिखित आवेदन में कलेक्टर को विस्तार से बताया कि उन्होंने अपनी दो एकड़ की कृषि भूमि में फसल बोने के मुख्य उद्देश्य से 'कृषि विभाग' के माध्यम से बीज की दो थैलियां (पैकेट) प्राप्त की थीं। किसान द्वारा पूरी मेहनत और लागत लगाकर उन बीजों की बुवाई अपनी दो एकड़ जमीन पर की गई थी। परंतु, दुर्भाग्यवश उन सरकारी बीजों से खेत में किसी भी प्रकार की उपज पैदा नहीं हुई, जिससे किसान की पूरी मेहनत, पैसा और बहुमूल्य समय पूरी तरह से बर्बाद हो गया। बीज की गुणवत्ता और इस भारी आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए पीड़ित किसान ने प्रशासन से अपने नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। किसान की इस पीड़ा पर तुरंत संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित कृषि अधिकारी को तत्काल इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर उचित और न्यायपूर्ण कार्यवाही करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
4. ग्राम देवरी जमादार की महिला किसान मनकोरा बाई का स्थाई सिंचाई पंप और बिजली कनेक्शन का मामला: दमोह जिले के ही ग्राम देवरी जमादार की निवासी एक प्रगतिशील महिला किसान ने भी खेती से जुड़ी अपनी एक अत्यंत बुनियादी समस्या जिला प्रशासन के समक्ष रखी। आवेदिका मनकोरा बाई (जिनके स्वर्गीय पति का नाम सुखराम अठ्या है) ने अपनी कृषि भूमि पर सिंचाई की समुचित सुविधा विकसित करने को लेकर अपना आवेदन दिया। उन्होंने अपने आवेदन पत्र में अपनी भूमि का पूर्ण और सटीक विवरण देते हुए बताया कि उनकी जमीन पटवारी हल्का नंबर (प.ह.नं.) 81 के प्रशासनिक दायरे के तहत आती है, जिसका कुल रकबा 0.48 हेक्टेयर/एकड़ है। इसके अलावा यह भूमि राजस्व निरीक्षक मंडल (रा.नि.मं.) इमलिया के अंतर्गत स्थित है। मनकोरा बाई अपनी इस चिन्हित कृषि भूमि पर फसलों की सुचारू सिंचाई के लिए एक स्थाई पानी का पंप स्थापित करना चाहती हैं, जिसके नियमित संचालन के लिए उन्हें बिजली विभाग से स्थाई विद्युत कनेक्शन की नितांत आवश्यकता है। महिला किसान के इस विकासशील आवेदन को पूरी गंभीरता से लेते हुए तुरंत बिजली विभाग के अधिकारियों को तलब किया गया और उन्हें आवश्यक तथा त्वरित कार्यवाही कर कनेक्शन मुहैया कराने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए।
5. कस्तूरी बाई लोधी का स्थाई पंप कनेक्शन हेतु प्रस्तुत किया गया आवेदन: ग्राम देवरी जमादार से ही कृषि और सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी एक और बिल्कुल समान समस्या इसी जनसुनवाई के दौरान दर्ज की गई। इसी ग्राम की एक अन्य निवासी महिला कस्तूरी बाई लोधी ने भी जनसुनवाई में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कलेक्टर को अपना मांग पत्र सौंपा। कस्तूरी बाई लोधी ने भी अपनी खेती की भूमि को भविष्य में बेहतर ढंग से सिंचित करने और पैदावार बढ़ाने के स्पष्ट उद्देश्य से यह आवेदन प्रस्तुत किया। उनका मुख्य उद्देश्य भी अपनी कृषि भूमि पर स्थाई मोटर पंप स्थापित करने के लिए बिजली विभाग से बिना किसी बाधा के स्थाई विद्युत कनेक्शन प्राप्त करना है। प्रशासन द्वारा इस महत्वपूर्ण आवेदन को भी बिना किसी देरी के संबंधित बिजली विभाग की ओर आवश्यक और त्वरित कार्यवाही हेतु भेज दिया गया है।
6. 13 वर्षीय होनहार छात्र श्रेयांस जैन का शिक्षा और टीसी (TC) से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला: इस ऐतिहासिक जनसुनवाई में केवल कृषि या भूमि विवाद के मामले ही नहीं आए, बल्कि शिक्षा के अधिकार और बच्चों के भविष्य से जुड़ी एक अत्यंत संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण समस्या भी खुलकर सामने आई। मात्र 13 वर्ष की अल्प आयु के एक छोटे परंतु होनहार छात्र श्रेयांस जैन ने अपनी शिक्षा से जुड़ा अपना एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवेदन स्वयं कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया। छात्र श्रेयांस जैन ने पूरी बेबाकी से अपनी समस्या बताते हुए कहा कि वह वर्तमान में बांसा तारखेड़ा में स्थित 'केशव चिल्ड्रन स्कूल' में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा है। अपनी मेहनत और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उसका चयन एक प्रतिष्ठित 'एक्सीलेंस स्कूल' (उत्कृष्ट विद्यालय) में हो गया है और वहां प्रवेश सूची में उसका नाम भी आ गया है। लेकिन, विडंबना यह है कि उसके वर्तमान स्कूल (केशव चिल्ड्रन स्कूल) के प्रबंधन द्वारा उसे किसी कारणवश टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट या स्थानांतरण प्रमाण पत्र) प्रदान नहीं की जा रही है। नियमतः एक्सीलेंस स्कूल में बिना मूल टीसी के उसका नाम दर्ज नहीं किया जा रहा है, जिससे इस मेधावी छात्र का भविष्य पूरी तरह से अधर में लटक गया है। एक छोटे बच्चे के इस गंभीर मामले को सुनकर कलेक्टर ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग को हस्तक्षेप करने और आवश्यक कदम उठाते हुए छात्र को टीसी दिलवाने के निर्देश दिए हैं।
7. स्वास्थ्य परीक्षण, आधार अपडेशन शिविर और सामूहिक आवेदनों की प्रस्तुति: दमोह जिले की इस जनसुनवाई को केवल एक शिकायत निवारण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुउद्देशीय जनकल्याणकारी सेवा शिविर के रूप में भी अत्यंत सफलतापूर्वक संचालित किया गया। जनसुनवाई स्थल पर ही दूर-दराज से आए लोगों की सुविधा के लिए 'आधार कार्ड' से जुड़े सुधार कार्यों की विशेष व्यवस्था की गई थी। इस सुविधा का सीधा लाभ उठाते हुए मौके पर ही 11 नागरिकों के आधार कार्ड का सफलतापूर्वक अपडेशन कार्य पूर्ण किया गया। इसके अतिरिक्त, जनसुनवाई में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम द्वारा एक स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया था। इस स्वास्थ्य शिविर में कुल 145 ग्रामीण और शहरी लोगों के स्वास्थ्य का निःशुल्क और सघन परीक्षण किया गया। इन सभी व्यक्तिगत आवेदनों और दी गई सुविधाओं के साथ-साथ, जनसुनवाई के दौरान क्षेत्र की जनहितैषी मांगों, गांव के विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण 'सामूहिक आवदेन' भी ग्रामीणों के विभिन्न समूहों द्वारा प्रशासन को सौंपे गए।
8. जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी: दमोह जिले की इस पूरी जनसुनवाई प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलाने, विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय स्थापित करने और जनता की समस्याओं का मौके पर ही त्वरित निराकरण करने के लिए जिले के कई वरिष्ठ और आला अधिकारी एक ही स्थान पर उपस्थित रहे। दमोह कलेक्टर श्री प्रताप नारायण यादव के साथ जनसुनवाई में मुख्य रूप से जिला पंचायत के सीईओ (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) श्री प्रवीण फुलपगारे पूरे समय उपस्थित थे। इसके साथ ही प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहीं अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम भी वहां मौजूद रहीं। इनके अलावा, राजस्व मामलों को देखने वाले डिप्टी कलेक्टर श्री आर.एल. बागरी, डिप्टी कलेक्टर सुश्री रचना प्रजापति, और लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत कार्यों की निगरानी करने वाले लोकसेवा प्रबंधक श्री चक्रेश पटेल ने भी इस पूरी जनसुनवाई में अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जिले के अन्य सभी संबंधित सरकारी विभागों के अधिकारीगण भी इस संपूर्ण जनसुनवाई के दौरान जनता की सेवा के लिए पूरे समय मुस्तैदी से मौजूद रहे।
image souce:https://damoh.mpinfo.org

Continue With Google
Comments (0)