राजगढ़, मध्य प्रदेश: राजगढ़ जिले के किसानों को शासन की समस्त कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुगमता, पारदर्शिता और समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक व्यापक और सघन अभियान की शुरुआत की जा रही है। राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने जिले में कृषि व्यवस्था के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में कड़े कदम उठाते हुए ‘ई-विकास प्रणाली’ (E-Vikas System) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का मुख्य फोकस एग्रीस्टेक पोर्टल (AgriStack Portal) पर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री और बकेट क्लोजिंग कार्य को शत-प्रतिशत पूर्ण करने पर है, जिसके लिए अब जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत के स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर राजगढ़ जिले के कलेक्टर डॉ. मिश्रा द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय बैठक और उसमें लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
1. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय और विस्तृत समीक्षा
राजगढ़ जिले में कृषि और किसानों से जुड़ी डिजिटल योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रगति का जायजा लेने के लिए कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में जिले के प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की गई। बैठक में मुख्य रूप से:
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जिले की समस्त जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEOs)।
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विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक।
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जिला प्रबंधक ई-गवर्नेंस।
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जी.एम. सीसीबी (GM CCB)।
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सी.एस.सी. (CSC) केंद्र प्रभारी उपस्थित रहे।
इस बैठक का मुख्य एजेंडा ई-विकास प्रणाली के प्रभावी और निर्बाध क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा इसमें आ रही तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाना था।
2. फार्मर रजिस्ट्री एवं बकेट क्लोजिंग में तेजी लाने के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्ट के अनुसार, राजगढ़ जिले में फार्मर रजिस्ट्री एवं बकेट क्लोजिंग कार्य की जो वर्तमान प्रगति है, वह निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में अपेक्षाकृत काफी कम पाई गई है। इस स्थिति पर गंभीरता व्यक्त करते हुए कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रगति में सुधार लाने और एग्रीस्टेक पोर्टल पर डेटा अपडेट करने के लिए अब जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से छूटे हुए सभी किसानों का पंजीयन सुनिश्चित किया जाएगा।
3. ग्राम पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों का पूर्ण मोबिलाइजेशन
इस वृहद अभियान को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर के कर्मचारियों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने बैठक में कड़े निर्देश दिए हैं कि:
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सभी ग्राम पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों को इस कार्य के लिए पूर्ण रूप से मोबिलाइज (सक्रिय) किया जाए।
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यह सुनिश्चित किया जाए कि वे पूरी निष्ठा के साथ फार्मर रजिस्ट्री एवं बकेट क्लोजिंग कार्य में गति लाएं।
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किसानों की फार्मर आईडी जनरेट करने का कार्य ग्राम पंचायतों के अटल सेवा केंद्रों और पंचायत भवनों में बैठकर ही किया जाए, ताकि किसानों को अपने गांव से दूर भटकना न पड़े और वे आसानी से अपना पंजीयन करा सकें।
4. शत-प्रतिशत फार्मर आईडी लिंकिंग की अनिवार्यता और लाभ
कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शासन की विभिन्न कृषि और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर किसानों तक पहुंचाने के लिए शत-प्रतिशत फार्मर आईडी लिंकिंग अत्यंत आवश्यक है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि:
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भविष्य में खाद एवं बीज का वितरण केवल ई-विकास प्रणाली में एनरोलमेंट (पंजीयन) के पश्चात ही किया जाएगा।
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वर्तमान में फार्मर रजिस्ट्रेशन नंबर से लिंक कुल भूमि के अनुपात में ही फसलों का उपार्जन (MSP पर खरीदी) किया जा रहा है।
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इसी पोर्टल के माध्यम से कृषकों को खाद वितरण की पारदर्शी व्यवस्था भी संचालित की जा रही है। अतः यदि किसान की आईडी लिंक नहीं होगी, तो उसे इन मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
5. जागरूकता अभियान और कर्मचारियों का विशेष प्रशिक्षण
किसानों को इस नई डिजिटल प्रणाली के प्रति जागरूक और प्रेरित करने की जिम्मेदारी सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को सौंपी गई है। प्रशासन का मानना है कि जब तक किसान स्वयं इसके लाभों को नहीं समझेंगे, तब तक शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करना कठिन होगा। इसके अलावा, तकनीकी खामियों से बचने और कार्य को त्रुटिरहित बनाने के लिए:
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सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्राम पंचायत सचिवों एवं रोजगार सहायकों का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करें।
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इस प्रशिक्षण का उद्देश्य फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-विकास प्रणाली से संबंधित कार्यों का प्रभावी और सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है।
6. सहकारी समितियों में रिटेलर मोबाइल एप की सक्रियता
कलेक्टर ने खाद और बीज वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने जिले की समस्त सहकारी समितियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि:
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सभी समितियों में अनिवार्य रूप से रिटेलर मोबाइल एप डाउनलोड कराया जाए।
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एप को केवल डाउनलोड ही न किया जाए, बल्कि उसे तत्काल प्रभाव से सक्रिय (Activate) कर उसका उपयोग शुरू किया जाए, ताकि खाद-बीज की कालाबाजारी पर रोक लग सके और सही किसान को उसका हक मिल सके।
7. शिविरों का सुव्यवस्थित संचालन और पूर्व सूचना व्यवस्था
पंचायत स्तर पर लगने वाले विशेष शिविरों को सुनियोजित ढंग से चलाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है:
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अनिवार्य उपस्थिति: प्रत्येक ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाले शिविर में संबंधित सी.एस.सी. केंद्र प्रभारी, ग्राम पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी।
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पूर्व सूचना का प्रावधान: शिविर आयोजन की निर्धारित तिथि से कम से कम एक दिवस (एक दिन) पूर्व ही ऐसे कृषकों को व्यक्तिगत रूप से सूचना दी जाएगी, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री अथवा बकेट क्लोजिंग का कार्य अभी लंबित है।
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किसानों को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि वे शिविर में अपने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित हों ताकि मौके पर ही उनकी समस्या का निराकरण कर पंजीयन पूर्ण किया जा सके।
8. निजी भूमि लिंकिंग का लक्ष्य और अधिकारियों की जवाबदेही
इस महा-अभियान के अंतर्गत राजगढ़ जिले के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के तहत ग्राम पंचायत क्षेत्र की शत-प्रतिशत (100%) निजी भूमि को फार्मर आईडी से लिंक करने का कड़ा लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासन ने जवाबदेही भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है:
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समस्त पंचायत स्तरीय शिविरों के सुचारू संचालन, व्यवस्थापन और कार्य की दैनिक प्रगति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को सौंपी गई है।
9. नोडल अधिकारी की नियुक्ति और सतत मॉनिटरिंग
इस पूरे महत्वाकांक्षी अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, जमीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं के त्वरित निराकरण और प्रगति की सतत (लगातार) मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की गई है।
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राजगढ़ कलेक्टर डॉ. मिश्रा द्वारा श्री सुनील बामनिया, जो कि जिला प्रभारी सी.एस.सी. केंद्र राजगढ़ हैं, को इस पूरे अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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श्री बामनिया अभियान की दैनिक रिपोर्टिंग और पोर्टल पर डेटा अपडेशन की निगरानी के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे।
राजगढ़ जिला प्रशासन का यह कदम किसानों के हितों को सुरक्षित करने और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक प्रयास है। निर्धारित समय-सीमा में इन कार्यों के पूर्ण होने से जिले का कृषक वर्ग सीधे तौर पर डिजिटल क्रांति से जुड़कर लाभान्वित हो सकेगा।
Image Source : https://rajgarh.mpinfo.org

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