जिला मुख्यालय पर स्थित कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मंगलवार को एक बार फिर आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए साप्ताहिक जनसुनवाई का भव्य आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में जिले के दूरदराज ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे नागरिकों ने अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक शिकायतें तथा समस्याएं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पूरी बेबाकी से रखीं। शासन की इस बेहद महत्वपूर्ण और कल्याणकारी पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता और प्रशासन के बीच की दूरियों को कम करना तथा उनकी हर संभव समस्याओं का समय पर संतोषजनक समाधान करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार भी पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ फरियादियों की बात सुनी और उनके मामलों पर त्वरित कार्रवाई के स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए।

कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने की एक-एक शिकायत की गहन समीक्षा

जनसुनवाई की कमान संभालते हुए बुरहानपुर के जिला कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने सभागार में उपस्थित प्रत्येक नागरिक की समस्या को बेहद धैर्य, गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। कलेक्टर ने न केवल आवेदनों को स्वीकार किया, बल्कि हर एक आवेदक से व्यक्तिगत रूप से बात करके उनकी परेशानी की गहराई को समझा।

इस दौरान कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने संबंधित विभागों के सभी प्रमुख और मैदानी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन पर केवल कागजी औपचारिकता न निभाई जाए, बल्कि उनका नियमानुसार त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निराकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में यह भी समझाया कि जनता की शिकायतों के प्रति किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राजस्व, स्वास्थ्य और नगर निगम समेत लगभग 108 आवेदनों पर हुई सुनवाई

मंगलवार को आयोजित इस व्यापक जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों का तांता लगा रहा। मुख्य रूप से राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, सहकारिता विभाग, कृषि विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHED) तथा अन्य कई प्रमुख विभागों से संबंधित लगभग 108 विभिन्न प्रकार के गंभीर आवेदनों पर विस्तार से सुनवाई की गई।

इन आवेदनों में भूमि विवाद, नामांतरण, अतिक्रमण हटाने, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ, वित्तीय लेन-देन, पेंशन और विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद प्रशासन ने भी अपनी कार्यप्रणाली का परिचय देते हुए तुरंत संबंधित विभागों को फाइलें सौंपकर त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।

मौके पर जाकर जांच करने और वस्तुस्थिति से अवगत कराने के निर्देश

जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल कार्यालय में बैठकर फाइलों का निपटारा न किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारी स्वयं मौके पर यानी घटनास्थल पर पहुंचें।

मौके पर पहुंचकर पूरी वस्तुस्थिति की निष्पक्ष जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आवेदक की समस्या का समाधान पूरी तरह संतुष्टिपूर्वक हुआ है या नहीं। इसके साथ ही, जांच और निराकरण के बाद की पूरी वस्तुस्थिति से संबंधित आवेदक को भी समय पर विधिवत रूप से अवगत कराया जाए, ताकि फरियादी को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है जनसुनवाई: कलेक्टर

कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने अधिकारियों की बैठक लेते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि 'जनसुनवाई' राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। शासन का स्पष्ट विजन है कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी त्वरित न्याय और प्रशासनिक सहायता मिलनी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों पर पूरी तरह सक्रिय (Active) होकर कार्य किया जाए, ताकि आम जनता का शासन और प्रशासन व्यवस्था पर अटूट विश्वास बना रहे। जनसुनवाई के दौरान किसी भी स्तर पर पेंडेंसी या अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े विकासखंड स्तर के अधिकारी

इस महत्वपूर्ण जनसुनवाई को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तकनीकी का भी भरपूर उपयोग किया गया। जिला मुख्यालय पर आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान मुख्य रूप से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) एवं अपर कलेक्टर श्री सृजन वर्मा सहित जिले के तमाम प्रमुख जिला स्तरीय अधिकारीगण व्यक्तिगत रूप से सभागार में मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इसके साथ ही, जिला मुख्यालय से बाहर दूरस्थ विकासखंड स्तर के तमाम मैदानी अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से इस जनसुनवाई से सीधे जुड़े रहे। जैसे-जैसे जिला स्तर पर किसी विशेष क्षेत्र या विकासखंड से जुड़ा आवेदन आया, संबंधित विकासखंड के अधिकारियों को वीसी के जरिए ही तुरंत मामलों की जानकारी दी गई और मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देशारोपण कर दिए गए, जिससे समय की बचत हुई और प्रशासनिक कसावट साफ तौर पर देखने को मिली।

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