मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में इन दिनों रबी विपणन वर्ष के अंतर्गत शासन के निर्देशानुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का कार्य युद्ध स्तर पर निरंतर जारी है। किसानों को उनकी उपज का सही और उचित दाम मिल सके तथा उन्हें किसी भी प्रकार की बिचौलिया व्यवस्था या प्रशासनिक अव्यवस्था का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद और कटिबद्ध नजर आ रहा है। इसी कड़ी में जिले के प्रशासनिक मुखिया लगातार विभिन्न उपार्जन केंद्रों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का जमीनी स्तर पर सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही, लापरवाही या किसानों को होने वाली असुविधा को प्रशासन द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है, और इसी के मद्देनजर विस्तृत और औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं।
1. राजेंद्र प्रसाद वेयरहाउस चिरापाटला में कलेक्टर का आगमन: बुधवार का दिन बैतूल जिले के चिचोली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में उस वक्त प्रशासनिक हलचल वाला रहा, जब जिले के कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने क्षेत्र का औचक भ्रमण किया। अपने इस सघन भ्रमण कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डॉ. सोनवणे विशेष रूप से चिरापाटला स्थित गेहूं उपार्जन केंद्र पहुंचे। यह उपार्जन केंद्र 'राजेंद्र प्रसाद वेयरहाउस चिरापाटला' में संचालित किया जा रहा है, जहां आसपास के कई गांवों के किसान अपनी मेहनत से उगाई गई गेहूं की फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए लेकर आ रहे हैं। उन्होंने वहां पहुंचते ही पूरे वेयरहाउस परिसर का बारीकी से मुआयना किया और खरीदी की संपूर्ण व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष जायजा लिया।
2. किसानों के साथ सीधा संवाद और उनकी स्थिति पर चर्चा: उपार्जन केंद्र पर पहुंचने के बाद कलेक्टर डॉ. सोनवणे का रुख पूरी तरह से किसान-केंद्रित रहा। उन्होंने कागजी खानापूर्ति से इतर जाते हुए सीधे उन अन्नदाताओं से संपर्क साधा, जो वहां अपनी उपज लेकर कतारों में खड़े थे या अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। कलेक्टर ने केंद्र पर उपस्थित कई किसानों से अत्यंत आत्मीयता के साथ विस्तृत चर्चा की। इस सीधे संवाद के दौरान उन्होंने किसानों से उपज विक्रय संबंधी विभिन्न पहलुओं पर जमीनी जानकारी प्राप्त की और यह समझने का प्रयास किया कि खरीदी की प्रक्रिया सुगमता से चल रही है या नहीं।
3. खरीदी प्रक्रिया का लाइव अवलोकन और वजन का भौतिक सत्यापन: किसानों से बातचीत करने के उपरांत, कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने मौके पर चल रही गेहूं खरीदी की लाइव प्रक्रिया का बेहद करीब से अवलोकन किया। उन्होंने देखा कि ट्रॉलियों से गेहूं उतारने, उसे तौलने और फिर बोरियों में भरने का कार्य किस गति और किस तरीके से किया जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने वहां काम कर रहे कर्मचारियों को निर्देश दिया कि जो गेहूं तौला जा चुका है, उन बोरों का उनके सामने पुनः वजन किया जाए। कलेक्टर की मौजूदगी में तौले जा चुके गेहूं के बोरों का रैंडम आधार पर कांटा कराकर भौतिक सत्यापन किया गया। इस क्रॉस-चेकिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसानों के साथ तौल में किसी प्रकार की हेराफेरी न हो।
4. पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के सख्त निर्देश: वजन के सत्यापन और पूरी प्रक्रिया को देखने के बाद, कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने वहां उपस्थित उपार्जन केंद्र के प्रभारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को सख्त लहजे में दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप खरीदी प्रक्रिया में पूर्ण रूप से पारदर्शिता और उच्च स्तर की गुणवत्ता हर हाल में बनाए रखी जानी चाहिए। उपज की तौल से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण तक, हर कदम पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
5. चिरापाटला उपार्जन केंद्र के आंकड़े: 3235 मैट्रिक टन गेहूं की खरीदी: निरीक्षण के इसी क्रम में, अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के माध्यम से कलेक्टर को केंद्र के अद्यतन (अपडेटेड) आंकड़ों से अवगत कराया गया। जानकारी दी गई कि राजेंद्र प्रसाद वेयरहाउस चिरापाटला उपार्जन केंद्र में इस सत्र के लिए कुल 116 कृषकों ने अपना विधिवत पंजीयन (Registration) कराया है। इन पंजीकृत किसानों की सूची में से अब तक 59 कृषकों से सफलतापूर्वक गेहूं की खरीदी का कार्य संपन्न किया जा चुका है। मात्रा के संदर्भ में अधिकारियों ने बताया कि इन 59 किसानों से अब तक कुल 3235 मैट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
6. गुणवत्ता नियंत्रण: 'चमनविहीन' गेहूं और रिजेक्ट किए गए सैंपलों का गहन परीक्षण: समर्थन मूल्य पर खरीदी में गुणवत्ता एक बहुत बड़ा कारक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (Junior Supply Officer) से 'चमनविहीन' (चमक विहीन या बिना चमक वाले) गेहूं की खरीदी के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कलेक्टर ने न केवल मौखिक जानकारी ली, बल्कि उन किसानों की उपज के सैंपलों (नमूनों) का भी स्वयं अपनी आंखों से परीक्षण किया, जिन्हें गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के कारण केंद्र द्वारा रिजेक्ट (अस्वीकृत) कर दिया गया था। उन्होंने यह देखा कि रिजेक्शन का कारण पूर्णतः पारदर्शी और नियमानुसार है या नहीं।
7. भीषण गर्मी में किसानों की सुविधा: छाया और बैठने की अतिरिक्त व्यवस्था: चूंकि वर्तमान में गर्मी का मौसम अपने चरम पर है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, ऐसे में किसानों को उपार्जन केंद्रों पर अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने इस मानवीय पहलू को बहुत गंभीरता से लिया। उन्होंने केंद्र पर किसानों के लिए वर्तमान में उपलब्ध बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए, उन्होंने मौके पर ही उपस्थित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि किसानों के लिए तुरंत अतिरिक्त छाया और बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गर्मी के मौसम में अपनी उपज बेचने आए किसी भी किसान को किसी प्रकार की असुविधा या शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का यह महाभियान बिना किसी रुकावट के, पूरी पारदर्शिता और किसानों की पूर्ण संतुष्टि के साथ अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।
Image Source : https://betul.mpinfo.org
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