रीवा, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना' के तहत रीवा जिले में एक विशाल और भव्य आयोजन संपन्न हुआ। जिले की त्यौंथर तहसील के अंतर्गत कृषि उपज मंडी प्रांगण, चाकघाट में आयोजित इस जिला स्तरीय सम्मेलन में कुल 186 नवयुगलों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नए जीवन की शुरुआत की। इस आयोजन ने न केवल निर्धन परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का एक सशक्त संदेश भी प्रसारित किया।

1. आयोजन का स्वरूप और धार्मिक रस्में

चाकघाट मंडी प्रांगण में आयोजित इस भव्य समारोह का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और मांगलिक रहा। आयोजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित रहीं:

  • वैदिक मंत्रोच्चार और निकाह: सम्मेलन में कुल 186 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ। इनमें से 184 जोड़े वैदिक मंत्रोच्चार और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ परिणय सूत्र में बंधे। वहीं, 2 मुस्लिम जोड़ों का निकाह पूरी धार्मिक रस्मों के साथ संपन्न कराया गया।

  • मंगल गीत और शहनाई: पूरे पंडाल में शहनाई की मधुर धुन और पारंपरिक मंगल गीतों की गूंज रही, जिससे वातावरण उत्सवमय हो गया।

  • सामाजिक समरसता: इस आयोजन में विभिन्न समाजों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। एक ही छत के नीचे अलग-अलग धर्मों और जातियों के विवाह संपन्न होना सामाजिक समरसता की एक बड़ी मिसाल बनकर उभरा।

2. मुख्य अतिथि का संबोधन और योजना का महत्व

इस गौरवशाली अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद जनार्दन मिश्रा उपस्थित रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और सभी नवविवाहित जोड़ों को सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया।

अपने संबोधन में सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा:

"मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना प्रदेश के जरूरतमंद और गरीब परिवारों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह योजना न केवल बेटियों की शादी के आर्थिक बोझ को कम करती है, बल्कि बेटियों के सम्मान को भी समाज में प्रतिष्ठित करती है। ऐसे सामूहिक आयोजन सामाजिक एकता को और अधिक मजबूती प्रदान करते हैं।"

3. सामाजिक समरसता के प्रेरणादायक उदाहरण

इस सम्मेलन की सबसे विशेष बात यह रही कि इसमें जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यक्तिगत रुचि लेकर सामाजिक समरसता का परिचय दिया:

  • जनपद सदस्य की पहल: रीवा जनपद पंचायत के सदस्य रामानुज आदिवासी ने एक प्रेरक उदाहरण पेश करते हुए अपनी स्वयं की पुत्री का विवाह भी इसी सामूहिक सम्मेलन में संपन्न कराया। यह इस बात का प्रमाण है कि यह योजना समाज के हर वर्ग के लिए सम्मानजनक है।

  • अधिकारियों द्वारा कन्यादान: प्रशासनिक संवेदनशीलता दिखाते हुए जनपद पंचायत के सीईओ प्रवीण बंसोड और सामाजिक सुरक्षा अधिकारी अरविंद तिवारी ने पिता तुल्य भूमिका निभाते हुए कन्यादान की रस्म पूरी की। अधिकारियों द्वारा किए गए इस कार्य की उपस्थित जनसमूह ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।

4. सुव्यवस्थित प्रबंधन और नशा मुक्ति का संकल्प

इतने बड़े स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे:

  • पंजीयन काउंटर: नवदंपत्तियों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे। पंजीयन से लेकर उपहार वितरण और भोजन व्यवस्था तक को सुचारू रखने के लिए कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।

  • नशा मुक्ति की शपथ: विवाह के पवित्र बंधन में बंधने के साथ ही सभी 186 नवयुगल जोड़ों को एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से 'नशा मुक्ति' की शपथ दिलाई गई। उन्हें संकल्प दिलाया गया कि वे स्वयं नशामुक्त रहेंगे और समाज को भी इस बुराई से दूर रखने का प्रयास करेंगे।

5. उपस्थित विशिष्ट अतिथि एवं जनप्रतिनिधि

इस जिला स्तरीय आयोजन में क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक और अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और नववधुओं को विदा किया:

  • गीता माझी: जिला पंचायत सदस्य

  • मीनू आदिवासी: जनपद पंचायत अध्यक्ष

  • सुशील चंद्र शुक्ला: सांसद प्रतिनिधि

  • ब्राम्हानारायण सिंह: वरिष्ठ प्रतिनिधि

  • मार्तंड सिंह एवं अंकित शुक्ला: स्थानीय जनप्रतिनिधि

इसके अतिरिक्त जनपद पंचायत जवा, रीवा, सिरमौर और रायपुर कर्चुलियान के सामाजिक सुरक्षा अधिकारी भी अपनी टीम के साथ व्यवस्थाओं को संभालने के लिए कार्यक्रम में मौजूद रहे।

6. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का प्रभाव

रीवा जिले के त्यौंथर में हुआ यह सफल आयोजन यह दर्शाता है कि शासन की योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित हो रही हैं। सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से फिजूलखर्ची पर रोक लग रही है और गरीब परिवारों की बेटियों का विवाह गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो रहा है।

चाकघाट मंडी प्रांगण का यह दृश्य ऐतिहासिक था, जहां सैकड़ों परिवारों की खुशियां एक साथ परवान चढ़ीं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से यह कार्यक्रम न केवल विवाह का उत्सव बना, बल्कि आपसी भाईचारे का एक महान संगम भी साबित हुआ।


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