बालाघाट जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान का संचालन किया जा रहा है। 'आत्मा' (Agricultural Technology Management Agency - ATMA) परियोजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से परिचित कराया जा रहा है और उन्हें इस प्रणाली को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
जागरूकता अभियान: गाँवों में सक्रिय हुआ प्रशासन
प्राकृतिक खेती की अवधारणा को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने बालाघाट जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन संपर्क अभियान चलाया है। हाल ही में वारासिवनी विकासखंड के ग्राम जबरटोला एवं सोनझरा तथा खैरलांजी विकासखंड के ग्राम पांढरवानी में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों के माध्यम से किसानों को यह बताया गया कि कैसे वे बिना किसी भारी निवेश के अपनी भूमि की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
प्राकृतिक खेती: क्यों है आज की आवश्यकता?
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बहुआयामी लाभों पर विस्तृत जानकारी दी:
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उत्पादन लागत में कमी: रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर निर्भरता खत्म होने से किसानों के खर्च में भारी कटौती होती है।
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मिट्टी की उर्वरता: रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की जैविक संरचना बिगड़ जाती है, जबकि प्राकृतिक तरीके मिट्टी के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखते हैं।
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पर्यावरण संरक्षण: कीटनाशकों के प्रयोग में कमी आने से जल और मृदा प्रदूषण में कमी आती है, जिससे जैव विविधता का संरक्षण होता है।
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गुणवत्तापूर्ण उपज: प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलें न केवल पौष्टिक होती हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित भी होती हैं, जिनकी बाजार में बेहतर मांग रहती है।
पंजीयन अभियान: भविष्य की सुरक्षित नींव
वारासिवनी विकासखंड के ग्राम जबरटोला और सोनझरा में प्रशासन ने किसानों का प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन कार्य भी संपन्न किया। यह पंजीयन किसानों को भविष्य में मिलने वाली शासकीय योजनाओं और मार्गदर्शन के लिए एक आधार प्रदान करता है। वहीं, खैरलांजी के ग्राम पांढरवानी में किसानों को जागरूक करते हुए उन्हें इस पहल से जुड़ने की अपील की गई, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण किसान इस नई तकनीक को अपना सकें।
कृषि विभाग की अपील
उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, श्री फूलसिंह मालवीय ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा बालाघाट जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार जागरूकता एवं पंजीयन अभियान संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया है कि वे रासायनिक खेती की जटिलताओं से बाहर निकलकर प्राकृतिक खेती अपनाएं। उनका मानना है कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाना ही भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय है।
प्रशासन का यह प्रयास केवल एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 'टिकाऊ कृषि प्रणाली' की ओर संक्रमण (Transition) है। बालाघाट जिले में हो रहे ये प्रयास आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकते हैं, जहाँ किसान अपनी पारम्परिक पद्धतियों और आधुनिक विज्ञान के तालमेल से खेती को फिर से एक लाभप्रद व्यवसाय बना रहे हैं।
Image Source: https://balaghat.mpinfo.org
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