बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पशुपालन को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाने और दुग्ध उत्पादन की क्षमता में गुणात्मक वृद्धि करने के उद्देश्य से एक विशेष पहल की जा रही है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार, जिले में आगामी 13 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक "दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान" का तृतीय चरण संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य पशुपालकों तक वैज्ञानिक पद्धतियों को पहुँचाना और उन्हें आधुनिक प्रबंधन तकनीकों से जोड़ना है।

कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने इस अभियान के सुचारू और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिले में विकासखंडवार और ग्रामवार भ्रमण दलों का गठन किया गया है, जो घर-घर जाकर पशुपालकों से संवाद स्थापित करेंगे।

अभियान की प्रमुख कार्ययोजना और लक्ष्य

तृतीय चरण के इस अभियान के दौरान विभागीय दलों द्वारा व्यापक स्तर पर मैदानी कार्य किए जाएंगे। अभियान की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लक्षित समूह का चिन्हांकन: पशुपालन विभाग के दल विशेष रूप से ऐसे पशुपालकों की पहचान करेंगे जिनके पास तीन से चार या उससे अधिक मादा गाय अथवा भैंस उपलब्ध हैं।

  • सीधा संवाद: एवीएफओ (सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी), मैत्री कार्यकर्ता और गौसेवक सीधे पशुपालकों के घर जाकर उनसे चर्चा करेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे।

  • वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी: भ्रमण के दौरान पशुपालकों को नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स्ड-सॉर्टेड सीमेन तकनीक, पशु पोषण का संतुलन और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे।

  • डिजिटल सत्यापन: अभियान के दौरान एक विशेष ऑनलाइन ऐप का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से पशुओं का भौतिक सत्यापन होगा और जो पशु अब तक टैग नहीं किए गए हैं, उन्हें टैग क्रमांक प्रदान कर उनका डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा।

  • पंजीयन विस्तार: जो पशुपालक पूर्व के चरणों में किसी कारणवश छूट गए थे, उन्हें इस चरण में प्राथमिकता के साथ शामिल कर उनका पंजीयन और सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रशासनिक तैयारी और प्रशिक्षण

अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। विभाग द्वारा पूर्व में ही व्यापक तैयारी की गई है:

  1. एक दिवसीय प्रशिक्षण: 9 जुलाई को जिले के सभी विकासखंडों में मैदानी अमले के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, ताकि वे तकनीक और कार्यप्रणाली से पूरी तरह परिचित हो सकें।

  2. जनप्रतिनिधियों का सहयोग: विभागीय अधिकारियों द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे अपने क्षेत्रों में अभियान को सफल बनाने में ग्रामीणों को प्रेरित कर सकें।

  3. रूट चार्ट का पालन: कलेक्टर श्री मृणाल मीना एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ के मार्गदर्शन में, उपसंचालक पशुपालन डॉ. अरुण नेमा ने सभी मैदानी कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित रूट चार्ट का कड़ाई से पालन करें।

पशुपालकों से अपील

जिला प्रशासन ने बालाघाट जिले के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र में आने वाले विभागीय दलों का पूरा सहयोग करें। उनसे सटीक और सही जानकारी साझा करें ताकि डेटा प्रबंधन में सुधार हो सके। प्रशासन का मानना है कि वैज्ञानिक पशुपालन को अपनाकर न केवल दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पशुपालक परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

यह अभियान बालाघाट जिले में पशुधन को न केवल सुरक्षित करने, बल्कि उसे एक आर्थिक क्रांति का माध्यम बनाने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।

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