बुरहानपुर: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में राज्य के किसानों को रसायनों से मुक्त खेती अपनाने, जैविक उत्पादों का उत्पादन करने और उनके प्रभावी विपणन (मार्केटिंग) के लिए प्रेरित करने का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस कड़ी में बुरहानपुर जिले में भी नवाचारी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, जिला प्रशासन की पहल पर प्रति गुरुवार राजस्थान भवन के समीप जैविक हाट बाजार का आयोजन किया जाता है, जो किसानों और उपभोक्ताओं के बीच एक सेतु का कार्य कर रहा है।

हाल ही में, बुरहानपुर के कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने जैविक हाट बाजार स्थल का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाजार की वर्तमान व्यवस्थाओं को परखा और संबंधित अधिकारियों से विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।

जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग हेतु निर्देश

बुरहानपुर जिले में आयोजित होने वाले इस जैविक हाट बाजार का उद्देश्य केवल उत्पादों को बेचना नहीं है, बल्कि किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना और आम नागरिकों को रसायनों से मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक तथा गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराना है। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि जैविक उत्पादों की सही पहचान और बेहतर बाजार उपलब्धता ही किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव ला सकती है।

इस दौरान कलेक्टर द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश निम्नलिखित हैं:

  • व्यापक प्रचार-प्रसार: कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जैविक हाट बाजार की जानकारी जिले के अंतिम छोर तक पहुँचे। इसके लिए सोशल मीडिया, स्थानीय समाचार माध्यमों और अन्य प्रचार साधनों का उपयोग किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान अपने उत्पाद यहाँ ला सकें और उपभोक्ता इनका लाभ उठा सकें।

  • ब्रांडिंग पर जोर: श्री सिंह ने कहा कि जैविक उत्पादों की केवल बिक्री ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी उचित ब्रांडिंग और पैकेजिंग की जानी चाहिए ताकि बाजार में उनकी अलग पहचान स्थापित हो सके।

  • आय में वृद्धि: उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि जैविक उत्पादों की मार्केटिंग सही दिशा में की जाए, तो यह निश्चित रूप से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।

  • कार्य योजना और विस्तार: बाजार को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसमें बाजार के विस्तार करने और अधिक से अधिक किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने के बिंदुओं को शामिल करने को कहा गया है।

प्राकृतिक खेती का महत्व: पर्यावरण और स्वास्थ्य

कलेक्टर श्री सिंह ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि प्राकृतिक खेती न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह दीर्घकालिक रूप से पर्यावरण संरक्षण में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रसायनों के उपयोग से मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाए रखती है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। बुरहानपुर का यह जैविक हाट बाजार इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जहाँ केला, फल, सब्जियां, दालें, मसाले और गौ-आधारित उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है।

निरीक्षण के दौरान सीईओ जिला पंचायत एवं अपर कलेक्टर श्री सृजन वर्मा सहित कृषि विभाग, सहकारिता विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे बाजार के सुचारू संचालन के लिए आपसी समन्वय स्थापित करें।

बुरहानपुर के पुस्तकालय का निरीक्षण

जैविक हाट बाजार के निरीक्षण के उपरांत, कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने लालबाग रोड स्थित मरीचिका उद्यान के समीप संचालित पुस्तकालय का भी अवलोकन किया। पुस्तकालय का यह निरीक्षण ज्ञान के विस्तार और युवाओं के बौद्धिक विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुस्तकालय के संबंध में मुख्य बिंदु:

  • सुविधाओं का आकलन: कलेक्टर ने पुस्तकालय में उपलब्ध वर्तमान सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने वहां बैठने की व्यवस्था, पुस्तकों की उपलब्धता और वातावरण का निरीक्षण किया।

  • उपयोगिता बढ़ाने के निर्देश: उन्होंने स्पष्ट किया कि पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और पाठकों को एक शांत एवं समृद्ध वातावरण प्रदान करना है। इसलिए, यहाँ सुविधाओं का विस्तार किया जाना आवश्यक है।

  • ज्ञान और अध्ययन का केंद्र: श्री सिंह ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान और अध्ययन को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसे और अधिक उपयोगी बनाकर समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इसे और बेहतर बनाया जाना चाहिए।

इस प्रकार, कलेक्टर श्री हर्ष सिंह के ये दौरे बुरहानपुर में न केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे, बल्कि शिक्षा और बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकालय जैसी संस्थाओं को सशक्त बनाने का भी एक प्रयास हैं।

Image Source: https://burhanpur.mpinfo.org