बालाघाट जिले में विधिक साक्षरता का नया अध्याय

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में युवाओं को कानूनी रूप से साक्षर और सशक्त बनाने की दिशा में एक अत्यंत ही महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम उठाया गया है। आज के आधुनिक और तेजी से बदलते परिवेश में युवाओं को केवल किताबी ज्ञान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें देश के कानूनों, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए बालाघाट जिले में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को एक विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसने जिले के युवाओं में कानून के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य किया है।

'सशक्त युवा, सशक्त भारत' अभियान का उत्कृष्ट क्रियान्वयन

बालाघाट जिले में आयोजित इस विधिक जागरूकता शिविर को राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे 'सशक्त युवा, सशक्त भारत' अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। इस अभियान का मूल मंत्र यह है कि जब देश का युवा कानूनी और सामाजिक रूप से सशक्त होगा, तभी भारत एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बन सकेगा। इस अभियान के तहत जिले के युवाओं तक सीधे पहुँच बनाने और उन्हें न्याय प्रणाली से जोड़ने का यह एक बेहद प्रभावी और सीधा माध्यम साबित हो रहा है। प्रशासन का यह कदम युवाओं को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों का कुशल मार्गदर्शन

इस संपूर्ण विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम की रूपरेखा और सफलता का श्रेय बालाघाट जिले के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन को जाता है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री प्राणेश कुमार प्राण के सीधे और स्पष्ट मार्गदर्शन में इस अत्यंत महत्वपूर्ण शिविर का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सका। उनके विजन के अनुरूप ही जिले के शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को गति प्रदान की जा रही है ताकि विधिक साक्षरता जन-जन तक पहुँच सके।

बालाघाट के दो प्रमुख महाविद्यालयों का चयन

युवाओं तक व्यापक रूप से पहुँच बनाने के लिए बालाघाट जिले के दो प्रमुख और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों का चयन इस विशेष शिविर के लिए किया गया। इनमें से पहला संस्थान जटाशंकर पैरामेडिकल कॉलेज, बालाघाट है और दूसरा संस्थान लोकमान्य कॉलेज ऑफ एजुकेशन डोंगरिया (गर्रा) है। इन दोनों महाविद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन कर छात्र-छात्राओं को कानून की बारीकियों से अवगत कराया गया। महाविद्यालय परिसरों में आयोजित होने के कारण इसमें युवाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी और एकाग्रता सुनिश्चित की जा सकी।

न्यायाधीश श्री सतीश शर्मा द्वारा युवाओं से सीधा संवाद

इन दोनों महाविद्यालयों में आयोजित विधिक साक्षरता शिविरों में न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री सतीश शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। श्री शर्मा ने उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं, युवाओं और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कानूनी जागरूकता के वास्तविक महत्व से सभी को विस्तारपूर्वक अवगत कराया। उन्होंने अत्यंत ही सरल और सहज भाषा में कानूनी प्रावधानों को समझाया, जिससे विद्यार्थी कानून को बोझिल न समझकर उसे अपने दैनिक जीवन का एक उपयोगी और आवश्यक हिस्सा मान सकें।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की 'जागृति योजना 2025'

न्यायाधीश श्री सतीश शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि यह अभियान कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नई दिल्ली) के वृहद दिशा-निर्देशों के तहत संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह विधिक जागरूकता शिविर 'जागृति योजना 2025' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस योजना के माध्यम से वर्ष 2025 और उसके आगे तक भारत के युवाओं को विधिक रूप से साक्षर करने का एक बड़ा और राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें बालाघाट जिला अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रहा है।

अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता का संचार

इस अभियान और शिविर का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य महाविद्यालयीन विद्यार्थियों एवं युवाओं को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के प्रति भी पूरी तरह से जागरूक करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में युवा अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाते या अनजाने में किसी कानूनी समस्या में फँस जाते हैं। ऐसे में यह शिविर उन्हें सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रहा है और उन्हें यह बता रहा है कि एक नागरिक के रूप में उनके क्या कर्तव्य हैं।

समय रहते कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य

अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ, इस विधिक शिविर का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य युवाओं और आमजनों को कानूनी समस्याओं के प्रति समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराना भी है। श्री सतीश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी युवा या नागरिक को कानूनी सहायता की आवश्यकता होती है, तो विधिक सेवा प्राधिकरण उनके लिए सदैव तत्पर है, ताकि न्याय पाने में किसी प्रकार का विलंब या परेशानी न हो और हर व्यक्ति को सुलभ न्याय मिल सके।

साइबर अपराध से बचाव और सुरक्षा के उपाय

वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिसका शिकार सबसे अधिक युवा वर्ग ही होता है। शिविर के दौरान श्री शर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को इंटरनेट का उपयोग करते समय सतर्क रहने, अपनी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखने और किसी भी प्रकार के ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने के लिए कानूनी दृष्टिकोण से सुरक्षित व्यवहार अपनाने के प्रति सचेत किया।

निःशुल्क विधिक सहायता और पीड़ितों के लिए प्रतिकर योजना

समाज के हर वर्ग तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए शिविर में 'निःशुल्क विधिक सहायता' के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री शर्मा ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को निःशुल्क कानूनी मदद पाने का पूर्ण अधिकार है। इसके अतिरिक्त, अपराध से प्रभावित पीड़ितों के अधिकारों और उनके पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न 'प्रतिकर योजनाओं' (मुआवजा योजनाओं) के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर इसका लाभ ले सकें।

कार्यस्थल संबंधी अधिकार तथा महिला एवं बाल सुरक्षा

युवा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करेंगे, इसलिए उन्हें कार्यस्थल से संबंधित अधिकारों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। शिविर में कार्यस्थल पर शोषण से बचाव और कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग यानी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कड़े कानूनों के प्रति भी व्यापक रूप से जन-जागरूकता फैलाई गई, ताकि समाज में एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण का निर्माण किया जा सके।

शिक्षा का महत्व और व्यक्तित्व निर्माण में कानून की भूमिका

कानूनी और विधिक विषयों के अलावा, न्यायाधीश श्री सतीश शर्मा ने विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व के बारे में भी समझाया। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि कैसे एक उचित शिक्षा और कानूनी ज्ञान का समन्वय युवाओं के समग्र व्यक्तित्व निर्माण में एक निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक जागरूक और शिक्षित युवा ही एक स्वस्थ, मजबूत और प्रगतिशील समाज की मजबूत नींव रख सकता है।

जटाशंकर पैरामेडिकल कॉलेज में सक्रिय सहभागिता

जटाशंकर पैरामेडिकल कॉलेज, बालाघाट में आयोजित इस विधिक शिविर में महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से उत्कृष्ट व्यवस्थाएं की गई थीं। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य श्री आशीष पारधी, डॉ. शीतल पारधी सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी उपस्थित लोगों ने कानूनी जानकारियों को ध्यानपूर्वक सुना और इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

लोकमान्य कॉलेज ऑफ एजुकेशन डोंगरिया में दिखा भारी उत्साह

इसी विधिक साक्षरता श्रृंखला में, लोकमान्य कॉलेज ऑफ एजुकेशन डोंगरिया (गर्रा) में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर को भी अभूतपूर्व सफलता मिली। इस महाविद्यालय में भी संस्था के शिक्षक-शिक्षिकाओं और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं ने इस जागरूकता कार्यक्रम में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की। दोनों ही महाविद्यालयों में विद्यार्थियों ने कानूनी विषयों पर गहरी रुचि दिखाई और विशेषज्ञों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया।

जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बनने की प्रेरणा

बालाघाट जिले के इन दोनों प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित विधिक जागरूकता शिविरों के माध्यम से जिले के युवाओं को कानून की सटीक और व्यावहारिक जानकारी देकर उन्हें जागरूक, जिम्मेदार एवं सशक्त नागरिक बनने के लिए दृढ़ता से प्रेरित किया गया। यह शिविर 'सशक्त युवा, सशक्त भारत' के राष्ट्रीय सपने को साकार करने की दिशा में बालाघाट विधिक सेवा प्राधिकरण का एक अत्यंत सफल, सार्थक और मील का पत्थर साबित होने वाला प्रयास रहा है।

image source : https://balaghat.mpinfo.org