मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में नागरिक सुरक्षा, होमगार्ड्स तथा आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों के परिपालन में एक अत्यंत ही सराहनीय और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विदिशा जिले को किसी भी प्रकार की आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को एक विशेष सात दिवसीय सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत और भव्य शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम विदिशा जिले की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
प्रशिक्षण की समयावधि और तिथियों का विवरण
नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के इस वृहद लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, इस सात दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 20 अगस्त से 26 अगस्त तक किया जा रहा है। इन सात दिनों की अवधि में स्वयंसेवकों को निरंतर और निर्बाध रूप से आपदा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण का प्रत्येक दिन एक निर्धारित और सुविचारित पाठ्यक्रम के अनुसार संचालित किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण का शत-प्रतिशत लाभ स्वयंसेवकों को मिल सके और वे विदिशा जिले की रक्षा के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हो सकें।
मुख्य अतिथि द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ
गुरुवार, 20 अगस्त को इस अत्यंत महत्वपूर्ण सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम जी के द्वारा इस नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया और उन्होंने उपस्थित सभी स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जिले की सुरक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक किया।
150 सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स की सक्रिय सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस की शुरुआत अत्यंत ही उत्साहजनक रही। पहले दिन विदिशा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 150 सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स ने इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपनी सक्रिय और पूर्ण सहभागिता दर्ज कराई। इन 150 स्वयंसेवकों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि विदिशा के नागरिक जिले की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में अपना योगदान देने के लिए कितने तत्पर हैं। शुभारंभ समारोह के पश्चात इन सभी 150 स्वयंसेवकों को पूर्व निर्धारित और विशेषज्ञ रूप से तैयार किए गए पाठ्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित पाठ्यक्रम
इस सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान स्वयंसेवकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस), आपदा प्रबंधन तथा राहत एवं बचाव कार्यों से संबंधित अत्यंत ही महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषयों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। पाठ्यक्रम को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि यह वर्तमान समय की हर संभव आपातकालीन चुनौतियों को कवर कर सके। स्वयंसेवकों को यह सिखाया जा रहा है कि किसी भी प्रकार की अनहोनी के समय प्रशासन के साथ मिलकर कैसे कार्य करना है।
युद्ध और आपातकालीन परिस्थितियों में स्वयंसेवकों की भूमिका
आज के अनिश्चितता भरे दौर में, युद्ध अथवा अन्य किसी भी प्रकार की राष्ट्रीय या स्थानीय आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। इस सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान सभी 150 सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स को विस्तार से यह जानकारी दी जाएगी कि युद्ध काल अथवा किसी भी बड़े आपातकाल के समय एक सिविल डिफेंस वॉलेंटियर के रूप में उनके क्या कर्तव्य होंगे। उन्हें आपात स्थिति में नागरिकों की जान-माल की रक्षा करने और प्रशासन के सहयोगी के रूप में खड़े रहने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
आपदा के समय जिम्मेदारियों का निर्वहन और जन-जागरूकता
प्रशिक्षण का एक बहुत बड़ा हिस्सा आपदा के समय सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स की सटीक जिम्मेदारियों को समझने पर केंद्रित है। प्राकृतिक या मानवजनित आपदा के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही, बचाव एवं राहत कार्यों को किस प्रकार से तकनीकी और सुरक्षित ढंग से अंजाम दिया जाए, इसकी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण में 'जन-जागरूकता' जैसे महत्वपूर्ण विषय को भी शामिल किया गया है, ताकि ये स्वयंसेवक समाज में जाकर आम जनता को भी आपदाओं से बचाव के उपाय बता सकें और उन्हें जागरूक कर सकें।
सैद्धांतिक और व्यावहारिक (इनडोर एवं आउटडोर) प्रशिक्षण का अनूठा स्वरूप
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वरूप है, जो केवल किताबी या सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे पूर्ण रूप से व्यावहारिक बनाया गया है। वॉलेंटियर्स को इनडोर क्लासरूम प्रशिक्षण के साथ-साथ आउटडोर फील्ड प्रशिक्षण दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। आउटडोर प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें मैदान पर वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने और उपकरणों के उपयोग का सीधा अनुभव प्रदान किया जाएगा।
मौके पर प्रभावी कार्यप्रणाली और समन्वय की स्थापना
इनडोर और आउटडोर दोनों प्रकार के प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य यह है कि विभिन्न आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में ये वॉलेंटियर्स मौके (घटनास्थल) पर प्रभावी ढंग से अपना कार्य कर सकें। अक्सर आपदा के समय अफरा-तफरी का माहौल होता है, ऐसे में स्वयंसेवकों को शांत रहकर त्वरित निर्णय लेने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्हें विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों, पुलिस और अन्य राहत एवं बचाव दलों के साथ बेहतर समन्वय (कोऑर्डिनेशन) स्थापित करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
त्वरित निर्णय लेने और आवश्यक सावधानियां बरतने की क्षमता का विकास
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स को युद्ध, प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा जैसी विकट स्थितियों में प्रशासन तथा राहत-बचाव दलों के एक मजबूत सहयोगी के रूप में सक्षम बनाना है। इस सम्पूर्ण प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयंसेवकों में यह क्षमता विकसित की जाएगी कि वे आपदा के उस नाजुक समय में त्वरित और सही निर्णय ले सकें। किसी भी राहत कार्य को करते समय क्या-क्या आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए, जिससे स्वयं की और पीड़ित की जान सुरक्षित रहे, यह इस प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र बिंदु है।
प्रशासन को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता
विदिशा जिले में इस प्रकार के वृहद प्रशिक्षण से प्रशासन को एक बहुत बड़ा लाभ प्राप्त होने वाला है। जब ये 150 वॉलेंटियर्स प्रशिक्षित हो जाएंगे, तो जिले में किसी भी आपदा अथवा आपातकालीन स्थिति के दौरान प्रशासन को बाहर से मदद का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन को स्थानीय स्तर पर ही एक प्रशिक्षित, अनुशासित और समर्पित मानव संसाधन (ह्यूमन रिसोर्स) का सहयोग तुरंत मिल सकेगा। यह स्थानीय टीम आपदा के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण समय (गोल्डन ऑवर) में जीवन रक्षक साबित होगी।
नागरिकों की सुरक्षा में एक प्रभावी और सशक्त भूमिका की तैयारी
स्वयंसेवकों को इस विशेष सात दिवसीय कार्यक्रम में इस प्रकार तैयार और ढाला जा रहा है कि वे आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन एवं संबंधित राहत-बचाव एजेंसियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें। उनका मुख्य ध्येय नागरिकों की सुरक्षा होगा। वे न केवल बचाव कार्य करेंगे बल्कि राहत सामग्री के वितरण, घायलों को प्राथमिक उपचार देने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में भी एक प्रभावी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों की मार्गदर्शक उपस्थिति
इस सात दिवसीय महत्वपूर्ण प्रशिक्षण के शुभारंभ अवसर पर नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड विदिशा श्री मयंक कुमार जैन, कंपनी कमांडर श्री देवी सिंह परते, प्लाटून कमांडर सुश्री रश्मि दुबे, और एएसआई श्री लक्ष्मी नारायण विश्वकर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इन वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा एसडीईआरएफ (SDERF) एवं होमगार्ड के कई अन्य अनुभवी जवान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे, जो अपने अनुभव इन स्वयंसेवकों के साथ साझा करेंगे।
भविष्य की रूपरेखा और सक्षम विदिशा का निर्माण
यह प्रशिक्षण 20 से 26 अगस्त तक निरंतर विभिन्न सत्रों में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार चलेगा। इन सात दिनों में स्वयंसेवकों को नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े हर छोटे-बड़े विषय का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशासन को पूर्ण विश्वास है कि यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण होने के बाद, विदिशा जिले के ये सभी स्वयंसेवक किसी भी प्राकृतिक या मानवजनित आपदा, आपातकालीन परिस्थितियों और यहां तक कि युद्ध जैसी स्थिति के दौरान प्रशासन और राहत-बचाव दलों को जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट सहयोग प्रदान करने में पूर्णतः सक्षम होंगे और विदिशा को सुरक्षित बनाएंगे।
image source : https://vidisha.mpinfo.org
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