बालाघाट जिले में इस वर्ष संभावित कम वर्षा की स्थिति को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के हित में एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम उठाया है। विभाग द्वारा किसानों को पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर कम पानी में आसानी से तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी विशेष अभियान के तहत कृषि विभाग द्वारा किसानों को पौष्टिक मोटे अनाजों और मूल्यवान दलहनी फसलों के बीज वितरित किए जा रहे हैं, ताकि जल संकट के बीच भी किसानों की आय सुरक्षित रह सके।
कोदो और देशी काली पोपट का वितरण
कृषि विभाग की इस अनूठी पहल के अंतर्गत किसानों को लगातार उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे वैकल्पिक फसलों की बुवाई समय पर कर सकें।
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कोदो बीज का वितरण: उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गत 18 जुलाई को बिरसा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम सालेवारा के प्रगतिशील किसान छन्नूलाल बिलसरे को विभाग की ओर से कोदो बीज का वितरण किया गया।
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देशी काली पोपट के बीज: इसी कड़ी में 19 जुलाई को किसानों को उनके खेतों की मेड़ों पर बोवाई के लिए विशेष रूप से 'देशी काली पोपट' के बीज वितरित किए गए।
वैकल्पिक फसलों के प्रमुख लाभ और विशेषताएं
कृषि विभाग द्वारा जिन फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वे पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं:
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मोटे अनाज (कोदो और कुटकी): श्री मालवीय ने बताया कि कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज की फसलें बेहद कम पानी की आवश्यकता के बावजूद बेहतरीन पैदावार देती हैं। वर्तमान समय में ये फसलें किसानों के लिए एक अत्यधिक लाभकारी और सुरक्षित विकल्प साबित हो रही हैं।
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देशी काली पोपट (उत्कृष्ट दलहनी फसल): इसी क्रम में वितरित की जाने वाली देशी प्रजाति की काली पोपट एक अत्यंत उत्कृष्ट दलहनी फसल है। यह फसल बहुत कम लागत और न्यूनतम देखरेख में भी बंपर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
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पोषण और स्वाद से भरपूर: यह फसल न केवल खाने में बेहद स्वादिष्ट होती है, बल्कि विभिन्न प्रकार के पौष्टिक गुणों से भी पूरी तरह भरपूर है। मानव स्वास्थ्य के लिए इसके सेवन को बेहद लाभदायक माना गया है।
बालाघाट जिले में काली पोपट की विशेष मांग
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बालाघाट जिले के स्थानीय बाजारों और क्षेत्रों में देशी काली पोपट की मांग हमेशा से काफी विशेष रही है। इस दलहनी फसल के दानों का उपयोग ग्रामीण एवं शहरी अंचलों में बहुत चाव के साथ स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए किया जाता है। कृषि विभाग इसी लोकप्रियता को आधार बनाकर किसानों को इस फसल की वैज्ञानिक खेती बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है, ताकि कम पानी की उपलब्धता वाली स्थिति में भी जिले के किसानों को बेहतर से बेहतर उत्पादन और आर्थिक मुनाफा प्राप्त हो सके।
किसानों के लिए एक टिकाऊ और लाभकारी भविष्य
बालाघाट जिला प्रशासन और कृषि विभाग की यह पहल कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने का एक ठोस उपाय है। धान के एक बेहतर और टिकाऊ विकल्प के रूप में कोदो और देशी काली पोपट जैसी फसलों को बढ़ावा मिलने से किसानों को सूखा या कम वर्षा की स्थिति में भी नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा। विभाग के इस निरंतर मार्गदर्शन और बीज वितरण अभियान से जिले के किसानों का रुझान अब आधुनिक और जल-संरक्षक पारंपरिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
image source : https://balaghat.mpinfo.org
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