बैतूल जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और ग्रामीण एवं दूरस्थ आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों को भविष्य की उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पूरी तरह सक्षम बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक एवं महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। शिक्षा संजीवनी अभियान के अंतर्गत बुधवार, 2 सितंबर 2026 को भीमपुर के सांदीपनी विद्यालय परिसर में इस विशेष बैठक का सफल आयोजन संपन्न हुआ। बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे द्वारा की गई, जिसमें जिले के संपूर्ण शैक्षणिक परिदृश्य को बेहतर बनाने और प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने के लिए कई दूरदर्शी और कड़े निर्देश संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं शिक्षकों को दिए गए।
प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बैठक के दौरान अपनी बात रखते हुए स्पष्ट और दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि जिले के सभी सरकारी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को हर हाल में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इन शुरुआती कक्षाओं में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी की कक्षा के अनुरूप शैक्षणिक दक्षता और पठन-पाठन का स्तर पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए। जब बच्चों की प्रारंभिक और बुनियादी शैक्षणिक नींव पूरी तरह मजबूत होगी, तभी वे भविष्य में आने वाली विभिन्न कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना करने और उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकेंगे। कलेक्टर ने शिक्षकों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे बच्चों में केवल पाठ्यक्रम पूरा करने के बजाय अवधारणाओं को गहराई से समझने की प्रवृत्ति को विकसित करें ताकि उनकी बौद्धिक क्षमता का पूर्ण विकास हो सके।
बुनियादी सुविधाओं का समयबद्ध विकास और प्रशासनिक समन्वय
बैठक का एक अन्य प्रमुख और महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु विद्यालयों में भौतिक एवं बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और उनका सुचारू संचालन रहा। कलेक्टर ने भीमपुर एवं भैंसदेही क्षेत्र के सभी संबंधित शिक्षकों, प्राचार्यों, ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (बीईओ), बीआरसी और जनशिक्षकों को कड़े निर्देश दिए कि विद्यालयों में सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर तय समयसीमा के भीतर पूर्ण कराई जाएं। इन बुनियादी आवश्यकताओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल किए गए हैं:
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विद्यालयों में निर्बाध और सुचारू विद्युत आपूर्ति के लिए बिजली और लाइट की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करना।
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कक्षाओं में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए पर्याप्त हवा और रोशनी हेतु पंखों की सुचारू उपलब्धता।
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विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए विद्यालयों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति।
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छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग सुव्यवस्थित, स्वच्छ और क्रियाशील शौचालयों का निर्माण एवं उनका नियमित रखरखाव।
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शिक्षण कार्य को सुगम और प्रभावी बनाने वाले अन्य सभी आवश्यक भौतिक संसाधन एवं उपकरण।
इसके साथ ही, कलेक्टर ने विद्यालयों में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवादहीनता को पूरी तरह दूर करने तथा पालकों को विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़े रखने के लिए प्रत्येक माह नियमित रूप से पैरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) आयोजित करने का निर्देश दिया गया, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर निरंतर और करीबी नजर रखी जा सके।
ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और डेढ़ माह की समयसीमा
शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी और स्थानीय निकायों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने ग्राम पंचायत के सरपंचों और सचिवों को भी सीधे तौर पर निर्देशित किया। उन्होंने आदेशित किया कि विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं के विकास से संबंधित सभी रुके हुए और आवश्यक कार्य आगामी डेढ़ महीने के भीतर हर हाल में पूरे किए जाने चाहिए। यह कार्य शिक्षक समुदाय और स्थानीय प्रशासन के आपसी समन्वय के साथ पूरी जिम्मेदारी से तय समयसीमा में पूरा किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों की शिक्षा में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट उत्पन्न न हो।
डिजिटल संसाधनों: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट टीवी का प्रभावी उपयोग
आधुनिक तकनीकी युग में शिक्षा प्रणाली को डिजिटल रूप से सशक्त और उन्नत बनाने के लिए कलेक्टर ने उपलब्ध तकनीकी उपकरणों के अधिकतम और सार्थक उपयोग पर विशेष जोर दिया:
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हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूलों में शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए इंटरएक्टिव पैनल को नियमित रूप से सक्रिय रखा जाए और किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में उसका तुरंत सुधार कराया जाए।
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निर्धारित कालखंड (टाइम टेबल) के अनुसार विद्यार्थियों को केवल सामान्य पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर की बुनियादी तैयारी भी समयबद्ध तरीके से कराई जाए।
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डिजिटल संसाधनों का उपयोग केवल दिखावे के उपकरण के रूप में न हो, बल्कि यह विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, बौद्धिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक कौशल को मजबूत करने का मुख्य जरिया बने।
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प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट टीवी के माध्यम से रिकॉर्डेड वीडियो, एनिमेशन आधारित शिक्षण और अन्य उपयोगी डिजिटल पाठ्य सामग्री विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए।
कलेक्टर ने विस्तार से बताते हुए कहा कि 'शिक्षा संजीवनी अभियान' का मूल उद्देश्य दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी शहरी क्षेत्रों के छात्रों के समान उच्च स्तरीय शिक्षा, समान भौतिक संसाधन और ज्ञान का समान अवसर उपलब्ध कराना है।
समग्र विकास और अधिकारियों की उपस्थिति
बैठक के समापन चरण में कलेक्टर ने विद्यालयों के समग्र विकास के लिए शिक्षक समुदाय, ग्राम पंचायत, पालकों और जिला प्रशासन के बीच एक मजबूत, पारदर्शी और सकारात्मक समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और जवाबदेही के साथ निभाने की सलाह दी, ताकि आने वाले समय में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों और परिणामों में लगातार सकारात्मक सुधार दर्ज किया जा सके।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में क्षेत्र के तमाम प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से एसडीएम श्री अजीत मरावी, जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त श्रीमती वत्सला शिवहरे के साथ-साथ संबंधित विभागों के प्राचार्य, वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षा विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे। बैतूल जिले के विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल बनाने की दिशा में यह प्रशासन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम साबित होगा।
image source: https://betul.mpinfo.org
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