नीमच जिले में खरीफ फसलों की वर्तमान स्थिति और उनके स्वास्थ्य का जायजा लेने के लिए कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक महत्वपूर्ण दौरा किया गया। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के विशेष निर्देशों के पालन में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को जावद विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया गया। उप संचालक कृषि श्री नगीन सिंह रावत, सहायक संचालक श्री ओ.एस. बर्मन और अन्य प्रमुख कृषि अधिकारियों के दल ने ग्राम अठाना, हनुमंतिया, खोर, धनेरिया, तुंबा, महेशपुरिया, सुवाखेड़ा और बरखेड़ा कामलिया सहित कई गाँवों का दौरा कर खेतों में लहलहाती फसलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
फसलों की सतत निगरानी और कीट-व्याधि से बचाव के निर्देश
दौरे के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें अपनी फसलों की सतत व नियमित निगरानी करने की सलाह दी। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि मौजूदा मौसम में फसलों में निंदाई (खरपतवार नियंत्रण) और कीट-व्याधि की समय पर रोकथाम करना बेहद आवश्यक है, ताकि किसानों को बम्पर पैदावार मिल सके। विभिन्न फसलों में कीटों के प्रकोप से निपटने के लिए अधिकारियों ने निम्नलिखित तकनीकी और वैज्ञानिक उपाय साझा किए:
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सोयाबीन में सेमीलूपर एवं गर्डल बीटल नियंत्रण: खेतों में इन कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी (150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) अथवा पूर्व मिश्रित बीटा सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड (350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) या फिर थायोमिथाक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) की अनुशंसित मात्रा का छिड़काव करना चाहिए।
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सोयाबीन एवं उड़द में पीला मोजेक रोकथाम: रसचूसक कीटों और सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ईसी (750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल (200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) की दर से स्प्रे किया जाना चाहिए।
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मक्का में फॉल आर्मीवर्म का प्रबंधन: मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म का हमला होने पर इमामेक्टिन बेंजोएट (220 ग्राम प्रति हेक्टेयर) या क्लोरएंट्रानिलीप्रोल + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव लाभप्रद रहता है।
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मूंगफली में सफेद लट और व्याधि नियंत्रण: सफेद लट की रोकथाम के लिए क्लोथियानीडीन 50 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी (250 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर) की दर से ड्रेंचिंग करें। इसके अलावा मूंगफली में अन्य बीमारियों से बचाव के लिए पूर्व मिश्रित टेबुकोनाजोल + सल्फर (1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) का छिड़काव करें।
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खेतों में जलभराव की स्थिति से बचाव: लगातार हो रही वर्षा के कारण यदि खेतों में पानी भरने की समस्या उत्पन्न होती है, तो किसानों को तत्काल प्रभाव से खेत से पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए।
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फलदार पौधों की सुरक्षा: बागवानी और फलदार पौधों में कीटों के नियंत्रण हेतु डाईमिथोएट (1.5 मिलीलीटर) एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) के घोल का स्प्रे करें।
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जैविक कीट नियंत्रण विधियां: सोयाबीन की फसल में हानिकारक कीटों की रोकथाम और प्राकृतिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए खेतों में 30 से 40 की संख्या में 'टी' (T) आकार के बर्ड परचर (पक्षी ठहराव स्थल) लगाने की सलाह दी गई, जिससे पक्षी हानिकारक कीटों को आसानी से खा सकें।
कृषि विशेषज्ञों से त्वरित संपर्क की अपील
निरीक्षण के अंत में कृषि अधिकारियों ने सभी किसानों से आग्रह किया कि यदि खेतों में किसी भी प्रकार की अज्ञात बीमारी या कीट-व्याधि के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो बिना किसी विलंब के तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क किया जाना चाहिए। किसानों की सुविधा और मार्गदर्शन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सी.पी. पचैरी (मोबाइल नंबर: 9329468805) तथा कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत (मोबाइल नंबर: 9424530725) के दूरभाष नंबर साझा किए गए हैं, जिन पर किसान भाई किसी भी समय आवश्यक तकनीकी सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
image source: https://neemuch.mpinfo.org
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