बैतूल जिले में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके समावेशी विकास को गति प्रदान करने के लिए कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में दिव्यांगजनों की पहचान, उनका सही मूल्यांकन, उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा, और उन्हें मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं को और अधिक सरल व प्रभावी बनाना था। बैठक के दौरान 'सक्षम' के तहत एक व्यापक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे जिले के हर दिव्यांग व्यक्ति को शासन की योजनाओं का सीधा और सुगम लाभ मिल सके।

21 प्रकार की दिव्यांगताओं का वर्गीकरण और सात प्रमुख आयाम

बैठक में बैतूल जिले के अधिकारियों और 'सक्षम' के प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं पर चर्चा हुई। जानकारी दी गई कि बौद्धिक, मानसिक, दृष्टि, श्रवण, चलने-फिरने (लोकोमोटर), कुष्ठता और रक्त संबंधी दिव्यांगताओं सहित कुल 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को चिन्हित किया गया है। इन सभी 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को सात प्रमुख प्रकोष्ठों में विभाजित किया गया है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में बेहतर तरीके से कार्य किया जा सके।

'सक्षम' के अंतर्गत महिला, युवा, कला, क्रीड़ा, रोजगार, अनुसंधान और एडवोकेसी के सात आयाम निर्धारित किए गए हैं। इन सातों आयामों के विस्तार और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर बैठक में मौजूद अधिकारियों ने अपने विचार रखे और रूपरेखा तैयार की।

जिला स्तरीय परिणाम आधारित मॉडल और कार्ययोजना

बैतूल जिले के लिए एक विशेष 'परिणाम आधारित मॉडल' (Result-Oriented Model) पर चर्चा की गई, जो पाँच मुख्य स्तंभों पर आधारित है:

  • पहचान: जिले में छिपे हुए या अनछुए दिव्यांगजनों की सही पहचान करना।

  • आकलन: मेडिकल और विशेषज्ञों के माध्यम से उनकी दिव्यांगता का सटीक आंकलन करना।

  • जोड़ना: दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना।

  • सशक्त करना: उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना।

  • अनुवर्तन (Follow-up): दी जा रही सेवाओं और उनके विकास का नियमित अनुवर्तन करना।

इस मॉडल के तहत विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने, पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने और दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया होगी बेहद आसान

मानसिक और बौद्धिक दिव्यांगजनों के परिजनों को अक्सर मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने में आने वाली कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसिक एवं बौद्धिक दिव्यांगजनों के मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया को अत्यधिक सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए।

इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जिला अस्पताल में एक डेडीकेटेड रूम और हेल्प डेस्क बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इस हेल्प डेस्क के माध्यम से दिव्यांगजनों और उनके परिजनों को आवेदन फॉर्म प्राप्त करने, उन्हें सही तरीके से भरने तथा आवश्यक मेडिकल प्रक्रिया की पूरी जानकारी एक ही स्थान पर आसानी से मिल जाएगी।

इसके साथ ही, सामाजिक न्याय विभाग को जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र से आवश्यक स्टाफ की ड्यूटी लगाने तथा दिव्यांग सेवा केंद्र के सुचारू संचालन की दिशा में त्वरित कार्य करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने 'सक्षम' संगठन के लिए भी एक अलग से हेल्प डेस्क विकसित करने के निर्देश दिए हैं ताकि समन्वय बेहतर हो सके।

जागरूकता अभियान और शासकीय भवनों का ऑडिट

कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए प्राप्त सभी सुझावों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। सामाजिक न्याय विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ दिव्यांगताओं की समय पर पहचान करें और उनके अधिकारों के प्रति ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं।

  • डिस्प्ले बोर्ड की स्थापना: 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के संबंध में आम जनता को जागरूक करने के लिए जिले के सभी स्कूलों, ग्राम पंचायतों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रमुखता से डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे।

  • दिव्यांग फ्रेंडली शासकीय भवन: जिले के सभी शासकीय भवन पूरी तरह से दिव्यांगजनों के अनुकूल (दिव्यांग फ्रेंडली) हों, इसके लिए संबंधित विभागों को भवनों का विशेष ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।

युवाओं का पोषण, ट्राइबल आर्ट और कौशल प्रशिक्षण

बैठक में केवल दिव्यांगजनों के मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि युवाओं के समग्र विकास से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। इसमें युवाओं के लिए उचित पोषण (न्यूट्रिशन) और बैतूल की समृद्ध 'ट्राइबल आर्ट' (आदिवासी कला) के विस्तार पर बात की गई।

बैठक के दौरान युवाओं को भारतीय सेना (Army) और पुलिस सेवा में भर्ती के लिए पूरी लगन और निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहे सेवानिवृत्त श्री अशोक रघुवंशी के सराहनीय कार्यों की कलेक्टर ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इसके अलावा, बैठक में उपस्थित जनहित से जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठित लोगों ने अपने अपने क्षेत्रों के कार्यों और अनुभवों को साझा किया।

बैठक में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति

इस उच्च-स्तरीय बैठक में बैतूल जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से निम्नलिखित लोग शामिल हुए:

  • सक्षम के अध्यक्ष श्री सुनील हिरानी

  • पॉलीटेक्निक के प्राचार्य श्री अरुण कुमार भदौरिया

  • श्री वीरेंद्र पालीवाल

  • श्री अनिल खवसे

  • श्री संदीप सोनी

  • सक्षम के अन्य सम्मानित सदस्य, जिले के सभी सीएमओ (Chief Municipal Officer) और जनपद पंचायतों के सीईओ (Chief Executive Officer)।

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