नीमच जिले के अंतर्गत आने वाली जावद सब जेल में कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से एक विशेष आध्यात्मिक शिविर और राखी मिलन समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य जेल में बंदियों को आध्यात्मिक चिंतन से जोड़ना, उनमें नैतिक मूल्यों को विकसित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए शांति तथा सद्भाव के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम के दौरान जेल का पूरा माहौल सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।

आध्यात्मिक प्रवचन और नैतिक मूल्यों का संदेश

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्था की प्रमुख वक्ताओं—सविता दीदी, श्रुति दीदी, मेघना दीदी, योगिता दीदी और समता दीदी ने अपनी ओजस्वी वाणी से बंदियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से बंदियों को आत्मचिंतन करने, नकारात्मक विचारों को त्यागकर सकारात्मक सोच अपनाने और अपने जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों को उतारने का आह्वान किया।

दीदियों ने बंदियों को समझाया कि हर मनुष्य से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन भूतकाल की गलतियों को सुधारकर और बुराइयों का पूरी तरह त्याग करके एक नया जीवन शुरू किया जा सकता है। प्रेम, भाईचारा और शांति के मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने अंदर आंतरिक परिवर्तन ला सकता है और एक बेहतर इंसान बन सकता है।

रक्षाबंधन पर्व पर राखी मिलन समारोह की भव्यता

रक्षाबंधन के पवित्र पर्व के उपलक्ष्य में आयोजित राखी मिलन समारोह इस पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक हिस्सा रहा। इस दौरान जिन बंदियों के पास अपनी बहनें नहीं थीं या जिन्हें राखी बांधने वाला कोई परिजन उपस्थित नहीं हो सका, उन्हें ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपने हाथों से पवित्र रक्षा सूत्र (राखी) बांधा।

इस अवसर पर बहनों ने रक्षाबंधन के वास्तविक आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि राखी केवल धागा नहीं है, बल्कि यह पवित्र प्रेम, रक्षा के संकल्प और आत्मिक संबंधों की अटूट भावना को मजबूत करने का प्रतीक है। इस स्नेहिल पल ने कई बंदियों की आंखें नम कर दीं और उनके भीतर पारिवारिक व सामाजिक अपनत्व की भावना को पुनर्जीवित किया।

बंदियों द्वारा पांच प्रमुख प्रतिज्ञाएं और संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी बंदियों ने पूरे उत्साह और प्रशासनिक समन्वय के साथ सहभागिता की। उन्होंने अपने वर्तमान जीवन को सुधारने और भविष्य में एक अनुशासित नागरिक बनने का संकल्प लिया। ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा सभी बंदियों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए पांच प्रमुख प्रतिज्ञाएं दिलाई गईं, जो इस प्रकार हैं:

  • बुराइयों का त्याग: जीवन में किसी भी प्रकार की बुरी आदतों और व्यसनों को हमेशा के लिए छोड़ना।

  • नशे से दूरी: हर प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाना।

  • सकारात्मक जीवन: हर परिस्थिति में सकारात्मक सोच रखना और मानसिक शांति बनाए रखना।

  • अनुशासित जीवन: जेल नियमों और सामाजिक मर्यादाओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए अनुशासित जीवन जीना।

  • राष्ट्र प्रथम की भावना: समाज और राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना।

इन प्रतिज्ञाओं ने बंदियों के मन में नया आत्मविश्वास जगाया और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वे सजा पूरी करने के बाद समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।

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