मध्य प्रदेश के कटनी जिले में किसानों को सशक्त बनाने और उन्हें आधुनिक डिजिटल युग से जोड़ने के लिए 'फार्मर आईडी' बनाने का एक व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के कुशल मार्गदर्शन और विशेष निर्देशों के तहत प्रशासनिक अमला और शासकीय दल लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अधिकारी और कर्मचारी स्वयं किसानों के पास पहुंचकर उनकी फार्मर आईडी तैयार करवा रहे हैं, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी हो रही है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत अब तक जिले में 2 लाख 37 हजार से अधिक किसानों की फार्मर आईडी सफलतापूर्वक बनाई जा चुकी है, जिससे कृषि क्षेत्र में एक डिजिटल क्रांति की शुरुआत हुई है।
फार्मर आईडी का महत्व और डेटा एकीकरण
यह विशेष आईडी किसानों के लिए एक अत्यधिक विश्वसनीय और स्थायी डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करती है। फार्मर आईडी को किसानों से जुड़े विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण डेटा और अभिलेखों के साथ जोड़ा गया है, जिससे किसानों की समग्र जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होती है। इस डिजिटल पहचान में निम्नलिखित जानकारियां शामिल होती हैं:
-
भूमि के संपूर्ण और अद्यतन अभिलेख।
-
किसानों के पास मौजूद पशुधन का स्वामित्व विवरण।
-
खेतों में बोई गई विभिन्न फसलों का रिकॉर्ड।
-
कृषि कार्यों के लिए खाद प्राप्ति और शासन से प्राप्त अन्य लाभों का विवरण।
इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भविष्य में किसानों को डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रिमोट सेंसिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सीधा और भरपूर लाभ मिलने की राह आसान हो गई है।
तहसीलवार फार्मर आईडी निर्माण की प्रगति रिपोर्ट
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार राजस्व अधिकारियों द्वारा इस कार्य में लगातार तेजी लाई जा रही है। जिले में अब तक कुल 2 लाख 37 हजार 132 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। कटनी जिले की विभिन्न तहसीलों में अब तक हुए कार्यों का तहसीलवार विवरण इस प्रकार है:
-
बड़वारा तहसील: बड़वारा में अब तक 23 हजार 696 किसानों की फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है।
-
बहोरीबंद तहसील: इस क्षेत्र में कुल 33 हजार 028 किसानों का पंजीयन किया गया है।
-
बरही तहसील: बरही तहसील के अंतर्गत 23 हजार 879 फार्मर आईडी बनाई गई हैं।
-
ढ़ीमरखेड़ा तहसील: इस क्षेत्र में सबसे अधिक प्रगति करते हुए 35 हजार 405 किसानों की आईडी बनी है।
-
कटनी शहरी क्षेत्र: शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 14 हजार 220 किसानों को यह डिजिटल पहचान मिली है।
-
कटनी मुड़वारा तहसील: मुड़वारा में 16 हजार 996 किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।
-
रीठी तहसील: रीठी क्षेत्र के 30 हजार 449 किसानों का डेटा डिजिटल रूप में दर्ज किया गया है।
-
स्लीमनाबाद तहसील: इस क्षेत्र में 22 हजार 843 किसानों की फार्मर आईडी तैयार हुई है।
-
विजयराघवगढ़ तहसील: विजयराघवगढ़ में कुल 39 हजार 153 किसानों की फार्मर आईडी बनाई गई है।
किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और इसके लाभ
शासन के निर्देशों के अनुरूप किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार निरंतर ग्राम और किसान स्तर तक किया जा रहा है। कृषि से संबंधित सभी जानकारियां और सेवाएं समय पर, पारदर्शी तरीके से और पूर्ण विश्वसनीयता के साथ उपलब्ध कराने के लिए आधार कार्ड की तर्ज पर 'किसान आईडी' की शुरुआत की गई है।
फार्मर आईडी बनवाने से किसानों को कई प्रमुख प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं:
-
पीएम किसान सम्मान निधि: इस योजना का लाभ आगामी किस्तों में आसानी से मिल सकेगा।
-
उपार्जन और पंजीयन: समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए खरीदी केंद्रों में पंजीयन प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी।
-
क्रेडिट और बीमा: किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने में सत्यापन संबंधी कोई असुविधा नहीं होगी।
फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण चेतावनी
किसान भाई घर बैठे आधिकारिक वेबसाइट https://mpfr.agristack.gov.in/ का उपयोग करके अपनी फार्मर रजिस्ट्री या आईडी स्वयं बना सकते हैं। इसके अलावा, गिरदावरी के लिए चिन्हित किए गए स्थानीय युवाओं, पटवारियों तथा नजदीकी सीएससी (CSC) केंद्रों के माध्यम से भी इसे बनवाया जा सकता है। राजस्व विभाग द्वारा विशेष पहल करते हुए स्थानीय स्तर पर शिविर और संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। सभी किसानों से अपील की गई है कि वे अपने क्षेत्र के पटवारियों से संपर्क कर अपनी फार्मर आईडी और आधार आरओआर (ROR) का कार्य समय पर पूरा करवा लें।
महत्वपूर्ण चेतावनी: जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पाएगी, वे आगामी पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त से वंचित हो सकते हैं। इसके अलावा, फार्मर आईडी के बिना उपार्जन के लिए पंजीयन, फसल बीमा और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करना संभव नहीं होगा।
image source : https://katni.mpinfo.org
Continue With Google