बैतूल जिले में प्रशासन के प्रति आम नागरिकों का विश्वास और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की अध्यक्षता में आयोजित इस जनसुनवाई में राजस्व, भूमि विवाद, पेंशन, आवास, बिजली और पानी जैसी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिले भर से आए नागरिकों ने अपनी फरियाद रखी। कलेक्टर ने प्रत्येक आवेदन को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए अधिकारियों को न केवल समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए, बल्कि समय-सीमा में कार्य पूर्ण न करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

जनसुनवाई का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य आमजन की समस्याओं को शासन के शीर्ष स्तर तक पहुँचाना और उनका मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित करना है। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने स्पष्ट रूप से अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जाए ताकि नागरिकों को बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्रीमती वंदना जाट, संयुक्त कलेक्टर श्री मकसूद अहमद सहित जिले के सभी प्रमुख विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रमुख मामले और तत्काल निर्देश

जनसुनवाई के दौरान सामने आए कुछ प्रमुख प्रकरणों में कलेक्टर ने व्यक्तिगत रुचि ली और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया:

  • अनुकम्पा नियुक्ति और बकाया वेतन: कोठीबाजार, बैतूल की निवासी पिंकी साहू ने कलेक्टर को अवगत कराया कि उनके पति की मृत्यु के पश्चात उन्हें अनुकम्पा नियुक्ति के स्थान पर 5 वर्ष का वेतन देने के आदेश हुए थे, किंतु राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इस पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी से विस्तृत जानकारी ली और कड़े निर्देश दिए कि यदि आज ही आवेदन का निराकरण नहीं हुआ, तो विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बैतूल) और संकुल प्राचार्य (बैतूल) के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया जाए।

  • अवैध निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतें: ग्राम बघोली की उषा माकोड़े ने अवैध रूप से नाली निर्माण की शिकायत की, जिस पर कलेक्टर ने बैतूल जनपद पंचायत सीईओ को जांच कर निराकरण के आदेश दिए। वहीं, भीमपुर तहसील के चुनालोमा निवासी दलसिंह द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत पर कलेक्टर ने भीमपुर तहसीलदार को मौके की जांच कर प्रकरण को शीघ्र हल करने के निर्देश दिए।

भूमि सीमांकन और रास्ते का विवाद

जनसुनवाई में भूमि संबंधी विवादों की बड़ी संख्या देखने को मिली:

  • सीमांकन संबंधी आवेदन: बडोरा की सकून बाई मौखेड़े ने सीमांकन न होने की शिकायत की, जिस पर नायब तहसीलदार बैतूल-2 को तत्काल सीमांकन के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार भगवत राव ने भी भूमि सीमांकन के लिए आवेदन किया, जिस पर आठनेर तहसीलदार को निर्देश दिए गए।

  • रास्ते का विवाद: चोरडोंगरी निवासी रामनाथ द्वारा आने-जाने के रास्ते संबंधी शिकायत पर अपर कलेक्टर ने सारणी तहसीलदार को मौके पर पहुंचकर समस्या के निराकरण के निर्देश दिए।

पेयजल और आवास योजना से जुड़ी समस्याएं

जनसुनवाई में ग्रामीण अंचल से आई पेयजल और सरकारी योजनाओं के लाभ से संबंधित समस्याओं को कलेक्टर ने प्राथमिकता दी:

  • पेयजल समस्या: आमला तहसील के ग्राम बड़गांव के ग्रामीणों ने पीने के पानी की किल्लत की शिकायत की। कलेक्टर ने आमला जनपद सीईओ को निर्देशित किया कि पेयजल समस्या की जांच कर तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

  • नाला बंद होने की शिकायत: बरसाली के ग्रामीणों ने शासकीय नाले पर अतिक्रमण कर उसे बंद करने की शिकायत की, जिस पर बैतूल तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए गए।

  • प्रधानमंत्री आवास योजना: घोड़ाडोंगरी तहसील के ग्राम नांदू की ममता बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने के संबंध में आवेदन दिया, जिस पर संबंधित अधिकारी को तत्काल लाभ दिलाने के निर्देश जारी किए गए।

प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की दिशा

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे द्वारा जनसुनवाई में लिया गया सख्त रुख इस बात का प्रतीक है कि प्रशासन अब जन शिकायतों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रहा है। अधिकारियों को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जनसुनवाई महज एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का एक माध्यम है।

आने वाले समय में जनसुनवाई के परिणामों की निरंतर समीक्षा की जाएगी ताकि प्राप्त आवेदनों का वास्तविक समाधान हो सके। कलेक्टर की यह सक्रियता न केवल बैतूल के आम नागरिकों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा संकेत है कि कार्य में ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि 'सुशासन' के वादे को धरातल पर उतारा जाए और नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिले।

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