मारपीट-लूट के आरोपी खुले घूम रहे, राजीनामा के लिए धमकी का आरोप
पत्रकारों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे पीड़ित लोकेन्द्र, प्रभारी मंत्री को सौंपा आवेदन, आरोपियों की गिरफ्तारी और जान-माल की सुरक्षा की मांग
टीकमगढ़। शहर में पत्रकार के साथ मारपीट और लूट के मामले में पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं किए जाने का मामला अब प्रभारी मंत्री तक पहुंच गया है। घटना के पीड़ित पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार गुरुवार को साथी पत्रकारों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे और जिले की प्रभारी मंत्री को आवेदन सौंपकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी कराने तथा अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। पत्रकारों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार, निवासी मामौन दरवाजा, टीकमगढ़ के अनुसार, 2 अगस्त 2026 की रात उनके साथ मारपीट और लूट की घटना हुई थी। घटना के बाद उन्होंने उसी रात कोतवाली थाना पहुंचकर पुलिस को शिकायत की थी। इसके बाद 3 अगस्त 2026 को कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 0471/2026 दर्ज किया। पुलिस द्वारा दर्ज मामले में शिवम जड़िया पिता स्वर्गीय संतोष जड़िया, ऋषि जड़िया पिता स्वर्गीय संतोष जड़िया, साहिल हरदासानी निवासी टीकमगढ़ सहित एक अन्य आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296बी, 115(2), 309(4) एवं 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
अपराध दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप
प्रभारी मंत्री को दिए आवेदन में पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार ने आरोप लगाया है कि घटना को लेकर अपराध दर्ज होने के बावजूद 6 अगस्त तक पुलिस द्वारा नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है। उनका कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि घटना के बाद आरोपियों के परिजन और उनके सहयोगी लगातार मामले में राजीनामा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। आवेदन में राहुल जड़िया सहित अन्य लोगों द्वारा दबाव बनाए जाने का उल्लेख किया गया है।
राजीनामा से इनकार करने पर जान से मारने की धमकी का आरोप
लोकेन्द्र सिंह परमार ने प्रभारी मंत्री को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने राजीनामा करने से इनकार किया तो उन्हें देख लेने और जान से मारने की धमकियां दी गईं। उनका कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह मानसिक रूप से परेशान हैं और उन्हें आशंका है कि आरोपी या उनके सहयोगी उनके साथ दोबारा कोई गंभीर घटना कर सकते हैं। उन्होंने आवेदन में कहा है कि यदि पुलिस द्वारा समय रहते आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में उनके साथ किसी अप्रिय घटना की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता।
पत्रकारों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे पीड़ित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित पत्रकार लोकेन्द्र सिंह परमार अपने साथी पत्रकारों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिले की प्रभारी मंत्री को पूरा घटनाक्रम बताते हुए लिखित आवेदन सौंपा। इस दौरान पत्रकारों ने भी मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी पत्रकार के साथ मारपीट और लूट की घटना के बाद अपराध दर्ज होता है, तो आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होना चाहिए। पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री से मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने और पीड़ित पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
मामले में अपराध दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि एक तरफ उनके साथ हुई घटना को लेकर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी ओर आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और कथित तौर पर राजीनामा के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि आरोपी पक्ष द्वारा वास्तव में धमकियां दी जा रही हैं तो पुलिस को इसकी गंभीरता से जांच कर पीड़ित को सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही मामले में फरार आरोपियों की तलाश कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रभारी मंत्री से दो प्रमुख मांगें
पीड़ित पत्रकार ने प्रभारी मंत्री से मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। पहली, अपराध क्रमांक 0471/2026 में नामजद आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर मामले में प्रभावी कार्रवाई की जाए। दूसरी, राजीनामा के लिए दबाव और कथित जान से मारने की धमकियों को देखते हुए उन्हें और उनके परिवार को आवश्यक जान-माल की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। लोकेन्द्र सिंह परमार ने कहा कि वह पेशे से पत्रकार हैं और लगातार समाचारों के माध्यम से जनहित के मुद्दे उठाते हैं। ऐसे में उनके साथ हुई घटना और उसके बाद मिल रही कथित धमकियों को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। उन्होंने प्रभारी मंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर पुलिस प्रशासन को तत्काल आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रभारी मंत्री के समक्ष शिकायत पहुंचने के बाद पुलिस इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित पत्रकार की सुरक्षा को लेकर क्या कार्रवाई करती है।
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