सितंबर का आखिरी हफ्ता, और एक ही दिन में भोपाल में साइबर ठगी के 28 मामले। रिपोर्टों के मुताबिक उस दिन लोगों के ₹29 लाख से ज़्यादा गए। ठगे गए लोगों में 74 और 79 साल के बुज़ुर्ग भी थे।
अगस्त में आई रिपोर्टों में बताया गया था कि सात महीने में भोपाल के लोग ₹15 करोड़ से ज़्यादा गँवा चुके हैं। सितंबर के आखिर के पुलिस आँकड़े जनवरी से अगस्त तक ₹28.23 करोड़ बताते हैं। पूरे 2025 में यह नुकसान ₹53.41 करोड़ था।
नवरात्र के बाद अब धनतेरस और दिवाली की खरीदारी सामने है, और इसी समय नकली सेल और "ऑफर" वाले लिंक सबसे ज़्यादा घूमते हैं।
1. डिजिटल अरेस्ट: वीडियो कॉल पर "वर्दी" और डर
कॉल आता है कि आपके नाम का पार्सल पकड़ा गया है। फिर वीडियो कॉल पर नकली वर्दी, कैमरे के सामने बैठे रहने का हुक्म और "वेरिफिकेशन" के नाम पर पैसा ट्रांसफर।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) साफ कह चुका है कि CBI, पुलिस, कस्टम, ED या जज वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करते। प्रधानमंत्री ने भी अक्टूबर 2024 में तीन कदम बताए थे: रुको, सोचो, एक्शन लो।
2. निवेश और ट्रेडिंग का लालच
ग्रुप में शेयर टिप्स, ऐप पर नकली मुनाफा, और निकालते समय "टैक्स" की माँग। पक्के रिटर्न का वादा सबसे बड़ा खतरे का संकेत है। निवेश सिर्फ SEBI में रजिस्टर्ड ब्रोकर और जाने-माने ऐप से करें।
3. टास्क और नौकरी के नाम पर ठगी
"घर बैठे वीडियो लाइक करो, रोज़ कमाओ"। पहले छोटा भुगतान, फिर "प्रीमियम टास्क" के नाम पर बड़ी रकम जमा। एक दिन के उन 28 मामलों में भी टेलीग्राम टास्क और एक बड़ी कंपनी में नौकरी दिलाने के झाँसे वाले केस थे। असली नौकरी के लिए कोई पैसा नहीं माँगता।
4. त्योहारी शॉपिंग: सस्ता सामान, नकली रिफंड
13 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक भोपाल में ऑनलाइन खरीदारी और रिफंड से जुड़ी ठगी की 10 से ज़्यादा शिकायतें आईं। ठग इंटरनेट पर नकली कस्टमर केयर नंबर डालते हैं और रिफंड के नाम पर OTP, APK या स्क्रीन शेयरिंग माँगते हैं। एडिशनल DCP क्राइम ब्रांच शैलेंद्र सिंह चौहान ने खरीदारी में विशेष सतर्कता की अपील की (रिपोर्ट के मुताबिक)।
14 अक्टूबर को एक पुलिस कांस्टेबल ही फेसबुक पर सस्ते घरेलू सामान के ऑफर में ₹45,000 गँवा बैठे।
- कस्टमर केयर नंबर सिर्फ कंपनी के ऑफिशियल ऐप या वेबसाइट से लें।
- रिफंड पाने के लिए कभी OTP, UPI PIN या एडवांस फीस नहीं देनी होती।
5. KYC, बिजली बिल और APK फाइल
"आज रात 10 बजे बिजली कट जाएगी", "आधार/KYC अपडेट करें", "ट्रैफिक चालान भरें"। पुलिस के मुताबिक नया ट्रेंड APK फाइल और स्क्रीन एक्सेस ऐप का है, जिनसे ठग फोन पर कब्ज़ा कर लेते हैं और OTP बताए बिना भी खाता खाली हो जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक एक बैंक के चीफ मैनेजर तक ऐसे APK से ₹1.44 लाख गँवा बैठे। अनजान लिंक से कोई ऐप इंस्टॉल न करें।
ठगी हो जाए तो: गोल्डन ऑवर में ये करें
पुलिस के मुताबिक ठगी के बाद के पहले एक-दो घंटे सबसे अहम हैं, क्योंकि तभी पैसा आगे के खातों में जाने से रोका जा सकता है। इस साल ₹13.82 करोड़ होल्ड कराए जा चुके हैं।
- तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को कॉल कर कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएँ।
- ट्रांजैक्शन ID और स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
- भोपाल साइबर हेल्पलाइन 0755-2677339 या नज़दीकी थाने में भी जानकारी दें।
RBI के 2017 के नियम के मुताबिक अगर गलती न बैंक की है न ग्राहक की, और आपने 3 कामकाजी दिन के भीतर बैंक को सूचना दी, तो ग्राहक की देनदारी शून्य होती है। खुद OTP या PIN बताया हो तो बैंक इसे ग्राहक की लापरवाही मान सकता है।
आज ही कर लें ये 5 काम
- फोन में 1930 और बैंक का ऑफिशियल हेल्पलाइन नंबर सेव करें।
- घर के बुज़ुर्गों को बताएँ कि पुलिस वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती।
- अनजान लिंक से आई कोई APK फाइल फोन में इंस्टॉल न करें।
- UPI और कार्ड की लिमिट कम रखें, SMS अलर्ट चालू रखें।
- कस्टमर केयर नंबर गूगल से नहीं, कंपनी के ऐप से लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: साइबर ठगी की शिकायत कहाँ करें?
उत्तर: राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
प्रश्न: भोपाल पुलिस की साइबर हेल्पलाइन?
उत्तर: 0755-2677339 और 9479990636 (भोपाल पुलिस वेबसाइट)।
प्रश्न: क्या पुलिस या CBI वीडियो कॉल पर गिरफ्तार कर सकती है?
उत्तर: नहीं। I4C के मुताबिक कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
प्रश्न: गोल्डन ऑवर क्या है?
उत्तर: ठगी के बाद के पहले एक-दो घंटे, जब शिकायत करने पर पैसा होल्ड होने की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है।
प्रश्न: बैंक से पैसा वापस मिल सकता है?
उत्तर: समय पर सूचना देने पर RBI नियम से राहत मिल सकती है, पर यह केस पर निर्भर है।
प्रश्न: रिफंड के लिए OTP माँगा जाए तो?
उत्तर: कभी न दें। रिफंड सिर्फ कंपनी के ऑफिशियल ऐप या वेबसाइट से प्रोसेस होता है।
यह खबर 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आँकड़े मीडिया रिपोर्ट्स में दिए पुलिस डेटा पर आधारित हैं और बदल सकते हैं। हेल्पलाइन और नियमों की पुष्टि cybercrime.gov.in, bhopal.mppolice.gov.in या अपने बैंक से करें।
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