शरद पूर्णिमा पर ग्राम पाली में 12 घंटे तक बंटी औषधियुक्त खीर, 3 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे
भारद्वाज आयुर्वेद संस्थान पाली में रातभर चला आयोजन, मप्र के साथ राजस्थान, यूपी और महाराष्ट्र से भी आए लोग; 9 साल से परंपरा निभा रहे संचालक लखन पाठक
शमशाबाद। शरद पूर्णिमा के अवसर पर शमशाबाद के ग्राम पाली स्थित भारद्वाज आयुर्वेद संस्थान में औषधियुक्त खीर वितरण का आयोजन किया गया। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में रुचि रखने वाले 3 हजार से अधिक लोग इस आयोजन में शामिल हुए। कार्यक्रम शाम 7 बजे शुरू हुआ, जो अगले दिन सुबह 7 बजे तक चला। संस्थान के संचालक लखन पाठक पिछले 9 वर्षों से शरद पूर्णिमा पर औषधियुक्त खीर वितरण की परंपरा निभा रहे हैं। इस बार भी मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से लोग ग्राम पाली पहुंचे।
अस्थमा, एलर्जी और सर्दी-जुकाम पर दी जानकारी
कार्यक्रम में शरद पूर्णिमा के विशेष महत्व के साथ आयुर्वेद, औषधियों और जैविक खानपान की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा की रात औषधियुक्त खीर का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर अस्थमा, धूल-धुएं से होने वाली एलर्जी, ठंड, सर्दी-जुकाम, खांसी, नजला और साइनस जैसी समस्याओं के संबंध में भी जानकारी दी गई।
आयोजन के दौरान बताया गया कि खानपान में प्राकृतिक और जैविक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना महत्वपूर्ण है। औषधियों के उपयोग और पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धतियों को लेकर भी लोगों को जानकारी दी गई। शरद पूर्णिमा पर खीर ग्रहण करने की परंपरा के पीछे प्रचलित मान्यताओं और इसके आयुर्वेदिक संदर्भों पर चर्चा की गई।
पहले लाभ लेने वाले लोगों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में पहले औषधियुक्त खीर ग्रहण कर चुके लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों के बारे में बताया। इससे आयोजन में पहुंचे लोगों को दूसरे लोगों के अनुभव सुनने और आयुर्वेदिक पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। हालांकि, व्यक्तिगत अनुभव किसी औषधि की प्रभावशीलता का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होते।
9 साल से जारी है खीर वितरण की परंपरा
भारद्वाज आयुर्वेद संस्थान के संचालक लखन पाठक पिछले 9 वर्षों से शरद पूर्णिमा पर औषधियुक्त खीर वितरण का आयोजन कर रहे हैं। हर साल इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग शामिल होने पहुंचते हैं। इस बार भी 3 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही। शाम 7 बजे से शुरू होकर सुबह 7 बजे तक चले कार्यक्रम में रातभर लोगों का पहुंचना जारी रहा।
शमशाबाद के ग्राम पाली में आयोजित इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से लोगों की उपस्थिति ने इसे व्यापक स्वरूप दिया। आयोजन के माध्यम से आयुर्वेद, पारंपरिक खानपान और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
चिकित्सकीय सलाह: अस्थमा, एलर्जी, साइनस या अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को औषधियुक्त खीर को प्रमाणित इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। इसके सेवन से सभी रोग ठीक होने का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ऐसे रोगियों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना चाहिए।
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