छतरपुर (मध्य प्रदेश): जिले के प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से कलेक्टर पार्थ जैसवाल इन दिनों लगातार मैदानी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में कलेक्टर जैसवाल ने बड़ामलहरा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान अचानक तहसील कार्यालय घुवारा पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
इस औचक निरीक्षण से तहसील कार्यालय में हड़कंप की स्थिति रही। कलेक्टर ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप आमजन को समय पर न्याय मिलना अनिवार्य है।
1. प्रमुख बिंदु: निरीक्षण की मुख्य बातें
कलेक्टर पार्थ जैसवाल द्वारा किए गए इस निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश और निर्णय लिए गए:
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राजस्व प्रकरणों का त्वरित डिस्पोजल: कलेक्टर ने तहसीलदार कोर्ट का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे लंबित मामलों की समीक्षा की और निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समयसीमा के भीतर ही किया जाए।
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कोर्ट में नियमित पेशी के निर्देश: राजस्व न्यायालय की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कलेक्टर ने तहसीलदार को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से कोर्ट में पेशी लगाएं। इससे न केवल लंबित मामले कम होंगे, बल्कि आवेदकों को भी बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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पटवारियों पर कड़ी कार्यवाही की चेतावनी: निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि कई बार कोर्ट के आदेश के बावजूद जमीनी स्तर पर पटवारियों द्वारा अमल (Execution) नहीं किया जाता। कलेक्टर ने एसडीएम और तहसीलदार को सख्त लहजे में कहा कि यदि पटवारी आदेशों का पालन समय पर नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाए।
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पारदर्शिता के लिए लोक सेवा केंद्र का अनिवार्य उपयोग: भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम लगाने के लिए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि तहसील से संबंधित सभी आवेदन अनिवार्य रूप से 'लोक सेवा केंद्र' (LSK) के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएं। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनी रहेगी।
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अधोसंरचना (Infrastructure) में सुधार: तहसील कार्यालय घुवारा के भवन और वहां की मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने कार्यालय की अधोसंरचना में आवश्यक सुधार और मरम्मत के निर्देश दिए, ताकि कर्मचारियों और आने वाले आगंतुकों को बेहतर माहौल मिल सके।
2.आवेदकों की समस्याओं का मौके पर सुना
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल फाइलों का अवलोकन ही नहीं किया, बल्कि कार्यालय में अपनी समस्याओं को लेकर आए आम नागरिकों और आवेदकों से भी सीधा संवाद किया।
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शिकायतों का संज्ञान: कलेक्टर ने मौके पर मौजूद आवेदकों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना। अधिकांश शिकायतें तरमीम (नक्शा सुधार), सीमांकन और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में हो रही देरी से संबंधित थीं।
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तत्काल निराकरण के आदेश: उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन आवेदकों को परेशान न किया जाए और इनके प्रमाण पत्र व अन्य राजस्व सुधार कार्य शीघ्रता से पूर्ण किए जाएं।
3.पुराने प्रकरणों की भी हुई सूक्ष्म जांच
प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने केवल नए या लंबित मामलों को ही नहीं देखा, बल्कि पूर्व में डिस्पोजल (निराकृत) किए गए पुराने प्रकरणों की भी रैंडम जांच की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि पुराने मामलों का निपटारा केवल कागजों पर तो नहीं हुआ है, बल्कि उनका वास्तविक लाभ संबंधित पक्ष को मिला है या नहीं।
4. प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के साथ जिले के अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए:
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अखिल राठौर (SDM): उन्हें राजस्व मामलों की मॉनिटरिंग और पटवारियों के कार्यों की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई।
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आदित्य सोनकिया (तहसीलदार): उन्हें नियमित कोर्ट संचालन और प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के लिए पाबंद किया गया।
5. निष्कर्ष
कलेक्टर पार्थ जैसवाल का यह औचक निरीक्षण तहसील स्तर पर कार्यरत राजस्व अमले के लिए एक कड़ा संदेश है। "पटवारी आदेश का अमल नहीं करे तो कार्यवाही करें" जैसे सख्त निर्देश स्पष्ट करते हैं कि प्रशासन अब जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के मूड में है। घुवारा तहसील में होने वाले इन सुधारों से न केवल पेंडेंसी कम होगी, बल्कि बड़ामलहरा क्षेत्र के हजारों किसानों और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी।
image source :https://chhatarpur.mpinfo.org

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