बैतूल। पवित्र रमज़ान माह के दौरान शहर की जामा मस्जिद में इबादत का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। रमज़ान के 20वें रोज़े से मस्जिद में एहतकाफ पर बैठे रोज़ेदार पूरी तल्लीनता के साथ अल्लाह की इबादत में लीन हैं। इसी क्रम में सामाजिक सेवा के लिए जानी जाने वाली 75 कदम टीम के सदस्यों ने जामा मस्जिद पहुंचकर एहतकाफ में बैठे रोज़ेदारों का फूल-मालाओं से स्वागत कर सम्मान किया।
इस अवसर पर टीम के सदस्यों ने एहतकाफ की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समय आत्मशुद्धि, इबादत और आत्ममंथन का होता है, जो व्यक्ति को अनुशासन और संयम का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि एहतकाफ में बैठना समर्पण और आस्था का प्रतीक है, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
टीम सदस्यों ने एहतकाफ में बैठे लोगों के जज़्बे, अनुशासन और इबादत के प्रति उनकी निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और आध्यात्मिक प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक होते हैं।
गौरतलब है कि 75 कदम टीम केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही है। टीम द्वारा समय-समय पर ब्लड डोनेशन कैंप, जरूरतमंदों की सहायता, स्वास्थ्य शिविर एवं जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है।
इस दौरान जामा मस्जिद के पेश इमाम जावेद चिश्ती साहब ने 75 कदम टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बैतूल जिले में विभिन्न धर्मों के लोग आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ रहते हैं, जो समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण है।
कार्यक्रम के अंत में 75 कदम टीम द्वारा एहतकाफ में बैठे सभी रोज़ेदारों को जामा मस्जिद से 75 कदम तक सम्मानपूर्वक विदा किया गया।
इस अवसर पर बबलू दुबे, लल्ली वर्मा, पिंकी भाटिया, दीप मालवीय, वाली वालिया, इंदी वालिया, रमेश भाटिया, पत्रकार नईम मामू, पिनेश जोसेफ, नवल ठाकुर, नारायण चंडोकार, असलम भाई, पासु भाई सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सेवा, सद्भाव और सम्मान ही समाज को मजबूत बनाने की असली ताकत है।

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