आमला। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने नर्सरी से आठवीं तक के सभी स्कूलों में 27 से 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया था। लेकिन इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आमला स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय ने सोमवार को स्कूल संचालित कर प्रशासनिक आदेशों को नजरअंदाज कर दिया।
इस घटना ने न केवल आदेशों के पालन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
*रात में आदेश, सुबह बच्चों की उपस्थिति—अभिभावकों में आक्रोश*
कलेक्टर द्वारा अवकाश के आदेश रविवार रात को ही जारी कर दिए गए थे, जो सोशल मीडिया और प्रशासनिक माध्यमों पर व्यापक रूप से प्रसारित भी हुए। इसके बावजूद सोमवार सुबह छोटे-छोटे बच्चे तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच स्कूल पहुंचते नजर आए।
अभिभावकों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि जब पूरा जिला प्रशासन के आदेशों का पालन कर रहा था, तब एक स्कूल अपनी अलग व्यवस्था कैसे चला सकता है। कई पालकों ने इसे “बच्चों की जान से खिलवाड़” और “सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना” करार दिया।
*40 डिग्री तापमान और लू का खतरा—बढ़ा स्वास्थ्य संकट*
अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे हालात में लू का खतरा सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गर्मी में बच्चों को डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, उल्टी-दस्त और तेज बुखार जैसी समस्याएं तेजी से हो सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मौसम में बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर भेजना उनकी सेहत के लिए जोखिम भरा है। ऐसे में स्कूल का संचालन करना सीधे तौर पर बच्चों को खतरे में डालने जैसा माना जा रहा है।
*स्कूल प्रशासन की सफाई पर उठे सवाल*
मामले में जब विद्यालय प्रबंधन से संपर्क किया गया, तो प्राचार्य मदन मोहन कटियार ने कहा कि अवकाश की सूचना उन्हें देर से प्राप्त हुई, जिसके कारण सोमवार को स्कूल खुला रहा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार से नर्सरी से आठवीं तक के सभी छात्रों के लिए अवकाश लागू कर दिया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब आदेश रात में ही सार्वजनिक हो चुके थे, तो उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया? क्या यह महज सूचना में देरी थी या लापरवाही?
*आदेशों की अनदेखी या सिस्टम की खामी?*
यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या केंद्रीय विद्यालय प्रशासन जिला प्रशासन के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है?क्या बच्चों की सुरक्षा से समझौता किया जा सकता है?क्या इस तरह की लापरवाही पर जवाबदेही तय होगी?
इस घटना ने प्रशासनिक समन्वय और जवाबदेही दोनों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
*कार्रवाई की मांग, प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार*
घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। हालांकि अभी तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।
अब देखना होगा कि यह मामला केवल स्पष्टीकरण तक सीमित रहता है या फिर जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाते हैं।
*इनका कहना है*
"हमें अवकाश की सूचना देरी से प्राप्त हुई थी, इसी कारण आज विद्यालय का संचालन किया गया। हालांकि, कल (मंगलवार) से नर्सरी से लेकर आठवीं तक के सभी बच्चों का अवकाश अनिवार्य रूप से घोषित रहेगा।"
*मदन मोहन कटियार,*
*प्राचार्य पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आमला*

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