बालाघाट। कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास की दिशा में बालाघाट जिला प्रशासन और कृषि विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में, मंगलवार, 16 जून 2026 को किरनापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत बगड़मारा में 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन' के अंतर्गत एक विशाल जागरूकता एवं पंजीयन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के विकल्पों से जोड़ना और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से उत्पादन लागत कम करने के लिए प्रेरित करना था।

प्राकृतिक खेती: लागत में कमी और बेहतर गुणवत्ता

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और उप संचालक कृषि, श्री फूलसिंह मालवीय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक और जैविक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की खोई हुई उर्वरक शक्ति को भी पुनः बहाल करती है। विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने की सलाह दी और संतुलित खाद एवं उर्वरकों के प्रयोग का महत्व समझाया।

डीएसआर (DSR) तकनीक और बीज उपचार के फायदे

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice - DSR) पद्धति के लाभों पर प्रकाश डाला। किसानों को बताया गया कि यह तकनीक कैसे उनके लिए वरदान साबित हो सकती है:

  • संसाधन की बचत: डीएसआर तकनीक से पानी, श्रम और लागत में भारी कमी आती है।

  • बेहतर उत्पादन: फसल का उत्पादन पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक और बेहतर गुणवत्ता वाला होता है।

  • बीज उपचार: अधिकारियों ने सलाह दी कि हमेशा प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करें। बीज उपचार से न केवल अंकुरण बेहतर होता है, बल्कि फसल को शुरुआती दौर में कीटों और रोगों से सुरक्षा भी मिलती है।

  • हरी खाद: खेत में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए हरी खाद के उपयोग को अनिवार्य बताया गया।

नरवाई प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण

'खेत बचाओ अभियान' के तहत नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन पर विशेष चर्चा की गई। किसानों को सचेत किया गया कि फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाना मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए घातक है। जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इसके स्थान पर फसल अवशेषों को जैविक खाद में बदलने की वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का आह्वान किया गया।

पंजीयन और सरकारी योजनाओं का लाभ

इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित किसानों का राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत पंजीयन भी किया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी, ताकि किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें। कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं और संशय पर चर्चा की, जिनका अधिकारियों द्वारा त्वरित समाधान किया गया।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे। सभी किसानों ने एक स्वर में टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। बालाघाट प्रशासन का यह प्रयास जिले को 'प्राकृतिक खेती का मॉडल' बनाने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है।

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