कटनी में ट्रैफिक पुलिस पर व्यापारी का विस्फोटक आरोप
“चालान नहीं, वसूली अभियान!” – जन सुनवाई में पहुंची शिकायत से मचा हड़कंप
कटनी, 17 फरवरी। शहर की ट्रैफिक पुलिस एक बार फिर कठघरे में है। स्थानीय व्यापारी सुनील कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक की जन सुनवाई में पहुंचकर ट्रैफिक अमले पर खुलेआम उत्पीड़न, जबरन चालान, माल जब्ती और अभद्र व्यवहार जैसे सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आते ही पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
“वैध कागज, फिर भी चालान” – चार साल में 11 बार कार्रवाई
व्यापारी का आरोप है कि पिछले चार वर्षों में उनके वाहनों पर 11 बार चालान ठोके गए, जबकि सभी दस्तावेज पूरे और वैध थे। सवाल उठता है—क्या ट्रैफिक नियमों का पालन करने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है?
सड़क किनारे खड़े वाहन से माल जब्ती, ₹60 हजार नुकसान का दावा
12 फरवरी 2026 की शाम झिंझरी मार्ग पर खड़े वाहन से ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित रूप से 2 बोरी वॉशिंग पाउडर और 1 पेटी माल जब्त कर लिया गया। व्यापारी का कहना है कि वाहन यातायात में बाधा नहीं था, फिर भी कार्रवाई की गई। उन्होंने लगभग ₹60 हजार के नुकसान का दावा किया है।
ऑनलाइन शिकायत भी ठंडे बस्ते में
घटना के बाद पुलिस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या शिकायत तंत्र सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है?
“गाली-गलौज और धमकी” – वर्दी की मर्यादा पर सवाल
शिकायत में आरोप है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अपमानजनक व्यवहार किया। महिला पुलिसकर्मी एवं अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कथित दुर्व्यवहार की बात ने वर्दी की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
बदले की भावना से दूसरी कार्रवाई?
व्यापारी का आरोप है कि बाद में उनके दूसरे वाहन पर नो-पार्किंग चालान कर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई। यदि यह सही है, तो यह कानून के नाम पर शक्ति के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है।
जनता पूछ रही – कानून या वसूली?
यह मामला अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल साफ है—
क्या ट्रैफिक व्यवस्था सुधार के नाम पर मनमानी हो रही है?
क्या व्यापारियों को आसान निशाना बनाया जा रहा है?
अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस विस्फोटक शिकायत पर निष्पक्ष जांच करता है या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।
व्यापारी की मांग
निष्पक्ष जांच
दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई
व्यापारियों के उत्पीड़न पर रोक

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