सागर जिले के केसली में आधुनिक खेती के नए प्रयोग: किसानों की सफलता की कहानी

केसली (सागर)। आधुनिक खेती और नवीन तकनीकों के प्रति किसानों की जागरूकता में तेजी से वृद्धि हो रही है। सागर जिले के विकासखंड केसली के ग्राम चौका के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और कम लागत वाली तकनीकों को अपनाने लगे हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में यहां के किसानों ने लो-कॉस्ट शेड नेट (Low-Cost Shade Net) तैयार कर आगामी सीजन की सब्जियों, विशेषकर टमाटर, बैंगन और मिर्च की स्वस्थ पौध तैयार करना शुरू कर दिया है। पुष्पेंद्र गौंड, गोविंद पटेल, बलराम साहू और किशोरी साहू जैसे प्रगतिशील किसानों की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उच्च अंकुरण दर

वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी प्रदीप परिहार ने इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लो-कॉस्ट शेड नेट का मुख्य उद्देश्य किसानों के अनावश्यक कृषि खर्चों में कटौती करना और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, "जब किसान महंगे और उन्नत किस्म के बीज खरीदते हैं, तो पारंपरिक तरीके से जमीन पर बुआई करने पर कई बीज नष्ट हो जाते हैं। शेड नेट और आधुनिक सीडलिंग ट्रे के इस्तेमाल से बीजों का अंकुरण दर काफी बढ़ जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान नहीं होता।"

कोकोपीट और सीडलिंग ट्रे तकनीक के लाभ

  • कीट और फफूंद से सुरक्षा: शेड नेट के अंदर तापमान और नमी नियंत्रित रहती है, जिससे पौध को शुरुआती अवस्था में होने वाले कीट आक्रमण और फंगल इन्फेक्शन से बचाया जा सकता है।
  • स्वस्थ और मजबूत जड़ें: कोकोपीट का उपयोग करने से पौधों की जड़ों का विकास तेजी से और बेहतर होता है।
  • बेहतर उत्पादन: स्वस्थ पौध खेत में रोपने पर तेजी से पनपती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार में वृद्धि होती है।
  • लागत में कमी: लो-कॉस्ट शेड नेट को स्थानीय स्तर पर कम बजट में तैयार किया जा सकता है, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए किफायती है।

किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र

केसली क्षेत्र के इन किसानों की सफलता यह दर्शाती है कि यदि उद्यानिकी विभाग के सही मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों का सही मेल हो, तो कम लागत में भी खेती को अत्यधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। आगामी सीजन में टमाटर, बैंगन और मिर्च की समय पर और रोगमुक्त पौध तैयार होने से किसान अपनी फसल को बाजार में सही समय पर ला सकेंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर भाव मिलेगा। यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रही है कि वे आधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं।