बैढ़न में गूंजी छात्रों की आवाज, “छात्रों की गूँज” कार्यक्रम में कमलेश्वर पटेल ने युवाओं से किया सीधा संवाद

सिंगरौली/बैढ़न।
STATE NEWS AI JOURNALIST SURAJ KUMAR 

 सामुदायिक भवन, बैढ़न में आयोजित “छात्रों की गूँज” कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री एवं CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और युवा साथियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान युवाओं से सीधे संवाद करते हुए उनके विचार, समस्याएं और भविष्य से जुड़ी चिंताओं को सुना गया।
कार्यक्रम का केंद्र बिंदु प्रदेश के युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं के लिए अवसर और उनके भविष्य को लेकर सार्थक चर्चा हुई। युवाओं ने अपने अनुभव और सवाल सामने रखे, वहीं कार्यक्रम के माध्यम से उनके मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर कमलेश्वर पटेल ने कहा कि प्रदेश का युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। युवाओं की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाना सरकार और राजनीतिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज केवल मंचों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षा और रोजगार को युवाओं के भविष्य की बुनियाद बताते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच विश्वास और पारदर्शिता का माहौल होना जरूरी है। युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए बेहतर शिक्षा, समान अवसर और रोजगार के पर्याप्त विकल्प मिलना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह संदेश भी सामने आया कि आज का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर जागरूक है। वह सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अवसर, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहता है। युवाओं के सवालों को राजनीतिक और नीतिगत विमर्श का हिस्सा बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि छात्र-छात्राओं और युवाओं के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार तथा बेहतर भविष्य से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। युवाओं की आवाज को लोकतांत्रिक व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने के लिए लगातार प्रयास करने की बात कही गई।
“छात्रों की गूँज” कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब युवा अपने सवालों के साथ एकजुट होकर आवाज उठाता है, तो वह सिर्फ एक कार्यक्रम की आवाज नहीं रहती, बल्कि बदलाव की मांग बन जाती है।
छात्रों की गूँज अब सिर्फ संवाद नहीं, अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य की आवाज है।