सोचिए, आपने अपनी जमा पूंजी किसी क्रेडिट सोसाइटी की FD में रखी। हर साल ऑडिट होता रहा, सब ठीक बताया गया, और एक दिन पता चला कि समिति पैसा लौटाने की हालत में ही नहीं है। अब केंद्र सरकार ने ऑडिटर के लिए एक तय सवाल-सूची बना दी है, ताकि ऐसी हालत छिपी न रहे।

इस आदेश का नाम है Multi-State Co-operative Societies (Auditor's Report) Order, 2026, यानी MSCARO 2026। सरकारी जानकारी के मुताबिक यह कंपनियों पर लागू CARO की तर्ज पर बना है; इसमें RBI, ICAI और CAG के सुझाव लिए गए। केंद्रीय सहकारी पंजीयक (CRCS) की वेबसाइट पर यह आदेश उपलब्ध है।

पर एक बात शुरू में ही साफ कर लें: यह आदेश सिर्फ मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों पर है, यानी वे समितियाँ जो एक से ज़्यादा राज्य में काम करती हैं और केंद्रीय कानून के तहत पंजीकृत हैं। मध्य प्रदेश की ज़्यादातर गाँव की समितियाँ इसके दायरे में नहीं आतीं।

एक नज़र में: MSCARO 2026
क्याजानकारीआधार
जारी किसने कियाकेंद्रीय सहकारिता मंत्रालयसरकारी बयान
घोषणा14 अक्टूबर 2026सरकारी बयान
कानूनी आधारMSCS एक्ट की धारा 73(6)सरकारी बयान
किन पर लागूसिर्फ मल्टी-स्टेट समितियाँआदेश का नाम
पहला चरण₹1,000 करोड़ से बड़ी समितियाँसरकारी बयान
आगे का लक्ष्य₹50 करोड़ की सीमा तक विस्तारसरकारी बयान
बैंक जमा बीमा₹5 लाख प्रति बैंकDICGC

1. नियम क्या है: ऑडिटर को अब तय सवालों का जवाब देना होगा

अब तक ऑडिट रिपोर्ट में क्या लिखा जाए, इसका कोई एक जैसा ढाँचा नहीं था। नए आदेश में ऑडिटर को वित्तीय, प्रशासनिक और नियम-पालन से जुड़े तय बिंदुओं पर हाँ या ना में जवाब देना होगा और ज़रूरत हो तो टिप्पणी लिखनी होगी।

  • पैसे की सेहत: NPA, बकाया कर्ज, नकदी की स्थिति, जमा, कर्ज वितरण, भुगतान में चूक और उधारी।
  • सदस्यों का पैसा: निवेश की जाँच, फंड का इस्तेमाल, शेयर पूंजी और सदस्यता रिकॉर्ड।
  • प्रबंधन: बोर्ड की बनावट, डायरेक्टर की योग्यता, AGM और बोर्ड मीटिंग, अपने लोगों से लेन-देन।
  • जहाँ लागू हो: साइबर सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) का पालन।

2. किन समितियों पर, और कब से

सरकारी बयान के मुताबिक आदेश चरणों में लागू होगा, ताकि समितियाँ अपना अंदरूनी सिस्टम सुधार सकें। पहले चरण में ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा आकार वाली बड़ी समितियाँ आएँगी। लंबे समय में इसे उन समितियों तक बढ़ाने का लक्ष्य है जो संबंधित वित्तीय पैमानों पर ₹50 करोड़ की सीमा पार करती हैं।

सहकारिता क्षेत्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहला चरण वित्त वर्ष 2027-28 के ऑडिट से शुरू होगा, जिसमें 2026-27 की सकल प्राप्तियाँ, जमा और उधारी या कर्ज और अग्रिम में से कोई एक ₹1,000 करोड़ पार होने पर समिति दायरे में आएगी।

3. घाटा पहले कैसे पकड़ में आएगा

मंत्रालय का कहना है कि ऑडिट की टिप्पणियों से CRCS उन समितियों को पहचान सकेगा जिनमें वित्तीय या प्रबंधन का जोखिम ज़्यादा है, और वहाँ निशाना साधकर जाँच हो सकेगी। मंत्रालय ने इस मानकीकृत ऑडिट डेटा को CRCS पोर्टल से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा है। यह अभी प्रस्ताव है, लागू व्यवस्था नहीं।

4. मध्य प्रदेश के लिए इसका मतलब

प्रदेश में गाँव-गाँव की प्राथमिक कृषि साख समितियाँ (PACS), ज़िला सहकारी केंद्रीय बैंक और राज्य सहकारी बैंक, ये सब आम तौर पर राज्य के सहकारी कानून के तहत पंजीकृत हैं। इनका ऑडिट राज्य के नियमों से होता है, इसलिए MSCARO 2026 इन पर सीधे लागू नहीं होता। सहकारी बैंकों पर RBI की निगरानी अलग से रहती है।

असर उन लोगों पर है जिनका पैसा या सदस्यता किसी मल्टी-स्टेट समिति में है, जैसे कई राज्यों में शाखा चलाने वाली क्रेडिट सोसाइटी। ध्यान रहे, DICGC के मुताबिक जमा बीमा बैंकों पर है, प्राथमिक सहकारी समितियों की जमा उसके दायरे में नहीं आती।

5. सदस्य और जमाकर्ता अपनी समिति में क्या देखें

समिति के प्रमाणपत्र या पासबुक पर देखें कि पंजीयन केंद्रीय पंजीयक (CRCS) से है या राज्य के सहकारिता विभाग से। मल्टी-स्टेट समितियों की जानकारी crcs.gov.in पर देखी जा सकती है।

AGM में जाएँ और पिछले साल की ऑडिट रिपोर्ट, NPA का आँकड़ा और बोर्ड की जानकारी माँगें। औसत से बहुत ज़्यादा ब्याज, समय पर पैसा न लौटाना या मीटिंग न होना, ये चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। शिकायत हो तो मल्टी-स्टेट समिति के लिए CRCS और राज्य समिति के लिए ज़िले के उप/सहायक पंजीयक कार्यालय से संपर्क करें।

आज ही कर लें ये 5 काम

  1. पता करें कि आपकी समिति मल्टी-स्टेट है या राज्य में पंजीकृत।
  2. पिछले साल की ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट की कॉपी माँगें।
  3. NPA, बकाया कर्ज और बोर्ड मीटिंग की जानकारी देखें।
  4. बहुत ज़्यादा ब्याज का वादा हो तो सतर्क रहें।
  5. अपनी जमा की रसीद, पासबुक और सदस्यता कागज़ संभालकर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: नया ऑडिट आदेश किसने जारी किया?

उत्तर: केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने, MSCS एक्ट की धारा 73(6) के तहत। घोषणा 14 अक्टूबर 2026 को हुई।

प्रश्न: क्या यह गाँव की PACS पर लागू है?

उत्तर: नहीं। यह सिर्फ मल्टी-स्टेट सहकारी समितियों के लिए है। राज्य में पंजीकृत PACS का ऑडिट राज्य के नियमों से होता है।

प्रश्न: सबसे पहले कौन सी समितियाँ आएँगी?

उत्तर: पहले चरण में ₹1,000 करोड़ से बड़ी मल्टी-स्टेट समितियाँ। आगे ₹50 करोड़ की सीमा तक विस्तार का लक्ष्य है।

प्रश्न: ऑडिटर अब क्या जाँचेगा?

उत्तर: NPA, बकाया कर्ज, नकदी, जमा, उधारी, निवेश, सदस्यता रिकॉर्ड, बोर्ड, AGM और जहाँ लागू हो वहाँ साइबर सुरक्षा व PMLA पालन।

प्रश्न: क्या समिति की जमा पर बीमा है?

उत्तर: DICGC का ₹5 लाख तक का बीमा बैंकों पर है। प्राथमिक सहकारी समितियों की जमा उसमें शामिल नहीं।

प्रश्न: कैसे पता करूँ कि समिति मल्टी-स्टेट है?

उत्तर: पंजीयन प्रमाणपत्र देखें या समिति से पूछें। मल्टी-स्टेट समितियों की जानकारी crcs.gov.in पर मिलती है।

यह खबर 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। लागू होने की तारीख और सीमाएँ आदेश के अंतिम पाठ पर निर्भर हैं। किसी फैसले से पहले crcs.gov.in, अपने सहकारिता विभाग या समिति से पुष्टि कर लें।