सागर जिले की कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के कड़े रुख के बाद अब रबी फसलों के उपार्जन कार्य में प्रशासनिक कसावट दिखाई देने लगी है। रबी विपणन वर्ष 2024-25 के तहत चना, मसूर और गेहूं की सरकारी खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के उद्देश्य से राजस्व और कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने बीना विकासखंड के विभिन्न केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। शासन की मंशा के अनुरूप किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अब मैदानी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है।
प्रशासनिक सक्रियता और निरीक्षण का उद्देश्य
सागर कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश हैं कि उपार्जन केंद्रों पर आने वाले एक-एक किसान की उपज का सही मूल्यांकन हो और उसे किसी भी स्तर पर प्रताड़ित न किया जाए। इसी कड़ी में राजस्व विभाग की टीम ने बीना विकासखंड के महत्वपूर्ण केंद्रों जैसे पिपरासर, बीना ईटावा, कंजिया, रामपुर और भानगढ़ का दौरा किया। इस निरीक्षण दल में नायब तहसीलदार श्री हेमराज मेहर, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री अवधेश राय सहित संबंधित समितियों के प्रबंधक और नोडल अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल रहे। अधिकारियों ने न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि मौके पर मौजूद किसानों से भी बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा।
व्यवस्था सुधार हेतु प्रमुख दिशा-निर्देश
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने समिति प्रबंधकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है:
1. समयबद्ध खरीदी और त्वरित परिवहन
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि चना और मसूर की खरीदी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाए। सबसे महत्वपूर्ण निर्देश खरीदे गए माल के परिवहन को लेकर दिया गया। अक्सर देखा गया है कि केंद्रों पर माल जमा होने से नई खरीदी प्रभावित होती है और मौसम बिगड़ने पर फसल खराब होने का डर रहता है। इसलिए, खरीदे गए स्टॉक को तत्काल गोदामों तक पहुँचाने के निर्देश दिए गए हैं।
2. तकनीकी फीडिंग और त्वरित भुगतान
किसानों की सबसे बड़ी चिंता उनकी फसल का भुगतान होती है। इसे ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही किसान से उपज ली जाए, उसकी ऑनलाइन फीडिंग पोर्टल पर तुरंत सुनिश्चित की जाए। पोर्टल पर डेटा एंट्री में होने वाली देरी ही अक्सर भुगतान में विलंब का कारण बनती है। अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि किसानों के खातों में राशि पहुंचने में कोई तकनीकी बाधा नहीं आनी चाहिए।
3. केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं
वर्तमान में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए, कलेक्टर ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए केंद्रों पर विशेष व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान प्रबंधकों को हिदायत दी गई कि वे केंद्रों पर छायादार टेंट की व्यवस्था करें ताकि अपनी बारी का इंतजार कर रहे किसानों को धूप में न खड़ा होना पड़े। साथ ही, ठंडे पेयजल हेतु पानी के टैंकरों की उपलब्धता अनिवार्य की गई है।
4. स्लॉट बुकिंग का कड़ाई से पालन
उपार्जन केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करने और अव्यवस्था से बचने के लिए शासन ने स्लॉट बुकिंग सिस्टम लागू किया है। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि किसानों को उनके द्वारा बुक किए गए स्लॉट के अनुसार ही बुलाया जाए, ताकि केंद्र पर अनावश्यक जाम की स्थिति न बने और किसान का समय बर्बाद न हो।
किसानों की समस्याओं का मौके पर निस्तारण
निरीक्षण के दौरान भानगढ़ और कंजिया केंद्रों पर कुछ किसानों ने बारदाने (बोरों) की कमी और तुलाई की धीमी गति की शिकायत की। जिस पर नायब तहसीलदार ने तत्काल संबंधित नोडल अधिकारियों को बारदाने की अतिरिक्त खेप मंगाने और तुलाई के लिए लेबर (श्रमिकों) की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रशासन का लक्ष्य है कि किसान जब अपनी ट्राली लेकर केंद्र पर आए, तो उसे न्यूनतम समय में फ्री कर दिया जाए।
कृषि विभाग की निगरानी और गुणवत्ता मानक
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री अवधेश राय ने अनाज की गुणवत्ता की भी जांच की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित एफएक्यू (FAQ) मानकों के अनुरूप ही फसल की खरीदी की जाए ताकि बाद में भंडारण के समय कोई विवाद न हो। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी फसल को अच्छे से साफ करके और सुखाकर लाएं, ताकि उन्हें अपनी मेहनत का पूरा दाम मिल सके।
आगामी चुनौतियां और प्रशासनिक रणनीति
मध्य प्रदेश में रबी सीजन की खरीदी अपने चरम पर है। आने वाले दिनों में आवक और बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बैकअप प्लान भी तैयार किया है। यदि आवक बढ़ती है, तो खरीदी केंद्रों की संख्या का विस्तार किया जा सकता है और अतिरिक्त परिवहन वाहनों को लगाया जा सकता है। सागर कलेक्टर द्वारा साप्ताहिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड की प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है।
निष्कर्ष और संदेश
बीना क्षेत्र में हुआ यह निरीक्षण इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन अन्नदाता के प्रति संवेदनशील है। भ्रष्टाचार मुक्त और किसान हितैषी उपार्जन प्रक्रिया सुनिश्चित करना ही इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य है। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि वास्तविक किसानों को उनके पसीने की सही कीमत सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी समस्या की स्थिति में सीधे कंट्रोल रूम या संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार से संपर्क कर सकते हैं।
image source : https://sagar.mpinfo.org

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