मध्यप्रदेश के न्यायिक इतिहास में लोक अदालतों की भूमिका सदैव ही विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार, सीधी जिले में वर्ष की द्वितीय 'नेशनल लोक अदालत' का आयोजन 09 मई 2026 को होने जा रहा है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री प्रयाग लाल दिनकर के कुशल मार्गदर्शन में इस आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया है। यह आयोजन न केवल लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने का एक जरिया है, बल्कि समाज में सद्भाव और आपसी समझौते की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक महा-अभियान भी है।

 1.तैयारियों की समीक्षा: बैंक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक 

लोक अदालत के सफल क्रियान्वयन हेतु तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है। इसी तारतम्य में 04 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक का आयोजन किया गया। विशेष न्यायाधीश एवं नेशनल लोक अदालत के प्रभारी अधिकारी श्री यतीन्द्र कुमार गुरू की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय विवादों और ऋण वसूली से संबंधित प्रकरणों का समाधान सुनिश्चित करना था। प्रभारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत न्याय का ऐसा द्वार है जहाँ दोनों पक्ष विजेता बनकर निकलते हैं।

• बैठक में भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया और लीड बैंक के वरिष्ठ प्रबंधकों ने शिरकत की।

• निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों को अधिक से अधिक प्रकरण चिन्हित करने के निर्देश दिए गए।

• बैंक अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे ग्राहकों के साथ समन्वय स्थापित कर छूट के प्रावधानों का लाभ आमजन तक पहुँचाएं।

• प्री-लिटिगेशन स्तर पर ही विवादों को सुलझाने के लिए विशेष डेस्क बनाने पर चर्चा हुई।

 2. इन न्यायालयों में होगा सुनवाई का आयोजन 

न्याय की पहुँच को सुगम बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विकेंद्रीकृत व्यवस्था अपनाई है। 09 मई को आयोजित होने वाली यह लोक अदालत केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तहसील स्तर पर भी न्याय के द्वार खुलेंगे।

• जिला न्यायालय मुख्यालय सीधी।

• सिविल न्यायालय चुरहट।

• सिविल न्यायालय रामपुर नैकिन।

• सिविल न्यायालय मझौली।

इन केंद्रों पर विशेष खंडपीठों का गठन किया जाएगा, जहाँ अनुभवी न्यायाधीश और सुलहकर्ता सदस्य पक्षकारों के बीच मध्यस्थता करेंगे।

 3. क्षेत्राधिकार और प्रकरणों का वर्गीकरण: कौन से मामले होंगे हल? 

लोक अदालत की परिधि अत्यंत व्यापक है। इसमें ऐसे सभी मामलों को प्राथमिकता दी जाती है जहाँ सुलह की गुंजाइश होती है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री मुकेश कुमार शिवहरे के अनुसार, इस आयोजन में दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के राजीनामा योग्य मामलों को शामिल किया गया है।

•  आपराधिक शमनीय प्रकरण:- छोटे-मोटे आपसी झगड़े और मारपीट के मामले जहाँ कानून समझौते की अनुमति देता है।

•  वित्तीय विवाद: - चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट), बैंक वसूली और धन उगाही से जुड़े मामले।

•  पारिवारिक मामले: - वैवाहिक विवाद, भरण-पोषण और पारिवारिक विघटन से संबंधित प्रकरण।

• नागरिक सेवाएं: - बिजली चोरी, जल कर, और अन्य जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित लंबित मामले।

•  मोटर दुर्घटना दावा: - दुर्घटना क्षतिपूर्ति और बीमा दावों का त्वरित निस्तारण।

 4. प्री-लिटिगेशन: मुकदमा शुरू होने से पहले समाधान की अपील 

इस लोक अदालत की एक विशेष विशेषता 'प्री-लिटिगेशन' प्रकरणों पर ध्यान केंद्रित करना है। सचिव श्री मुकेश कुमार शिवहरे ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे उन विवादों को भी लेकर आएं जो अभी तक औपचारिक रूप से न्यायालय की दहलीज तक नहीं पहुँचे हैं।

• प्री-लिटिगेशन के माध्यम से बिना कोर्ट फीस चुकाए कानूनी विवाद का स्थायी समाधान संभव है।

• पक्षकार सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय या संबंधित बैंक/विभाग से संपर्क कर अपना मामला दर्ज करा सकते हैं।

• यह प्रक्रिया न केवल समय बचाती है बल्कि भविष्य की लंबी कानूनी लड़ाइयों से भी सुरक्षा प्रदान करती है।

• बैठक में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्री दीपक शर्मा और तृतीय जिला न्यायाधीश श्री रवीन्द्र कुमार शर्मा ने भी वैवाहिक मामलों में सुलह की संभावनाओं पर बल दिया।

 5. विशेषज्ञ दृष्टिकोण और भविष्य का प्रभाव 

विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था का वह 'सेफ्टी वाल्व' है जो अदालतों में लंबित करोड़ों मुकदमों के दबाव को कम करता है। सीधी में होने जा रहा यह आयोजन जिले के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डालेगा। ऋण वसूली के मामलों के निपटारे से जहाँ बैंकों की एनपीए (NPA) स्थिति में सुधार होगा, वहीं पारिवारिक विवादों के सुलझने से समाज की बुनियादी इकाई यानी परिवार में शांति स्थापित होगी।

•  आर्थिक लाभ:- पक्षकारों को महंगी अदालती प्रक्रिया और वकीलों की लंबी फीस से राहत मिलती है।

•  मनोवैज्ञानिक राहत: - वर्षों से चल रहे मानसिक तनाव का एक ही दिन में अंत हो जाता है।

•  अंतिम निर्णय: - लोक अदालत के फैसले की कोई अपील नहीं होती, जिससे विवाद का हमेशा के लिए अंत हो जाता है।

 6.आमजन के लिए संदेश: अवसर को न गवाएं 

09 मई 2026 का दिन सीधी जिले के नागरिकों के लिए न्याय पाने का एक सुनहरा अवसर है। प्रशासन और न्यायपालिका ने अपनी ओर से मंच तैयार कर दिया है। अब यह जिम्मेदारी आम नागरिकों और पक्षकारों की है कि वे 'सुलह-समझौते' की इस भावना को अपनाएं और अपने विवादों का सम्मानजनक निपटारा करें। यदि आप भी किसी कानूनी उलझन में फंसे हैं, तो आज ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीधी के कार्यालय में संपर्क करें और अपने भविष्य को मुकदमेबाजी के अंधकार से मुक्त करें।

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