मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। विदिशा जिले में शासन की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और पात्र हितग्राहियों तक उनका लाभ समय पर पहुंचाने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में सोमवार को विदिशा जिला मुख्यालय पर एक महत्वपूर्ण समय-सीमा (टीएल) बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता विदिशा के कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने की, जिसमें मुख्य रूप से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित की जा रही विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं, विकास कार्यों और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में योजनाओं की प्रगति का बारीकी से आकलन किया गया।

छात्रावासों में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने टीएल बैठक के दौरान सबसे पहले जिले के सभी विकासखंडों के अंतर्गत संचालित होने वाले शासकीय छात्रावासों (हाॅस्टल) की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से छात्रावासों में विद्यार्थियों के प्रवेश की ताजा स्थिति और वहां उपलब्ध कुल सीटों का पूरा ब्योरा मांगा। चर्चा के दौरान कलेक्टर ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिले के सभी छात्रावासों में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले कोई भी पात्र विद्यार्थी आवासीय सुविधा के लाभ से वंचित न रह जाएं।

इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्होंने संबंधित खंड स्तरीय अधिकारियों को विशेष रूप से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। प्रशासन का मुख्य जोर यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को बेहतर और सुरक्षित माहौल मिल सके, जिसके लिए हॉस्टलों की व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखने पर जोर दिया गया।

ग्राम वन समिति के लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण

बैठक के अगले चरण में कलेक्टर ने ग्राम वन समिति से संबंधित विभिन्न मामलों और प्रशासनिक स्तर पर लंबित पड़े प्रकरणों की भी बिंदुवार समीक्षा की। वनों के संरक्षण और स्थानीय स्तर पर समितियों के सुचारू संचालन से जुड़े इन मामलों को लेकर कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जितने भी लंबित मामले हैं, उन सभी का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाना चाहिए। प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, ताकि जनता के काम समय पर पूरे हो सकें।

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की प्रगति और आंकड़े

बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना की प्रगति का जायजा लेना था। अनुसूचित जाति एवं जनजाति कार्य विभाग के अधिकारियों ने बैठक के दौरान इस योजना के तहत अब तक हुए कार्यों का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने बताया कि विदिशा जिले में इस महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों द्वारा कुल 6,167 आवेदन प्रस्तुत किए गए थे।

इन सभी आवेदनों की विभागीय स्तर पर बारीकी से जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप इनमें से 5,500 आवेदनों को विधिवत स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। प्रशासन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के चलते जिले के कुल 5,090 विद्यार्थियों को इस योजना का सीधा लाभ मिल चुका है। इन पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की कुल राशि का भुगतान किया जा चुका है, जो कि कुल 4 करोड़ 79 लाख 81 हजार 461 रुपये (4,79,81,461 रुपये) बनती है। इतनी बड़ी राशि का सफल और पारदर्शी तरीके से वितरण होना जिले के छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

शेष पात्र आवेदनों के शीघ्र निराकरण के निर्देश

जिले के 5,090 विद्यार्थियों को करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का भुगतान होने पर संतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि जो आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं या शेष रह गए हैं, उनका भी जल्द से जल्द परीक्षण कर शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कोई भी पात्र विद्यार्थी अपनी छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहना चाहिए।

प्रशासन का यह प्रयास विदिशा जिले के युवाओं और छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस प्रकार की प्रशासनिक बैठकों और समीक्षाओं से न केवल योजनाओं में पारदर्शिता आती है, बल्कि सरकारी अमले की कार्यकुशलता भी बढ़ती है, जिसका सीधा फायदा आम नागरिकों और विद्यार्थियों तक पहुंचता है।

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