विदिशा जिले में प्रशासनिक कसावट लाने और आमजन की समस्याओं के त्वरित व प्रभावी समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण समय-सीमा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता विदिशा जिले के कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने की। बैठक के दौरान मुख्य रूप से 'जन विश्वास अभियान' के अंतर्गत चल रहे कार्यों की गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए कि जन विश्वास अभियान के तहत प्राप्त होने वाले तमाम आवेदन, शिकायतें और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज मामलों का संतुष्टिपूर्वक निराकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिला प्रशासन की इस नीति का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर उसकी प्रामाणिकता भी नजर आए।

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया कि शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल अपने कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि मैदानी स्तर पर उतरकर कार्य करें।

गांव-गांव जनसंवाद और धरातलीय निरीक्षण पर जोर

कलेक्टर ने जिले के सभी संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों के गांवों में व्यक्तिगत रूप से पहुंचें। गांवों में जाकर 'जनसंवाद' कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित हो सके। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना और उनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास करना है।

ग्राम भ्रमण के दौरान अधिकारियों को यह भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे गांवों में संचालित होने वाले सरकारी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत कुल बच्चों की संख्या के साथ-साथ उनकी वास्तविक उपस्थिति की भौतिक जानकारी लेनी होगी।

शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की नियमित उपस्थिति

बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा को लेकर कलेक्टर ने गहरी चिंता और प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हमारे देश के नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उनके उज्ज्वल भविष्य का मजबूत निर्माण किया जा सके।

भ्रमण के दौरान जिन बच्चों की अनुपस्थिति स्कूल या आंगनवाड़ी में पाई जाती है, उनके उन स्थानों पर नियमित रूप से न पहुंच पाने के कारणों का गहराई से पता लगाया जाए। इसके बाद उन बच्चों और उनके अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें प्रेरित किया जाए कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल और आंगनवाड़ी भेजें।

बैठक में जिले के विभिन्न स्कूलों में प्रवेश की वर्तमान स्थिति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान 80 प्रतिशत से कम प्रवेश दर्ज करने वाले ब्लॉकवार स्कूलों की सूची बैठक में प्रदर्शित की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम है और बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं, वहां के प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, शिक्षकों से भी यह गहरी अपेक्षा जताई गई है कि वे बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय लाने के लिए उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखें।

अवैध शराब के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और फूड सेफ्टी लाइसेंस निरस्तीकरण

आबकारी विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान विदिशा जिले में संचालित विभिन्न ढाबों की जांच और निरीक्षण पर विशेष चर्चा की गई। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि जिन ढाबा प्रतिष्ठानों में जांच के दौरान अवैध रूप से शराब का भंडारण या सेवन पाया गया है, उनके तत्काल प्रभाव से फूड सेफ्टी लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जन विश्वास अभियान के दौरान जिन-जिन ग्रामों से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उन गांवों की एक स्पष्ट और सटीक सूची तैयार की जाए। इसके आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से शराब का कारोबार करने वालों के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।

खनिज और खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की समीक्षा

खनिज संपदा के अवैध परिवहन और भंडारण को लेकर कलेक्टर ने खनिज विभाग के अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले की भौगोलिक सीमा के भीतर कहीं भी खनिज का अवैध परिवहन या अवैध भंडारण बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को नियमित, सतत भ्रमण और औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। यदि किसी भी स्थान पर अवैध खनन या परिवहन से जुड़ी गतिविधियां पाई जाती हैं, तो उस पर बिना किसी विलंब के तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान खाद्यान्न के आवंटन, उसके समय पर उठाव, उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी प्रक्रिया तथा उचित मूल्य की राशन दुकानों के नियमित संचालन की स्थिति की बिंदुवार जानकारी ली गई।

राशन दुकानों के समयबद्ध संचालन और ई-केवाईसी पर निर्देश

राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिन हितग्राहियों की ई-केवाईसी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, उनकी एक सूची संबंधित राशन दुकानों के मुख्य द्वार के बाहर स्पष्ट रूप से चस्पा की जाए। इससे हितग्राहियों को जानकारी मिल सकेगी और वे अपनी आवश्यक प्रक्रिया को समय पर पूरा करवा सकेंगे।

राशन दुकानों के निर्धारित समय पर न खुलने की मिल रही शिकायतों को कलेक्टर ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने संज्ञान लिया कि कई क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि राशन की दुकानें अपने निर्धारित समय पर नहीं खुलती हैं या कई-कई दिनों तक बंद रखी जाती हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन शिकायतों का संज्ञान लेकर सभी राशन दुकानों का नियमित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित कराया जाए। यदि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधितों के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए।

पीएम श्रम योगी मानधन और संबल योजना के तहत पंजीयन

बैठक के अंतिम चरण में संबल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि, कर्मकार कल्याण मंडल के कार्यों तथा प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के तहत किए जा रहे कल्याणकारी कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों का पंजीयन कराने पर विशेष जोर दिया।

जिले में कार्यरत सभी निर्माण एजेंसियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि उनके कार्यक्षेत्र के दायरे में जितने भी श्रमिक कार्यरत हैं, उन सभी का अनिवार्य रूप से पंजीयन कराया जाए। श्रमिकों को इस कल्याणकारी योजना का प्रत्यक्ष लाभ दिलाने के लिए विशेष पंजीयन कैंप आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने अंत में कहा कि निर्माण कार्यों में लगे अंतिम छोर के श्रमिकों तक शासन की सभी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचना चाहिए और पंजीयन की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

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