13 अगस्त 2026 को मुंबई के भायखला में रहने वाले 72 साल के एक बुज़ुर्ग के फोन पर WhatsApp कॉल आई। रिपोर्टों के मुताबिक कॉल करने वाले ने खुद को एक सरकारी बैंक का सीनियर मैनेजर बताया और "Senior Citizen Card Verification.apk" नाम की फाइल भेजी। बुज़ुर्ग ने फाइल इंस्टॉल की, उसमें अपनी निजी जानकारी और डेबिट कार्ड का ब्योरा भरा, और खाते से ₹5.62 लाख निकल गए।
मामला भायखला थाने में भारतीय न्याय संहिता और IT एक्ट के तहत दर्ज हुआ, फिर मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल और साइबर सेल को सौंपा गया। उसी फाइल की तकनीकी जाँच पुलिस को मध्य प्रदेश तक ले गई। रिपोर्टों के मुताबिक आरोपी इंदौर का है और वहीं उसके दफ्तर पर छापा मारा गया। गिरफ्तारी की जानकारी 5 अक्टूबर 2026 को सामने आई।
1. आरोप क्या है: ठगी का "औज़ार" बनाने वाला
पुलिस के मुताबिक आरोपी खुद लोगों को फोन नहीं करता था। आरोप है कि वह ठग गिरोहों के लिए फर्जी Android ऐप यानी APK फाइलें बनाता और बेचता था। ये ऐप देखने में सरकारी या बैंक के ऐप जैसे लगते थे, पर फोन में आते ही OTP पढ़ सकते थे, डेटा चुरा सकते थे या फोन का रिमोट कंट्रोल ठगों को दे सकते थे।
रिपोर्टों के मुताबिक ये फाइलें सीनियर सिटीज़न कार्ड, पेंशन वेरिफिकेशन, लाइफ सर्टिफिकेट, ट्रैफिक चालान और क्रेडिट कार्ड अपडेट जैसे नामों से भेजी जाती थीं। पुलिस ने आरोपी के दफ्तर से CPU, तीन हार्ड डिस्क, एक पेन ड्राइव, Wi-Fi राउटर और तीन मोबाइल फोन ज़ब्त किए।
ध्यान रहे, यह अभी आरोप है। अदालत में दोष साबित होना बाकी है।
2. ₹15.75 करोड़ या ₹150 करोड़: आँकड़े का सच
कुछ जगह यह मामला ₹150 करोड़ की ठगी के नाम से चल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक शिकायतों और लेनदेन से अब तक करीब ₹15.75 करोड़ की ठगी पहचानी गई है। जाँचकर्ताओं को अंदेशा है कि कुल रकम ₹150 करोड़ से ऊपर जा सकती है, पर यह अनुमान है। इसका मतलब यह भी नहीं कि इतनी रकम आरोपी ने खुद कमाई।
3. ठगी कैसे होती है: चार कदम
- कॉल या मैसेज: कोई बैंक अधिकारी, पेंशन विभाग या ट्रैफिक पुलिस बनकर संपर्क करता है।
- डर या लालच: "कार्ड बंद हो जाएगा", "पेंशन रुकेगी", "चालान कटा है" या "टैक्स लाभ मिलेगा"।
- फाइल: WhatsApp पर .apk फाइल भेजकर इंस्टॉल करने को कहा जाता है।
- खाता खाली: ऐप में भरी जानकारी और आए OTP ठगों तक पहुँचते हैं, फिर पैसा निकल जाता है।
4. MP का दूसरा मामला: देवास पुलिस बिहार तक पहुँची
इसी हफ्ते मध्य प्रदेश से एक और मामला सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक देवास के 62 साल के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से बैंक अधिकारी बनकर ठगों ने पेंशन कार्ड अपडेट और टैक्स लाभ का झाँसा दिया और ₹6.03 लाख ट्रांसफर करवा लिए। देवास पुलिस की टीम ने बैंकिंग लेनदेन और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के बाद करीब 1,500 किमी दूर बिहार के कटिहार से एक आरोपी को पकड़ा और उसके घर से ₹5 लाख नकद ज़ब्त किए।
देवास SP पुनीत गेहलोत ने बताया कि ज़िले में अब तक 130 मामले दर्ज कर 26 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और करीब ₹98.52 लाख ज़ब्त हुए हैं (रिपोर्ट के मुताबिक)।
5. अपना बैंक खाता किसी को न बेचें, न किराए पर दें
ठगी का पैसा अक्सर ऐसे खातों में जाता है जो किसी और के नाम पर होते हैं, इन्हें "म्यूल अकाउंट" कहते हैं। गृह मंत्रालय के I4C ने चेताया है कि ऐसे खातों में ठगी का पैसा आने पर खाताधारक पर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी तक हो सकती है।
आज ही कर लें ये 5 काम
- WhatsApp या SMS पर आई कोई भी .apk फाइल न खोलें, तुरंत डिलीट करें।
- घर के बुज़ुर्गों के फोन में अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल का विकल्प बंद करें।
- बैंक के नाम से कॉल आए तो काट दें और कार्ड के पीछे लिखे नंबर पर खुद फोन करें।
- ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
- अपना बैंक खाता, ATM कार्ड या सिम किसी को न बेचें, न किराए पर दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: आरोपी को किसने गिरफ्तार किया?
उत्तर: मुंबई क्राइम ब्रांच ने, मध्य प्रदेश से। रिपोर्टों के मुताबिक आरोपी इंदौर का है।
प्रश्न: APK फाइल क्या होती है?
उत्तर: यह Android ऐप की इंस्टॉल फाइल है। Play Store के बाहर से आई APK में खतरनाक कोड हो सकता है।
प्रश्न: फाइल गलती से इंस्टॉल कर ली तो?
उत्तर: इंटरनेट बंद करें, ऐप हटाएँ, बैंक को फोन कर कार्ड और UPI ब्लॉक कराएँ और 1930 पर शिकायत करें।
प्रश्न: क्या ठगी की पूरी रकम ₹150 करोड़ है?
उत्तर: अब तक करीब ₹15.75 करोड़ पहचानी गई है। ₹150 करोड़ जाँचकर्ताओं का अनुमान है।
प्रश्न: खाता किराए पर देना अपराध क्यों है?
उत्तर: ठगी का पैसा उसी खाते से घूमता है, इसलिए खाताधारक पर भी कार्रवाई और गिरफ्तारी हो सकती है।
प्रश्न: शिकायत कब करें?
उत्तर: तुरंत। जल्दी शिकायत से रकम रुकवाने की संभावना बढ़ती है।
यह खबर 16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपी पर लगे आरोप अदालत में साबित होना बाकी है। आँकड़े पुलिस द्वारा बताई गई जानकारी पर आधारित हैं और जाँच के साथ बदल सकते हैं। साइबर ठगी की शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर करें।
Continue With Google