रामनगर मैहर-- सोन घड़ियाल अभ्यारण्य का क्षेत्र सीधी शहडोल मैहर जिले के भाग पर फैला है। जहां अवैध बालू की निकासी का मुख्य आधार मैहर जिले के रामनगर विकाश के कुवरी गांव से बालू की निकासी का सारा अवैध उत्खनन का संचालन नित दिन प्रतिदिन होता है।
*प्रतिबंधित क्षेत्र।*
कुवरी, बुढ़वा, सोन घड़ियाल, बुढ़वा सादा, बनास नदी, गोपद, बनास क्षेत्र, सथत्री, ये सभी क्षेत्र बालू के अवैध उत्खनन के क्षेत्र है। जिसमें कुवरी सोनघडियाल सोन नदी क्षेत्र से सबसे ज्यादा अवैध रूप से बालू का उत्खनन किया जाता हैं।
*सोन घड़ियाल ने 18 अप्रैल 2026 को 09 डंपरों पर की कार्यवाही।*
मध्य रात्रि पर सोन घड़ियाल अभ्यारण्य वन विभाग सीधी की टीम सहयोगी रामनगर पुलिस ने 09 डंपरों को मध्यरात्रि पर अवैध बालू का उत्खनन परिवहन प्रतिबंधित क्षेत्र पर पाए जाने पर कार्यवाही करते हुए रामपुर नैकिन थाना पर डंपरों को खड़ा कराया है। किन्तु उसके पश्चात भी बालू की अवैध निकासी उत्खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा रेत माफियाओं के हाईवा के पहिए रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
*पूर्व में मझटोलवा सरपंच तथा वर्तमान पर जनपद सदस्य राजेन्द्र सिंह ने की शिक़ायत।*
मझटोलवा ग्राम पंचायत के सरपंच ने दिन रात सैकड़ा ट्रिप हाईवा डंफर अवैध बालू की निकासी ओभरलोड तेज रफ्तार अनहोनी दुर्घटना पर अवैध बालू निकासी की शिक़ायत की थी। जिस दौरान 09 हाईवा अवैध बालू निकासी पर पकड़े गये किन्तु रेत माफियाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। रेत के अवैध कारोबार पर माफियाओं ने कोई कमी नहीं की।
पुनः दूसरी बार जनपद पंचायत रामनगर के वार्ड 15 के जनपद सदस्य राजेन्द्र सिंह पैपखरा ने भौतिक स्थिति प्रत्यक्षदर्शी ने बालू के अवैध उत्खनन परिवहन की शिक़ायत की नतीजा बस वही शून्य की स्थिति एक दो दिन डंपरों के पहियों को ठंडवाया जाता है और फिर दिन रात कुवरी की अवैध बालू पर डंफर और तेजी से दिन मे दो से तीन ट्रिप पर दौड़ने लगते हैं।
*संरक्षण# कहावत है जब सैंया भये कोतवाल तो अब डर कहे का।*
सोन घड़ियाल अभ्यारण्य, वन विभाग, खनिज विभाग, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी का निश्चय ही माना जा सकता है की संरक्षण होगा बिना संरक्षण के दिन रात अवैध कारोबार का संचालन बेधड़क संभव नहीं है। सफेद पोशाक छोटे भैया नेता, जनप्रतिनिधियों के छर्रों की भूमिका भी देखी जा सकती है।
प्रतिबंधित क्षेत्र पर जेसीबी मशीन तथा निकासी के लिए ट्रैक्टर ट्राली सैकड़ों की तादाद में रहते है। दिन रात अवैध उत्खनन बालू की निकासी के आधार है।
प्राप्त जानकारी अनुसार अवैध बालू की निकासी पर कोई लगाम नहीं है। परिवहन कर्ता छत्तीसगढ़ बालू पिटपास लेकर कउआ डेर वामन कागज लिए रहते हैं। जिसका मोल शून्य पर क्यों की दूसरे राज्य से बालू की पर्ची समय जीएसटी और भी प्रक्रियाए है जो जांच हो तो लेने के देने पड़ेंगे परिवहन कर्ता को।
किन्तु यहां तो सब चोर बाजार का माल गोलमाल है।
सोन घड़ियाल वन विभाग की कार्यवाही के पश्चात भी बालू अवैध उत्खनन के नहीं रूप रहे पहिए
अवैध उत्खनन दौरान कुवरी की तोड़ रहे कमर।

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