State News | स्पोर्ट्स डेस्क | Supriya Jatav

कभी खेल में एक दिन ऐसा आता है, जब मेडल जीतने की खुशी से ज्यादा उस दिन की कहानियां याद रह जाती हैं। 30 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच भारतीय खेलों के लिए कुछ ऐसा ही दौर देखने को मिला। जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल की ऐसी रफ्तार पकड़ी कि पदक तालिका में भारत की स्थिति तेजी से मजबूत हुई। दूसरी तरफ, 30 सितंबर को गुवाहाटी में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए दूसरे वनडे ने क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में भी कई नए अध्याय जोड़ दिए।

एक तरफ भारतीय तीरंदाजों ने लगातार स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा ऊंचा किया, तो शूटिंग में भी भारतीय निशानेबाजों ने सोने पर निशाना साधा। 2 अक्टूबर को महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीम को हराकर ऐतिहासिक स्वर्ण जीता और कुछ ही देर बाद बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर इस सुनहरी कहानी को और मजबूत कर दिया।
Francois Nel/Getty Images

और इन सबके बीच क्रिकेट के मैदान पर शुभमन गिल ने ऐसा दोहरा शतक लगाया, जिसने वनडे क्रिकेट के कई बड़े रिकॉर्ड एक साथ बदल दिए।

30 सितंबर, एशियन गेम्स में भारत का गोल्डन डे

30 सितंबर भारतीय दल के लिए एशियन गेम्स का सबसे चमकदार दिनों में शामिल रहा। भारत ने इस दिन चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा तीरंदाजी की रही, जहां भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों ने टीम और मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कंपाउंड आर्चरी में एक तरह से गोल्ड की झड़ी लगा दी।

महिला कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रिथिका प्रदीप और चिकिता तानिपार्थी की टीम ने स्वर्ण जीता। इसके बाद पुरुष कंपाउंड टीम ने भी गोल्ड अपने नाम किया। मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी भारत ने स्वर्ण पदक हासिल किया।

इन जीतों की खासियत केवल मेडल नहीं थी। भारतीय तीरंदाजों ने उन मुकाबलों में दबाव के बीच अपनी तकनीक, एकाग्रता और अंतिम शॉट तक धैर्य का परिचय दिया। यही वजह है कि 30 सितंबर को भारतीय खेलों के लिए एक यादगार दिन के तौर पर देखा गया।

शूटिंग में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। मिश्रित ट्रैप टीम ने स्वर्ण पदक जीता और इस स्पर्धा में एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। भारतीय निशानेबाजी दल के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसने टीम की गहराई और अलग-अलग शूटिंग स्पर्धाओं में भारत की मौजूदगी को दिखाया।

30 सितंबर के अंत तक भारत की कुल पदक संख्या 56 पहुंच चुकी थी, जिसमें 9 स्वर्ण, 21 रजत और 26 कांस्य पदक शामिल थे।

लेकिन असली कहानी अभी बाकी थी।

1 अक्टूबर, पदकों की रफ्तार बरकरार

1 अक्टूबर को भारत ने स्वर्ण पदक नहीं जोड़ा, लेकिन पदक जीतने और फाइनल में पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने पाकिस्तान को हराकर फाइनल में जगह बनाई, जबकि पुरुष क्रिकेट टीम ने भी श्रीलंका को हराकर स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रवेश किया।

क्रिकेट सेमीफाइनल में भारत ने श्रीलंका को 124 रन से हराया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 169 रन बनाए और श्रीलंका की टीम केवल 45 रन पर सिमट गई। ईशान किशन ने 46 गेंदों पर नाबाद 80 रन बनाए, जबकि युवा वैभव सूर्यवंशी ने अपने डेब्यू पर 38 रन की तेज पारी खेली। जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल और अभिषेक शर्मा की गेंदबाजी ने श्रीलंका को संभलने का मौका नहीं दिया।

अब पुरुष क्रिकेट के फाइनल में भारत का सामना पाकिस्तान से होना है। यानी एशियन गेम्स में क्रिकेट का अगला अध्याय भी रोमांच से भरा रहने वाला है।

1 अक्टूबर के बाद भारत के खाते में 10 स्वर्ण, 23 रजत और 32 कांस्य सहित 65 पदक पहुंच चुके थे।

2 अक्टूबर, महिलाओं ने लिखी इतिहास की नई इबारत

अगर 30 सितंबर को कंपाउंड तीरंदाजों ने भारत के लिए गोल्ड की शुरुआत तेज की थी, तो 2 अक्टूबर को महिला रिकर्व टीम ने उस सुनहरी कहानी में ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया।

अंकिता भकत, कीर्ति और कुमकुम अनिल मोहोड़ की भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीत लिया।

इस जीत की अहमियत समझने के लिए केवल स्कोर देखना काफी नहीं है। दक्षिण कोरिया इस स्पर्धा की सबसे मजबूत ताकतों में रहा है। भारतीय टीम इससे पहले इस स्पर्धा के एशियन गेम्स फाइनल तक भी नहीं पहुंची थी। लेकिन 2 अक्टूबर को भारतीय तीरंदाजों ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

मैच के निर्णायक क्षणों में कुमकुम मोहोड़ की शूटिंग ने खास भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने 5-3 से मुकाबला अपने नाम किया और इतिहास में पहली बार इस स्पर्धा का एशियाई चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

इसके बाद बॉक्सिंग रिंग से भी सोने की खबर आई। लवलीना बोरगोहेन ने चीन की बाओ ज़ीई को हराकर महिला 75 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीता। यह लवलीना का एशियन गेम्स में पहला स्वर्ण पदक है।

इस तरह 2 अक्टूबर तक भारत के खाते में 12 स्वर्ण पदक पहुंच चुके थे। कुल पदकों की संख्या 70 हो गई थी, जिसमें 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य शामिल थे। भारत पदक तालिका में छठे स्थान तक पहुंच गया।

यानी 30 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच भारत ने छह और स्वर्ण पदक अपने नाम किए। तीन दिनों में चार गोल्ड, फिर दो और गोल्ड। यही वजह है कि भारतीय खेल प्रेमियों के बीच यह दौर गोल्डन स्प्रिंट की तरह महसूस हुआ।

Rank

Nation

Gold

Silver

Bronze

Total

1

China

157

75

65

297

2

Japan*

63

80

81

224

3

South Korea

33

35

56

124

4

Uzbekistan

17

21

20

58

5

Thailand

14

11

15

40

6

India

12

25

34

71


source:  https://olympic.ind.in/asian-games-2026/

अब बात गुवाहाटी की, जहां क्रिकेट ने सारे रिकॉर्ड हिला दिए

एशियन गेम्स की इस गोल्डन कहानी के बीच 30 सितंबर को गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा वनडे खेला गया।

मैच में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट पर 405 रन बना दिए। यह वेस्टइंडीज का वनडे क्रिकेट में पहली बार 400 रन का आंकड़ा पार करना था। इससे पहले उसका सर्वश्रेष्ठ वनडे स्कोर 389 रन था।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

वेस्टइंडीज की पारी में तीन बल्लेबाजों ने शतक लगाया। जॉन कैंपबेल ने 101, कप्तान शाई होप ने 104 और आमिर जंगू ने 114 रन बनाए। एक ही वनडे पारी में एक टीम के तीन बल्लेबाजों का शतक लगाना बेहद दुर्लभ उपलब्धि है और यह अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में केवल छठी बार हुआ।

वेस्टइंडीज को शायद लगा होगा कि 406 रन का लक्ष्य भारत के लिए बहुत बड़ा होगा। लेकिन इसके बाद गुवाहाटी में शुभमन गिल और रोहित शर्मा ने ऐसा खेल दिखाया कि 400 से ज्यादा का लक्ष्य भी अचानक छोटा नजर आने लगा।

शुभमन गिल का दोहरा शतक, रिकॉर्ड्स की बौछार

कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 223 रन बनाए। उन्होंने 133 गेंदों में दोहरा शतक पूरा किया और वनडे क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
IND vs WI 2026/27, IND vs WI 2nd ODI Match Report, September 30, 2026 -  Gill 223* sets up record chase for IndiaImage source: crickinfo

गिल के साथ रोहित शर्मा ने भी शानदार शतक लगाया। रोहित ने 75 गेंदों पर 101 रन बनाए। दोनों ने पहले विकेट के लिए 255 रन की साझेदारी की, जो भारत की घरेलू धरती पर वनडे में सबसे बड़ी ओपनिंग साझेदारी बन गई।

भारत ने 406 रन का लक्ष्य केवल 43.3 ओवर में हासिल कर लिया। भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज की और 39 गेंदें अभी बाकी थीं।

यह वनडे क्रिकेट इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज भी बन गया।

सोचिए, एक ही मैच में पहले वेस्टइंडीज की ओर से 405 रन, फिर भारत की ओर से 406 रन का सफल पीछा। कुल मिलाकर मुकाबले में 800 से ज्यादा रन बने। पांच शतक लगे और फिर भी मैच 50 ओवर तक नहीं गया।

विराट कोहली और कुलदीप यादव ने भी छोड़ी अपनी छाप

इस मुकाबले में विराट कोहली और रुतुराज गायकवाड़ ने भी भारतीय पारी को मजबूती दी। गिल के दोहरे शतक और रोहित के शतक ने सुर्खियां जरूर बटोरीं, लेकिन इस मुकाबले में एक और बड़ी उपलब्धि भारतीय गेंदबाज कुलदीप यादव के नाम रही।

कुलदीप ने वनडे क्रिकेट में 200 विकेट पूरे किए। उन्होंने यह उपलब्धि 123 मैचों में हासिल की और भारत के सबसे तेज 200 वनडे विकेट लेने वाले स्पिनर बन गए। वह कुल मिलाकर वनडे क्रिकेट में 200 विकेट तक पहुंचने वाले भारत के नौवें गेंदबाज हैं।

यानी गुवाहाटी का यह मुकाबला सिर्फ एक जीत नहीं था। यह बल्लेबाजी, गेंदबाजी और रिकॉर्ड तीनों का संगम था।

तीन दिन, दो मैदान और भारतीय खेलों की एक ही कहानी

अगर इन तीन दिनों को एक साथ देखें तो तस्वीर बेहद दिलचस्प नजर आती है।

जापान में भारतीय तीरंदाज लक्ष्य के बीचोंबीच निशाना साध रहे थे। शूटिंग में निशानेबाज गोल्ड पर निशाना लगा रहे थे। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना ने चीन की चुनौती को पार किया। हॉकी टीम फाइनल तक पहुंची और क्रिकेट टीम ने भी स्वर्ण पदक मुकाबले में जगह बनाई।

और भारत से हजारों किलोमीटर दूर गुवाहाटी में क्रिकेट की पिच पर शुभमन गिल ने 223 रन की नाबाद पारी खेलकर इतिहास रच दिया।

खेल की खूबसूरती यही है। कभी किसी खिलाड़ी को जीत के लिए आखिरी तीर तक इंतजार करना पड़ता है, कभी बॉक्सर को हर राउंड में खुद को साबित करना पड़ता है और कभी बल्लेबाज को 400 से ज्यादा रन के लक्ष्य का पीछा करना पड़ता है।

इन तीन दिनों में भारतीय खेलों ने इन सभी रंगों को एक साथ दिखाया।

आगे क्या?

एशियन गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं। पुरुष क्रिकेट का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच होना है। पुरुष हॉकी टीम भी स्वर्ण पदक की दौड़ में है। महिला हॉकी टीम और कई भारतीय मुक्केबाजों के सामने भी पदक जीतने के मौके हैं। 2 अक्टूबर के बाद भी भारतीय दल के लिए कई अहम मुकाबले बाकी हैं।

इसलिए फिलहाल पदकों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण वह आत्मविश्वास है, जो भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से दिखाई दे रहा है।

30 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच भारत ने छह स्वर्ण पदक जोड़े। महिला रिकर्व टीम ने इतिहास बनाया। लवलीना ने एशियन गेम्स का पहला गोल्ड जीता। क्रिकेट में गिल ने दोहरा शतक लगाया और भारत ने 406 रन का लक्ष्य हासिल किया।

एक तरफ तीरंदाजी में लक्ष्य के बीचोंबीच निशाना लगा, दूसरी तरफ क्रिकेट में गेंद सीमा रेखा के पार जाती रही।

भारतीय खेलों के लिए यह सिर्फ मेडल और रिकॉर्ड का दौर नहीं है। यह उस विश्वास का दौर है, जिसमें खिलाड़ी बड़े लक्ष्य देखकर घबराने के बजाय उसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। एशियन गेम्स में अभी तिरंगे की कहानी बाकी है और क्रिकेट के मैदान पर भी रिकॉर्ड की किताब में कुछ और पन्ने जुड़ने बाकी हैं।