मध्य प्रदेश के मैहर जिले का मुकुंदपुर क्षेत्र विश्व पटल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। सफेद शेरों (व्हाइट टाइगर) की सफारी के लिए विश्व प्रसिद्ध इस क्षेत्र ने पर्यटन के मानचित्र पर मैहर को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक ऐसा स्याह पहलू भी है, जो पिछले 12 वर्षों से अनसुना और अनदेखा है। मुकुंदपुर के ग्रामीण अंचल के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा को निखारने के लिए बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर एक व्यवस्थित खेल मैदान के लिए बीते एक दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हैं।
12 वर्षों का लंबा इंतजार और खोखले आश्वासन
मुकुंदपुर के युवाओं और खेल प्रेमियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई है। दर्जनों बार आवेदन सौंपे गए और मौखिक रूप से कई बार आश्वासन भी मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की कार्यप्रणाली से निराश होकर अब ग्रामीण खिलाड़ियों ने यह कहना भी लगभग बंद कर दिया है कि उन्हें सुविधाओं की उम्मीद है। बार-बार के खोखले आश्वासनों ने युवाओं के विश्वास को डगमगा दिया है।
प्रतिभाओं का दमन और अधूर सपने
यह स्थिति केवल प्रशासनिक उपेक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों प्रतिभावान खिलाड़ियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न है, जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को अधूरा छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। मुकुंदपुर के गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहाँ के युवाओं में खेल के प्रति जुनून है, कठिन परिश्रम करने का जज्बा है और राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति है। परंतु, एक उचित खेल मैदान और खेल संसाधनों के बिना उनकी यह ऊर्जा सही दिशा नहीं पा रही है।
अनेक युवा खिलाड़ी अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है। एक तरफ राज्य और केंद्र सरकार खेलो इंडिया और अन्य योजनाओं के माध्यम से खेल को बढ़ावा देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ मैहर जिले के मुकुंदपुर जैसे क्षेत्रों में खिलाड़ी एक छोटे से मैदान के लिए 12 साल से तरस रहे हैं। यह विरोधाभास प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्वयं के बूते मैदान निर्माण की पहल
जब प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय तक इन खिलाड़ियों की आवाज नहीं सुनी, तो मुकुंदपुर के युवाओं ने हार नहीं मानी है। अपनी हताशा को संघर्ष में बदलकर उन्होंने खुद ही अपने लिए खेल का मैदान तैयार करने का साहसी निर्णय लिया है। वे स्वयं के श्रमदान और सीमित संसाधनों से मैदान समतल करने के कार्य में जुट गए हैं। यह पहल दिखाती है कि मुकुंदपुर के युवाओं के पास जज्बा और मेहनत की कोई कमी नहीं है, लेकिन वे शासन से सिर्फ एक सहयोगी की भूमिका की उम्मीद रखते हैं, जो उन्हें वर्षों से नहीं मिली।
सरकार के समक्ष गूंजते गंभीर सवाल
मुकुंदपुर के खिलाड़ियों की यह स्थिति कई गंभीर सवालों को जन्म देती है, जिनका उत्तर सरकार और प्रशासन को देना चाहिए:
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क्या ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों की प्रतिभा केवल कागजों और आश्वासनों की भेंट चढ़ती रहेगी?
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जिस क्षेत्र को विश्व स्तर पर प्रसिद्धि मिली है, वहाँ की खेल प्रतिभाओं की उपेक्षा क्यों की जा रही है?
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आखिर एक खेल मैदान आवंटित करने और उसे विकसित करने में 12 वर्षों का समय क्यों लग गया?
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क्या सरकार का ध्यान केवल पर्यटन और बड़ी परियोजनाओं तक ही सीमित है, या वे युवाओं के खेल सपनों को भी महत्त्व देते हैं?
समाधान की है आवश्यकता, वादों की नहीं
मुकुंदपुर के खिलाड़ी अब केवल आश्वासन सुनकर संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उनकी मांग अब वादों से आगे बढ़कर ठोस सुविधाओं और समाधानों पर टिकी है। उन्हें एक ऐसा सुरक्षित और सुव्यवस्थित मैदान चाहिए जहाँ वे बिना किसी डर या असुविधा के अभ्यास कर सकें। उन्हें ऐसे खेल संसाधन चाहिए जो उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाएं।
यह केवल खेल मैदान की मांग नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों युवाओं की सामूहिक आवाज है जो मैहर, मध्य प्रदेश और भारत का नाम रोशन करने का सामर्थ्य रखते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि खेलों में निवेश केवल बजट का खर्च नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी का निर्माण है।
निष्कर्ष
मुकुंदपुर की खेल प्रतिभाओं का 12 वर्षों का यह लंबा इंतजार शासन और प्रशासन के लिए एक आईना है। एक ओर जहाँ हम खेल जगत में वैश्विक महाशक्ति बनने का सपना देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुकुंदपुर जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा उस सपने को जमीनी धरातल पर कमजोर करती है। मुकुंदपुर के युवाओं ने जिस तरह स्वयं मैदान बनाने का बीड़ा उठाया है, वह उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है। अब समय आ गया है कि शासन इस मुद्दे को प्राथमिकता दे। मुकुंदपुर के खिलाड़ियों की इस पुकार को और अधिक समय तक अनसुना करना न केवल उनकी प्रतिभा का अपमान होगा, बल्कि यह उनके भविष्य के साथ भी एक बड़ा अन्याय होगा।
image source : gemini ai
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