जन्मजात हृदय रोग से जंग जीतकर सुलोचना ने पाई नई जिंदगी
बैतूल: विकासखंड भीमपुर के ग्राम कामोद की 10 वर्षीय आदिवासी बालिका कुमारी सुलोचना चिल्हाटे ने जन्मजात हृदय रोग से जंग जीतकर एक नई जिंदगी पाई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत समय पर पहचान और निःशुल्क उपचार मिलने से अब सुलोचना पूरी तरह स्वस्थ है।
खंड चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीमपुर डॉ. दीपक निगवाल ने बताया कि सुलोचना देखने में हष्ट-पुष्ट थी, लेकिन उसे जल्दी थकान होती थी और वह अक्सर सर्दी-खांसी से ग्रसित रहती थी। इस स्थिति को लेकर उसकी माता मनकु चिल्हाटे चिंतित रहती थीं।
26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के डॉ. राकेश तिवारी ने स्कूल भ्रमण के दौरान सुलोचना को संभावित हृदय रोगी के रूप में चिन्हित किया और परिजनों को निःशुल्क उपचार की जानकारी दी।
जन्मजात हृदय रोग की जानकारी मिलने पर उसके पिता दिलीप चिल्हाटे और माता मनकु चिल्हाटे चिंतित हो गए और ऑपरेशन को लेकर डर रहे थे। डॉ. राकेश तिवारी तथा आशा सहयोगी जगोती करोचे ने लगातार समझाइश देकर परिजनों को ऑपरेशन के लिए तैयार किया।
23 नवंबर 2025 को सुलोचना को शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र जिला चिकित्सालय बैतूल भेजा गया। 14 दिसंबर 2025 को जेपी हॉस्पिटल भोपाल में संपूर्ण परीक्षण के बाद जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि हुई। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बैतूल डॉ. मनोज कुमार हुरमाडे ने 29 जनवरी 2026 को श्री सत्यसाई हार्ट अस्पताल अहमदाबाद ऑपरेशन के लिए रेफर किया।
31 जनवरी 2026 को श्री सत्यसाई हॉस्पिटल अहमदाबाद में सुलोचना का वीएसडी डिवाइस क्लोजर का निःशुल्क ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत बाल हृदय उपचार योजना से उसे संपूर्ण उपचार निःशुल्क मिला।
वर्तमान स्थिति: सुलोचना अब पूर्णतः स्वस्थ है। उसके पिता दिलीप चिल्हाटे, माता मनकु चिल्हाटे और पूरा परिवार स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रति आभार व्यक्त कर रहा है।

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